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अरुणाचल सीमा पर चीन की बढ़ती गतिविधियों से तनाव की आशंका

Ratna Netam
24 Oct 2026 2:16 PM IST
अरुणाचल सीमा पर चीन की बढ़ती गतिविधियों से तनाव की आशंका
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नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी गतिविधियों को लेकर एक बार फिर चिंता जताई गई है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में चीनी मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने शनिवार को अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीन की रणनीति को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने चीन पर धीरे-धीरे भारतीय दावे वाले क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का आरोप लगाया। इस रणनीति को उन्होंने 'सलामी स्लाइसिंग' करार दिया। विशेषज्ञ ने चेतावनी दी कि सीमा के आसपास सैनिकों और आधुनिक हथियार प्रणालियों की लगातार बढ़ती तैनाती भविष्य में दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष का खतरा बढ़ा सकती है।
सीमा पर लगातार घुसपैठ की घटनाओं का दावा
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में प्रोफेसर कोंडापल्ली ने कहा कि भारत-चीन सीमा पर घुसपैठ की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। दोनों देशों की ओर से सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति हमेशा सामान्य नहीं रहती।उन्होंने दावा किया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हर साल लगभग 300 से 400 बार घुसपैठ की घटनाएं सामने आती हैं। उनके मुताबिक, कुछ वर्षों में यह संख्या 380 से 430 तक भी पहुंचती है। हालांकि, ये आंकड़े विशेषज्ञ के दावे हैं और इनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।कोंडापल्ली ने कहा कि सीमा पर इस तरह की घटनाओं का लगातार होना चिंता का विषय है, क्योंकि इससे दोनों देशों के सैनिकों के बीच टकराव की आशंका बनी रहती है।
जानबूझकर और अनजाने में हो सकती है घुसपैठ
प्रोफेसर कोंडापल्ली के अनुसार, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर होने वाली घटनाओं के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कुछ घटनाएं जानबूझकर क्षेत्रीय दावों को मजबूत करने के उद्देश्य से होती हैं, जबकि कुछ कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और खराब मौसम के कारण भी सामने आ सकती हैं।उन्होंने बताया कि हिमालयी इलाकों में कई स्थानों पर वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों देशों की धारणाएं अलग-अलग हैं। ऐसे में गश्त के दौरान सैनिक आमने-सामने आ सकते हैं।विशेषज्ञ ने कहा कि जानबूझकर की जाने वाली गतिविधियां अधिक चिंताजनक हैं, क्योंकि इनके जरिए कोई पक्ष अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र का विस्तार करने का प्रयास कर सकता है।
क्या है चीन की 'सलामी स्लाइसिंग' रणनीति?
कोंडापल्ली ने चीन की कथित रणनीति को 'सलामी स्लाइसिंग' बताया। इस रणनीति का अर्थ है किसी विवादित क्षेत्र में एक साथ बड़ा कदम उठाने के बजाय धीरे-धीरे छोटे-छोटे बदलाव करके अपनी मौजूदगी और प्रभाव बढ़ाना।उनके अनुसार, चीन सीमावर्ती इलाकों में इसी तरीके से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि ऐसी गतिविधियां लगातार जारी रहीं, तो भविष्य में गंभीर सैन्य तनाव पैदा हो सकता है।
अरुणाचल के लुंगचू और तक्षिंग इलाकों का जिक्र
प्रोफेसर कोंडापल्ली ने अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में स्थित लुंगचू इलाके का उदाहरण देते हुए दावा किया कि पिछले कई दशकों में चीनी गतिविधियां उन क्षेत्रों तक फैल गई हैं, जिन पर भारत अपना दावा करता है।उन्होंने तक्षिंग क्षेत्र का भी उल्लेख किया, जहां सीमा पर गतिविधियों और सैनिकों की आवाजाही को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। हाल में तक्षिंग क्षेत्र से जुड़े सीमा तनाव पर भी चर्चा हुई है।
सैनिकों और हथियारों की तैनाती से बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञ ने चेतावनी दी कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास सैनिकों की बढ़ती संख्या और आक्रामक हथियार प्रणालियों की तैनाती भविष्य में तनाव बढ़ाने वाला कारक बन सकती है।उनका कहना था कि सीमा पर किसी छोटी घटना के बड़े टकराव में बदलने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर संवाद और तनाव कम करने के प्रयास महत्वपूर्ण हैं।भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। दोनों देशों की वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं। हालांकि, कोंडापल्ली के आरोपों को चीन की ओर से स्वीकार किए जाने या इन विशेष दावों पर नई आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है।
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