विश्व

शोधकर्ताओं को मिले एक ग्रह होने के संकेत, पढ़ें और भी जानकारी

Gulabi
4 Oct 2021 2:50 PM GMT
शोधकर्ताओं को मिले एक ग्रह होने के संकेत, पढ़ें और भी जानकारी
x
शोधकर्ताओं को मिले एक ग्रह होने के संकेत

ब्रह्माण्ड में बाह्यग्रहों (Exoplanet) की पड़ताल में हमारे शोधकर्ता किसी भी ग्रह को नजरअंदाज नहीं करते. वे उनके अध्ययन से सौरमंडल (Solar System) की उत्पत्ति की प्रक्रियाएं जानने का प्रयास करते हैं. इस तरह शोधकर्ताओं की प्रक्रियाओं के बारे में काफी जानकारी मिली है. इस कवायद में खगोलविदों को कई अनोखी संरचनाएं भी मिल जाती हैं.आमतौर पर खगोलविदों ऐसे ग्रह मिलते हैं, जो एक या फिर ज्यादा से ज्यादा दो तारों का चक्कर लगाते हैं. लेकिन शोधकर्ताओं को एक ऐसे बाह्यग्रह के बारे में अप्रत्यक्ष रूप से पता चला है जो एक नहीं बल्कि तीन तारों का चक्कर (3 stars orbiting planet) लगाता है. यह इस तरह की पहली खोज बताई जा रही है.

ज्यादा संख्या हैं ऐसे बंधे हुए तारे
इस सिस्टम की अजीब बात यही है कि जहां दो तारों का चक्कर लगाने वाले ग्रह कम मिलते हैं, यह ग्रह तीन तारों का चक्कर लगा रहा है. अमेरिका के लास वेगस की यूनिवर्सिटी ऑफ नेवेदा शोधकर्ताओं और उनके साथियों ने यह खोज की है. माना जाता है कि सभी तारों के तंत्र में से आधे ऐसे तंत्र हैं जिनमें दो या फिर ज्यादा तारे गुरुत्व से बंधे हुए हैं.
कोई तारा अकेला पैदा नहीं होता
आमतौर पर माना जाता है कि ब्रह्माण्ड के सभी तारे कम से कम द्विज तारे के तंत्र के रूप में पैदा हुए थे और आज अकेले दिखने वाले तारे कभी अपने साथी तारे से अलग हुआ था. हमारे सूर्य के बारे में भी यही धारणा है कि वह अपने साथी से अलग हो चुका है. लेकिन इसके बाद भी ऐसा कोई ग्रह अभी नहीं खोजा जा सका था जो तीन तारों का चक्कर लगा रहा हो.
खगोलविदों को मिले अहम संकेत, मिल गया तीन तारों वाला बाह्यग्रह
पहली बार किसी तीन तारे वाले सिस्टम (Triple Star System) में ग्रह होने के मजबूत संकेत मिले हैं. (तस्वीर: ALMA (ESO/NAOJ/NRAO), ESO/Exeter/Kraus et al.)पहली बार किसी तीन तारे वाले सिस्टम (Triple Star System) में ग्रह होने के मजबूत संकेत मिले हैं. (तस्वीर: ALMA (ESO/NAOJ/NRAO), ESO/Exeter/Kraus et al.)
तीन तारों के सिस्टम (Triple Star System) की अजीब आकार वाली डिस्क (Disks) में शोधकर्ताओं को एक ग्रह (Planet) होने के संकेत मिले हैं जो इनका चक्कर लगा रहा है. पहली बार इस तरह की खोज हुई है.
ब्रह्माण्ड में बाह्यग्रहों (Exoplanet) की पड़ताल में हमारे शोधकर्ता किसी भी ग्रह को नजरअंदाज नहीं करते. वे उनके अध्ययन से सौरमंडल (Solar System) की उत्पत्ति की प्रक्रियाएं जानने का प्रयास करते हैं. इस तरह शोधकर्ताओं की प्रक्रियाओं के बारे में काफी जानकारी मिली है. इस कवायद में खगोलविदों को कई अनोखी संरचनाएं भी मिल जाती हैं.आमतौर पर खगोलविदों ऐसे ग्रह मिलते हैं, जो एक या फिर ज्यादा से ज्यादा दो तारों का चक्कर लगाते हैं. लेकिन शोधकर्ताओं को एक ऐसे बाह्यग्रह के बारे में अप्रत्यक्ष रूप से पता चला है जो एक नहीं बल्कि तीन तारों का चक्कर (3 stars orbiting planet) लगाता है. यह इस तरह की पहली खोज बताई जा रही है.
ज्यादा संख्या हैं ऐसे बंधे हुए तारे
इस सिस्टम की अजीब बात यही है कि जहां दो तारों का चक्कर लगाने वाले ग्रह कम मिलते हैं, यह ग्रह तीन तारों का चक्कर लगा रहा है. अमेरिका के लास वेगस की यूनिवर्सिटी ऑफ नेवेदा शोधकर्ताओं और उनके साथियों ने यह खोज की है. माना जाता है कि सभी तारों के तंत्र में से आधे ऐसे तंत्र हैं जिनमें दो या फिर ज्यादा तारे गुरुत्व से बंधे हुए हैं.
कोई तारा अकेला पैदा नहीं होता
आमतौर पर माना जाता है कि ब्रह्माण्ड के सभी तारे कम से कम द्विज तारे के तंत्र के रूप में पैदा हुए थे और आज अकेले दिखने वाले तारे कभी अपने साथी तारे से अलग हुआ था. हमारे सूर्य के बारे में भी यही धारणा है कि वह अपने साथी से अलग हो चुका है. लेकिन इसके बाद भी ऐसा कोई ग्रह अभी नहीं खोजा जा सका था जो तीन तारों का चक्कर लगा रहा हो
आल्मा से किया अवलोकन
शोधकर्ताओं ने शक्तिशाली एटाकामा लार्ज मिलीमीटर/सबमिलीमीरटर ऐरे (ALMA) टेलीस्कोप के अवलोकनों की उपयोग कर इन तारों की तीन धूल वाले छल्लों का विश्लेषण किया जो ग्रहों के निर्माण में मुख्य भूमिका अदा करती है. फिर भी उन्होंने तीनों सर्कमट्रपिल डिस्क में प्रमुख लेकिन अजीब सा अंतर देखा.
अजीब सी डिस्क
इस अजीब से खगोलीय पिंड को GW Ori कहा गया है. इसमें एक डिस्क भी है जो दो भागों में, अजीब तरह से 38 डिग्री कोण में बंटी है. ऐसा लगता है कि यह शनि ग्रह की डिस्क की तरह है जो बीच में टूट गई है और टेढ़ी हो गई है. यह ग्रह पृथ्वी से 1300 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है जो अजीब तरह से तीन तारों का चक्कर लगा रहा है. इस डिस्क के अंदर करीब पृथ्वी से 30 गुना ज्यादा पदार्थ है ग्रहों के निर्माण के लिए पर्याप्त है.
बड़े गैसीय ग्रह की उपस्थिति के संकेत
शोधकर्ताओं की टीम ने अलग अलग उत्पत्तियों की पड़ताली की जिसमें इस बात की संभावना को भी टटोला गया कि क्या तीनों तारों के बीच जो गैप आया था, कहीं वह गुरुत्व आघूर्ण बल (Gravitational Torque) तो नहीं था. GW Ori का मॉडल बनाने के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि इस डिस्क के आकार और स्थिति की ज्यादा सही व्याख्या में एक या अधिक गुरु जैसे ग्रहों की उपस्थिति होती है.
सबसे पहले बनते हैं ऐसे ग्रह
UNLV के पीएचडी स्नातक और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक जर्मी स्मॉलवुड के मुताबिक विशाल गैसीय ग्रह किसी तारे के तंत्र में सबसे पहले बनना वाले ग्रह होते हैं. इसके बाद फिर पृथ्वी और मंगल जैसे पथरीले ग्रह बनते हैं. इस ग्रह को सीधे तो नहीं देखा जा सका है, लेकिन सितंबर में मंथली नोटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के प्रकाशित शोध में इसकी पड़ताल के बारे में बताया गया है. जिसमें यह अब तक का खोजा गया पहला सर्कमट्रपिल (Circumtriple) यानी तीन तारों का चक्कर लगाने वाला ग्रह है.
आने वाले महीनों में आल्मा टेलीस्कोप के अवलोकन के और आंकड़े आने वाले हैं जिससे इस परिघटना के सीधे प्रमाण मिलने की उम्मीद है. स्मॉलवुड का कहना है कि यह वाकई रोचक है क्योंकि यह पड़ताल ग्रह निर्माण के सिद्धांत को मजबूती ही प्रदान कर रही है. इसका साफ मतलब यही है कि जितना हम समझतेरहे हैं, ग्रह निर्माण की प्रक्रिया उससे कहीं ज्यादा सक्रिय है.

Next Story
© All Rights Reserved @Janta Se Rishta
Share it