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ताइवान चुनाव से पहले AI के जरिए दुष्प्रचार का खतरा

Ratna Netam
19 Oct 2026 7:28 PM IST
ताइवान चुनाव से पहले AI के जरिए दुष्प्रचार का खतरा
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ताइपे। ताइवान में आगामी स्थानीय चुनावों से पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए गलत सूचनाएं फैलाने और मतदाताओं को प्रभावित करने की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है। ताइवान के शिक्षाविदों और राजनीतिक विशेषज्ञों ने सरकार से एआई आधारित कंटेंट फिल्टरिंग सिस्टम विकसित करने तथा आम नागरिकों के बीच मीडिया साक्षरता बढ़ाने की मांग की है। विशेषज्ञों का आरोप है कि चीन सस्ते जनरेटिव एआई टूल्स का इस्तेमाल करके ताइवान की चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहा है।स्थानीय समाचार पत्र 'ताइपे टाइम्स' की 19 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) ने चुनावों में कथित चीनी हस्तक्षेप को लेकर एक विशेष फोरम आयोजित किया। इसमें विशेषज्ञों ने गलत सूचना फैलाने की रणनीतियों और उनसे निपटने के उपायों पर चर्चा की।
30 प्रतिशत सच और 70 प्रतिशत झूठ फैलाने का आरोप
डीपीपी के महासचिव सू कुओ-युंग ने आरोप लगाया कि चीन ताइवान के चुनावों में हस्तक्षेप करने के लिए ऐसी सूचनाएं फैला रहा है, जिनमें 30 प्रतिशत सच्चाई और 70 प्रतिशत गलत जानकारी शामिल होती है।उन्होंने कहा कि इस प्रकार की सूचनाएं लोगों को भ्रमित कर सकती हैं, क्योंकि इनमें कुछ वास्तविक तथ्यों के साथ भ्रामक दावों को मिला दिया जाता है।सू कुओ-युंग ने विशेषज्ञों से अध्ययन करने को कहा कि चीन किस तरह एआई और बिग डेटा तकनीकों के माध्यम से जनमत प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।हालांकि, 30 प्रतिशत सच और 70 प्रतिशत झूठ वाला आंकड़ा उनका आरोप है, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित निष्कर्ष।
लोकतंत्र में लोगों का भरोसा कमजोर करने की कोशिश
अमेरिका के ह्यूस्टन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट थॉमस में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर येह याओ-युआन ने कहा कि कथित चीनी हस्तक्षेप के दो प्रमुख उद्देश्य हैं।उनके अनुसार, अल्पकालिक उद्देश्य चुनाव परिणामों को प्रभावित करना है, जबकि दीर्घकालिक लक्ष्य ताइवान के समाज में मतभेद बढ़ाना और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास कमजोर करना है।उन्होंने आरोप लगाया कि बीजिंग सैन्य दबाव के साथ-साथ दुष्प्रचार, जनमत को प्रभावित करने और सोशल नेटवर्क के माध्यम से अपनी रणनीति आगे बढ़ा रहा है।
सस्ते AI टूल्स से बढ़ी चुनावी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, जनरेटिव एआई तकनीक ने बड़ी मात्रा में टेक्स्ट, तस्वीरें और अन्य डिजिटल सामग्री तैयार करना आसान बना दिया है।शिह सिन विश्वविद्यालय की संचार विशेषज्ञ प्रोफेसर लियू यू-ह्सी ने कहा कि चीन चुनावों को प्रभावित करने के लिए तेजी से एआई आधारित सामग्री तैयार करने की दिशा में बढ़ रहा है।उन्होंने बताया कि स्थानीय चुनावों में भाग लेने वाले कुछ उम्मीदवारों की ऑनलाइन प्रचार सामग्री में कई गलतियां देखी गई हैं। इससे डिजिटल सामग्री की प्रामाणिकता और उसके स्रोत की जांच करने की आवश्यकता बढ़ गई है।
सरकार से AI फिल्टरिंग सिस्टम बनाने की मांग
एशिया-पैसिफिक एलीट इंटरचेंज एसोसिएशन के महासचिव आर्थर वांग ने ताइवान सरकार से एआई कंटेंट की पहचान करने वाले डेटाबेस और फिल्टरिंग सिस्टम तैयार करने का आग्रह किया।उन्होंने कहा कि नागरिकों को यह समझाना जरूरी है कि किस तरह एआई का इस्तेमाल रोजमर्रा की डिजिटल गतिविधियों और सोशल मीडिया के जरिए लोगों की राय प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि संदिग्ध तस्वीरों, वीडियो और संदेशों के स्रोत की जांच करने वाली तकनीकों को मजबूत किया जाए। साथ ही गलत जानकारी पहचानने के लिए डिजिटल जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी से सतर्क रहने की सलाह
डीपीपी के चीन मामलों के निदेशक वू चुन-चिह ने नागरिकों से अपील की कि वे अनजान स्रोतों से आने वाली सूचनाओं पर तुरंत विश्वास न करें।उन्होंने विशेष रूप से ऐसी पोस्ट से सावधान रहने को कहा जो लोगों में डर, गुस्सा या अन्य तीव्र भावनाएं पैदा करने के उद्देश्य से तैयार की गई हों।विशेषज्ञों ने किसी भी राजनीतिक दावे को साझा करने से पहले विश्वसनीय समाचार माध्यमों और आधिकारिक स्रोतों से उसकी पुष्टि करने की सलाह दी।
नवंबर में होने हैं स्थानीय चुनाव
ताइवान में नवंबर 2026 में स्थानीय चुनाव होने हैं। इन चुनावों से पहले ऑनलाइन दुष्प्रचार और बाहरी हस्तक्षेप की आशंकाओं पर चर्चा तेज हो गई है।ग्लोबल ताइवान इंस्टीट्यूट की मई 2026 की एक रिपोर्ट में भी ताइवान को निशाना बनाने वाले डिजिटल सूचना अभियानों में एआई और डेटा विश्लेषण की बढ़ती भूमिका पर चिंता जताई गई थी।
चुनावी पारदर्शिता बनाए रखना बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावों के दौरान मतदाताओं तक सही और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है।एआई आधारित दुष्प्रचार को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी के साथ नागरिकों की जागरूकता भी आवश्यक है। हालांकि, कंटेंट फिल्टरिंग के उपाय बनाते समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैध राजनीतिक आलोचना की रक्षा करना भी जरूरी होगा।फिलहाल ताइवान में चुनावी हस्तक्षेप को लेकर लगाए गए आरोपों और संभावित सुरक्षा उपायों पर चर्चा जारी है। विशेषज्ञों ने सरकार से समय रहते डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने और मतदाताओं को गलत सूचनाओं से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है।
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