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Delhi दिल्ली। अमेरिका के फ्लोरिडा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी प्रेसिडेंट वोलोडिमीर जेलेंस्की की मुलाकात होने वाली है। दोनों देशों के राष्ट्रपति की मुलाकात से पहले रूस ने कीव पर अब तक का सबसे बड़ा हमला कर दिया है। हालात को देखते हुए ये कयास लगाए जा रहे हैं कि राष्ट्रपति पुतिन ट्रंप की मध्यस्थता से पहले अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं।
रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव और आसपास के इलाकों पर बड़ा ड्रोन और मिसाइल हमला किया। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए। हमलों की वजह से लाखों लोग बेघर हो गए। रूस की ओर से किए गए इस हमले के बाद जेलेंस्की की प्रतिक्रिया भी सामने आई। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इसे इस बात का सबूत बताया कि पुतिन को युद्ध पसंद है और वे शांति नहीं चाहते।
दूसरी ओर जेलेंस्की फ्लोरिडा में ट्रंप से मिलकर एक बदले हुए 20 प्वाइंट के पीस प्लान पर बात करने वाले हैं। अमेरिका की तरफ से प्रस्तावित यह पीस प्लान पहले 28-प्वाइंट में ड्राफ्ट किया गया था। बाद में इसे बदलकर 20 प्वाइंट तक रखा गया, हालांकि रूस बार-बार कह रहा है कि युद्ध खत्म करना है और इसके लिए यूक्रेन को उसकी शर्तों को मानना होगा। हालांकि वह किसी समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार नहीं है।
रूस ने अपने ताजा हमले के साथ इस बात का संकेत दे दिया है कि अभी भी जमीन पर उसका नियंत्रण है। अगर हमले की टाइमिंग को देखें, तो रूस ने कीव पर यह हमला ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात से पहले किया है। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि शायद रूस ट्रंप के साथ मध्यस्थता से पहले अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है। पुतिन दबाव बढ़ाने की कोशिश में हैं।
रूस यह भी संदेश दे रहा है कि वह अब भी कीव पर हमले की ताकत रखता है। इसके साथ ही उसने एक बात और साफ कर दी है कि रूस के ऊपर कोई दबाव काम नहीं करने वाला है। पुतिन ने साफ शब्दों में कहा है कि रूस के ऊपर अपनी बात मनवाने के लिए दुनिया का कोई भी देश दबाव नहीं बना सकता। इससे पहले राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा था कि अगर रूस कम से कम 60 दिनों के लिए सीजफायर पर सहमत होता है, तो वह इस संकट को खत्म करने के लिए एक शांति योजना पर जनमत संग्रह कराने के लिए तैयार हैं।
सिन्हुआ के अनुसार शुक्रवार को अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस के साथ एक फोन इंटरव्यू में जेलेंस्की ने कहा था कि वह अब भी हालात को बेहतर करने के लिए बातचीत करना चाहेंगे, लेकिन अगर प्लान में इस मुद्दे पर 'बहुत मुश्किल' फैसला लेने की जरूरत पड़ती है, तो आगे बढ़ने का सबसे अच्छा रास्ता पूरे 20 पॉइंट वाली शांति योजना को जनमत संग्रह के लिए रखना होगा। उन्होंने कहा कि वोट कराने के लिए 60 दिन का सीजफायर 'कम से कम' जरूरी है, क्योंकि ऐसे जनमत संग्रह में बड़े राजनीतिक, लॉजिस्टिकल और सुरक्षा से जुड़े पेंच होंगे।
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