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मक्खियों पर शोध ने बताया- खुराक की मात्रा का प्रजनन पर होता है असर

Gulabi
25 Nov 2021 3:00 PM GMT
मक्खियों पर शोध ने बताया- खुराक की मात्रा का प्रजनन पर होता है असर
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डॉ सुल्तानोवा ने बताया कि सामान्यतया सीमित खुराक का बेहतर स्वास्थ्य और कम प्रजनन से संबंध होता है
एक सीमित आहार वाली खुराक (Restricted Diet) से खूब खाने वाली पर जाना बाद में प्रजनन (Reproduction) के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. ईस्ट एन्ग्लिया यूनिवर्सिटी के नए शोध ने यह दावा किया है. शोधकर्ताओं ने छोटी मक्खी की खान पान और मिलाप की आदतों पर अध्ययन से यह निष्कर्ष निकाला है. ड्रोसोफिला मेलनगोस्टर प्रजाति की यह मक्खी एक फ्रूट फ्लाई (Fruit Fly) के नाम से जानी जाती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के और अध्ययन दूसरे जीवों की तरह इंसानों पर भी लागू हो सकते हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि मादाएं (Female Fruit Flies) जो अपने पूरे जीवन में कम खाना खाती हैं वे जीती तो लंबा हैं, लेकिन ज्यादा खाना वाली मादाओं की तुलना में उतना अच्छा प्रजनन (Reproduction) नहीं करती हैं.
लेकिन जो बाद में सीमित खुराक के बाद असीमित खुराक पर आ जाती हैं वे ज्यादा मिलाप करने के साथ ज्यादा प्रजनन करती हैं. ऐसी मक्खियां सीमित खुराक वाली मक्खियों के मुकाबले तीन गुना ज्यादा बच्चे पैदा करती हैं. लेकिन उनका जीवन उन्हीं मादाओं की तरह होता है जो पूरे जीवन भरपूर भोजन करती हैं. अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता यूईए के स्कूल ऑफ बायोलॉजीकल साइंसेस की डॉ जाहिदा सुल्तानोवा ने कहा, "मानव सहित बहुत सारे जीवों में सीमित खुराक (Dietary restriction) का संबंध लंबे जीवन और अच्छे स्वास्थ्य से है. हम यह पता करना चाहते थे कि शुरुआती जीवन में सीमित खुराक के बाद जीवन में बहुत सारा खाना खाया जाने लगे, तब क्या होता है."' टीम ने यह पड़ताल करने का प्रयास किया कि मक्खियों (Fruit Flies) में शुरुआती जीवन में खुराक पर नियंत्रण का आगे के जीवन, मिलाप का बर्ताव और प्रजनन (Reproduction) पर क्या असर होता है.
शोधकर्ताओं ने मक्खियों (Fruit Flies) के तीन अलग अलग समूहों में बांट कर प्रयोग किया. उन्हें अलग खुराक पर रख कर उनके बर्ताव, प्रजजन (Reproduction) और स्वास्थ का अवलोकन किया.इस अध्ययन में जहां कुछ मक्खियों को पर्याप्त भोजन दिया गया वहीं अन्य को सीमित खुराक पर रखा गया जिसमें उन्हें समान्य से 40 प्रतिशत खमीर कम खाने को दिया गया. तीसरे समूह को शुरुआती जीवन में सीमित खुराक पर रखा गया और बाद में उन्हें अपने मर्जी के हिसाब असीमित खुराक खाने दी गई.

डॉ सुल्तानोवा ने बताया कि सामान्यतया सीमित खुराक का बेहतर स्वास्थ्य और कम प्रजनन (Reproduction) से संबंध होता है. लेकिन जब मक्खियों (Fruit Flies) को सीमित खुराक से सामान्य खुराक पर लाया गया तो वे मिलाप करने लगीं और ज्यादा प्रजनन करने लगे, जबकि उनका जीवन (Survival) पूरी खुराक ली मादाओं की तरह हो गया. मक्खियों पर मिले ये नतीजे दर्शाते हैं कि मादाएं कम खुराक में कम प्रजनन करती हैं., लेकिन वे अपना प्रजनन स्वास्थ्य कायम रखती हैं, लेकिन जब वे बाद के जीवन में असीमित खुराक लेती हैं तो वे ज्यादा प्रजनन करने लगती हैं.

डॉ सुल्तानोवा ने बताया कि इससे पता चलता है कि शुरुआती जीवन में कम खाने से कम प्रजनन (Reproduction) की खानापूर्ति बाद में अच्छी और ज्यादा खुराक पर जाने से की जा सकती है. इंसानों सीमित खुराक और प्रजजन स्वास्थ पर बहुत ही कम अध्ययन हुए हैं. मॉडल जीवों पर हुए अध्ययन के नतीजे सुझाते हैं कि इस विषय पर और ज्यादा अध्ययन मानवोंपर ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं.
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