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Islamabad इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक ईसाई व्यक्ति पर हुए बर्बर हमले को लेकर एक प्रमुख अल्पसंख्यक अधिकार संगठन ने गहरी चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि यह घटना देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के सामने मौजूद खतरों और चुनौतियों को उजागर करती है। वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) के मुताबिक, पंजाब के बहावलपुर क्षेत्र में बंधुआ मजदूर और सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करने वाले ईसाई युवक जाहिद मसीह पर 21 जनवरी को उनके सहकर्मी मोहम्मद अली अजहर ने हमला किया। आरोप है कि अजहर लगातार जाहिद मसीह पर अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहा था। जब मसीह ने इसका विरोध किया, तो आरोपी ने उनके चेहरे पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।
अधिकार संगठन का कहना है कि हमलावर का इरादा जाहिद मसीह को जिंदा जलाने का था, लेकिन ईसाई समुदाय के लोगों की समय पर दखल से उनकी जान बच गई। घटना के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर ईसाई धर्म को लेकर घृणास्पद टिप्पणियां कीं और धार्मिक श्रेष्ठता का दावा किया। वीओपीएम ने कहा कि इस हमले में जाहिद मसीह को गंभीर शारीरिक चोटें आई हैं और उन्हें गहरा मानसिक आघात भी पहुंचा है। इस घटना से पाकिस्तान के ईसाई समुदाय में भय और आक्रोश का माहौल है।
संगठन ने पाकिस्तान में ईसाई मजदूरों के खिलाफ बढ़ते भेदभाव और हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा कि श्रम-प्रधान क्षेत्रों में काम करने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक अक्सर उत्पीड़न, शोषण और दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं। जाहिद मसीह की घटना उनकी असुरक्षित स्थिति की एक कड़वी मिसाल है। कई मानवाधिकार संगठनों ने इस हमले की निंदा करते हुए अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा के लिए कड़े कानूनी कदम उठाने की मांग की है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों ने न्याय सुनिश्चित करने और धार्मिक असहिष्णुता पर रोक लगाने के लिए संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
वीओपीएम के अनुसार, जाहिद मसीह का इलाज जारी है और उनकी मानसिक स्थिति से उबरने में लंबा समय लग सकता है। संगठन ने कहा कि यह घटना मौजूदा कानूनी सुरक्षा की कमियों को उजागर करती है और धार्मिक असहिष्णुता व भेदभाव के खिलाफ व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव की जरूरत को रेखांकित करती है। अधिकार समूह ने कहा कि जाहिद मसीह पर हमला पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के सामने मौजूद गहरी जड़ें जमाए चुनौतियों की याद दिलाता है और सभी नागरिकों के लिए, धर्म की परवाह किए बिना, जीवन, स्वतंत्रता और धार्मिक आज़ादी के मूल अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक सुधारों की मांग करता है।
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