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रूस-यूक्रेन जंग में अब रोबोट भी लड़ रहे युद्ध, Robot और ड्रोन ने मिलकर पूरे किए 15,700 से ज्यादा मिशन

jantaserishta.com
28 Sept 2026 12:35 PM IST
रूस-यूक्रेन जंग में अब रोबोट भी लड़ रहे युद्ध, Robot और ड्रोन ने मिलकर पूरे किए 15,700 से ज्यादा मिशन
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नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन ने बड़े स्तर पर जमीनी रोबोट के इस्तेमाल का दावा किया है। यूक्रेनी सेना के मुताबिक, ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ के दौरान रोबोट और ड्रोन के जरिए रूसी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इस अभियान में करीब 3 हजार रूसी सैनिकों के मारे जाने और डोनेट्स्क क्षेत्र में 8 इलाकों पर दोबारा नियंत्रण पाने का दावा किया गया है। यूक्रेन अब भविष्य के युद्ध के लिए रोबोट्स की बड़ी फौज तैयार करने की योजना पर भी काम कर रहा है।
ऑपरेशन विवाल्डी में रोबोट और ड्रोन का इस्तेमाल
यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स के अनुसार, ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ मई में शुरू हुआ था और सितंबर के आखिरी सप्ताह में पूरा किया गया। सेना ने इसकी जानकारी गुरुवार को सार्वजनिक की। यूक्रेनी सेना का दावा है कि इस अभियान में रोबोट और ड्रोन की मदद से रूस के करीब 3,000 सैनिकों को मार गिराया गया। इसके अलावा पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में 5 गांवों और 3 बस्तियों पर फिर से नियंत्रण हासिल किया गया। अभियान के दौरान रोबोट ने 15,700 से ज्यादा मिशन पूरे किए।
ड्रोन रोबोट को 14.5 किलोमीटर अंदर तक ले गए
इस अभियान में चार पहियों वाले जमीनी रोबोट इस्तेमाल किए गए। इन मशीनों में विस्फोटक भरे जाते थे। बड़े ड्रोन इन्हें रूसी सेना की सीमा से करीब 14.5 किलोमीटर अंदर तक ले जाकर जमीन पर उतारते थे।
इसके बाद रोबोट खुद जमीन पर आगे बढ़ते हुए रूसी सैनिकों के ठिकानों तक पहुंचते थे और हमला करते थे। इनमें लगे कैमरों के जरिए ऑपरेटर आसपास की गतिविधियों पर नजर रखता था। इन रोबोट्स का इस्तेमाल रूसी कमांड सेंटर, सैनिकों के ठिकानों, हथियार और सामान रखने वाली जगहों तथा नदी पार करने के रास्तों को निशाना बनाने के लिए किया गया।
सैनिकों को सीधे खतरे में जाने से बचाने की कोशिश
इस रणनीति का मकसद यूक्रेनी सैनिकों को सीधे खतरे में डाले बिना रूसी ठिकानों पर हमला करना था। थर्ड आर्मी कॉर्प्स के कमांडर जनरल आंद्री बिलेत्स्की के मुताबिक, यूक्रेन पहली बार ड्रोन की मदद से रोबोट्स को दुश्मन के इलाके में उतारकर हमला कर रहा है।
सुसाइड जमीनी रोबोट छोटे पहिएदार वाहन होते हैं। इन्हें ऑपरेटर दूर बैठकर रिमोट से नियंत्रित करता है। विस्फोटकों से लैस ये रोबोट दुश्मन के सैनिकों या ठिकानों तक पहुंचकर धमाका करते हैं।
इंसान अभी भी रोबोट को नियंत्रित करते हैं
इन मशीनों के इस्तेमाल से सैनिकों को बारूदी सुरंगों, गोलियों और दुश्मन के हमलों के बीच सीधे जाने का खतरा कम हो सकता है। ड्रोन इन रोबोट्स को दुश्मन के इलाके तक पहुंचाते हैं, जबकि कैमरों के जरिए ऑपरेटर आसपास की स्थिति देखता रहता है। हालांकि, ये मशीनें पूरी तरह अपने आप काम नहीं करतीं। उन्हें नियंत्रित करने और हमला करने का फैसला लेने में इंसान की भूमिका रहती है।
यूक्रेन बना रहा ‘रोबोट्स की सेना’
यूक्रेन युद्ध के दौरान सैनिकों की जान बचाने के लिए रोबोट्स की बड़ी फौज तैयार करने की योजना पर भी काम कर रहा है। पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव ने 26 सितंबर को ‘आर्मी ऑफ रोबोट्स’ प्रोजेक्ट की घोषणा की। इसमें ऐसे रोबोट्स विकसित करने की योजना है, जो युद्ध के दौरान जोखिम वाले काम कर सकें।
इस योजना में इंसानों जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट भी शामिल हैं। ये मशीन गन में गोलियां भरने, बैटरी बदलने और सेंसर लगाने जैसे काम कर सकेंगी। इसके अलावा ड्रोन, मानवरहित जमीनी वाहन यानी UGV, कम लागत वाले इंटरसेप्टर और AI आधारित हमले वाले सिस्टम भी योजना का हिस्सा हैं।
इस प्रोजेक्ट के लिए यूक्रेन पश्चिमी देशों के इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और निवेशकों से सहयोग लेने की कोशिश कर रहा है।
रूस, चीन और भारत भी बना रहे जमीनी रोबोट
यूक्रेन के अलावा रूस, चीन और इजराइल भी युद्ध में इस्तेमाल होने वाले जमीनी रोबोट विकसित कर रहे हैं। रूस इनका इस्तेमाल हथियार और जरूरी सामान पहुंचाने जैसे कामों में कर रहा है। चीन ऐसे रोबोट विकसित कर रहा है जो हथियार ले जा सकें और मिलकर काम कर सकें। इजराइल भी रोबोट से चलने वाले लड़ाकू वाहनों पर काम कर रहा है।
भारत में भी इस तकनीक पर काम चल रहा है। DRDO AI की मदद से चलने वाले रोबोट और मानवरहित जमीनी वाहन विकसित कर रहा है। भारत में ‘एक्सप्लोडर’ नाम का एक वाहन भी विकसित किया गया है, जो ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चल सकता है। इसका इस्तेमाल निगरानी और विस्फोटकों से जुड़े खतरनाक कामों में किया जा सकता है।
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