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ईरान-अमेरिका तनाव के बीच दो राजनयिकों को लेकर बढ़ा विवाद, दोनों देश आमने-सामने

jantaserishta.com
4 Oct 2026 5:01 PM IST
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच दो राजनयिकों को लेकर बढ़ा विवाद, दोनों देश आमने-सामने
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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच दो ईरानी राजनयिकों को लेकर नया विवाद सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों अधिकारी संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे थे। महासभा का कार्यक्रम खत्म होने के बाद ज्यादातर ईरानी प्रतिनिधि अमेरिका से वापस चले गए, लेकिन ये दोनों राजनयिक कुछ समय तक न्यूयॉर्क में ही मौजूद रहे।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने पहले न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन को निर्देश दिया था कि महासभा के लिए आए प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य अमेरिका से रवाना हो जाएं। बाद में अमेरिकी अधिकारियों को जब पता चला कि दो राजनयिक अभी भी न्यूयॉर्क में हैं, तो ईरानी मिशन को दोबारा इसकी जानकारी दी गई।
इसके बाद दोनों को अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया। बताया गया कि एक राजनयिक शुक्रवार रात और दूसरे ने शनिवार सुबह न्यूयॉर्क से प्रस्थान किया।
UN महासभा में ईरानी राष्ट्रपति ने रखा था अपने देश का पक्ष
इस पूरे घटनाक्रम से पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने न्यूयॉर्क पहुंचे थे। 23 सितंबर को अपने भाषण में उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजराइली कार्रवाई को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।
पजशकियान ने अपने भाषण के दौरान युद्ध में मारे गए बच्चों की तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने लंबे समय से किसी दूसरे देश पर हमला नहीं किया है और खुद कई हमलों तथा आतंकवाद का सामना करता रहा है।
ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनका देश परमाणु हथियार हासिल नहीं करना चाहता, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के इस्तेमाल के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने पश्चिमी देशों की नीतियों और ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल उठाए।
ईरान ने राजनयिकों को निकाले जाने की बात नकारी
अमेरिका की कार्रवाई के दावे को ईरान ने अलग तरीके से पेश किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि UN महासभा में शामिल होने वाले सभी ईरानी राजनयिक अपने तय कार्यक्रम के अनुसार अमेरिका से रवाना हुए।
उन्होंने अमेरिकी पक्ष के दावे पर नाराजगी जताते हुए कहा कि राजनयिकों को देश से बाहर भेजने की बात को उपलब्धि के रूप में पेश करना उचित नहीं है। अराघची ने इसे अमेरिका की हताशा और हार का संकेत बताया तथा UN के मेजबान देश के रूप में उसकी जिम्मेदारियों पर भी सवाल उठाए।
UN प्रतिनिधियों के लिए अमेरिका में रहने के नियम
संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनियाभर के राष्ट्रपति, मंत्री, राजनयिक और सरकारी अधिकारी हिस्सा लेते हैं। हालांकि, किसी प्रतिनिधि का महासभा में शामिल होना उसे अमेरिका में अनिश्चित समय तक रहने की अनुमति नहीं देता।
विदेशी प्रतिनिधियों को वीजा, राजनयिक दर्जे और अमेरिकी नियमों के अनुसार तय अवधि तक ही रहने की अनुमति होती है। कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी अमेरिका में रुकने के लिए जरूरी अनुमति होना जरूरी है। इसी वजह से अमेरिका ने दोनों ईरानी अधिकारियों को देश छोड़ने के लिए कहा।
UN में स्टारलिंक को लेकर भी चर्चा में रहा ईरान
UN महासभा के दौरान ईरान से जुड़ा एक और घटनाक्रम चर्चा में रहा। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को स्टारलिंक डिवाइस देने की पेशकश की थी। उनका कहना था कि इसके जरिए ईरान के लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर अपनी आवाज दुनिया तक पहुंचा सकते हैं।
नेतन्याहू के भाषण के बाद एक इजराइली अधिकारी डिवाइस लेकर ईरानी अधिकारियों के पास भी पहुंचे। हालांकि, ईरानी प्रतिनिधियों ने इसे स्वीकार करने में रुचि नहीं दिखाई।
ईरान में युद्ध का बड़ा मानवीय नुकसान
ईरान में जारी युद्ध के कारण बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान का दावा किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुई लड़ाई में हजारों लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।
युद्ध से इमारतों और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। कई अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित हुए हैं। ऐसे में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आम लोगों और देश की बुनियादी व्यवस्था पर भी पड़ा है।
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