
x
Russia रूस: सरकारी अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल आरटी (आरटी) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई पर भारत की संतुलित प्रतिक्रिया की सराहना करते हुए कहा गया है कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स समूह, अमेरिका जैसी विरोधी शक्ति की चुनौतियों से निपटने के लिए चीन के वर्चस्व वाले नेतृत्व की तुलना में अधिक सक्षम साबित हो सकता है। लेख में कहा गया है कि भारत के सामने ब्रिक्स जैसे विशाल समूह के आर्थिक और राजनीतिक एजेंडे को दिशा देने की बड़ी जिम्मेदारी है। इसके साथ-साथ उसे वैश्विक शक्तियों के साथ भू-राजनीतिक संतुलन भी साधना होगा, जिनके हित अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे विविध क्षेत्रों में फैले हुए हैं।
भारत ने औपचारिक रूप से वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाल ली है। इस दौरान भारत से ग्लोबल साउथ के विकास और व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है, वहीं उसे भू-राजनीतिक तनावों और विस्तारित सदस्यता वाले समूह को भी संभालना होगा। वर्तमान में ब्रिक्स में 11 सदस्य देश शामिल हैं। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा हाल ही में सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, इंडोनेशिया और ईरान इस समूह में शामिल हुए हैं।
ब्रिक्स का विस्तार वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में इसके बढ़ते महत्व को दर्शाता है। यह समूह विश्व की बड़ी आबादी और वैश्विक जीडीपी के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। इसे पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले संस्थानों के विकल्प के रूप में देखा जाता है और इसका उद्देश्य बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना है। यह मंच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने का कार्य करता है। साथ ही, यह वैश्विक शासन व्यवस्था में ग्लोबल साउथ के देशों की भूमिका बढ़ाने और संयुक्त राष्ट्र व विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की वैधता और प्रभावशीलता में सुधार की दिशा में काम करता है।
रिपोर्ट में शनिवार को वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई का भी जिक्र किया गया है। लेख के अनुसार, यह घटना ब्रिक्स देशों को संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं की कथित विफलताओं को उजागर करने का अवसर प्रदान करती है। लेख में कहा गया है कि नए वर्ष में भारत द्वारा ब्रिक्स अध्यक्षता संभालने के साथ ही अमेरिकी बलों ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया। इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी निंदा हुई, खासकर चीन, ब्राजील और रूस जैसे ब्रिक्स देशों की ओर से।
आरटी की रिपोर्ट में भारत की सतर्क और संतुलित प्रतिक्रिया की सराहना की गई है और कहा गया है कि ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए भारत को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बेहद संतुलन साधना होगा। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि ब्रिक्स समूह अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करना चाहता है और भारत की 2026 की अध्यक्षता पर सभी की निगाहें टिकी होंगी, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर ब्रिक्स के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की है।
Tagsभारत ब्रिक्स अध्यक्षताRT रिपोर्टब्रिक्स 2026भारत की कूटनीतिवेनेजुएला अमेरिका कार्रवाईग्लोबल साउथबहुध्रुवीय विश्व व्यवस्थाब्रिक्स विस्तारडोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्सभारत अमेरिका संतुलनजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





