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बाढ़ की खबर दिखाना अब आसान नहीं नेपाल सरकार ने जारी किए नए निर्देश
Ratna Netam
6 Sept 2026 9:00 PM IST

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काठमांडू। विनाशकारी भोटेकोशी बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाकों में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए नया **मीडिया सेफ्टी और ऑपरेशनल प्रोटोकॉल** लागू किया है। इसके तहत विदेशी पत्रकारों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के लिए **प्रेस एक्रेडिटेशन यानी आधिकारिक प्रेस मान्यता** लेना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही पत्रकारों को सुरक्षा एवं बचाव एजेंसियों के निर्देश, निर्धारित रास्तों और आवाजाही से जुड़े प्रतिबंधों का पालन करना होगा।
यह कदम 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद उठाया गया है। सरकार इसे पत्रकारों की सुरक्षा और राहत-बचाव कार्यों में बाधा रोकने की व्यवस्था बता रही है। इससे पहले विदेशी पत्रकारों के प्रेस पास के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया भी कड़ी किए जाने की खबर सामने आई थी।
बिना एक्रेडिटेशन नहीं कर सकेंगे रिपोर्टिंग
नए प्रोटोकॉल का सबसे अहम हिस्सा विदेशी पत्रकारों से जुड़ा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर खबर जुटाने के इच्छुक विदेशी पत्रकारों को नेपाल के संबंधित विभाग से प्रेस मान्यता हासिल करनी होगी।
इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने और जरूरी दस्तावेज जमा करने की व्यवस्था है। रिपोर्टों के मुताबिक विदेशी पत्रकारों को पासपोर्ट की कॉपी और वैध वीजा या एंट्री परमिट समेत निर्धारित दस्तावेज देने होंगे।
इसके अलावा मीडिया संस्थान से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए हैं, ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में किसी मीडिया संगठन के लिए काम कर रहा है।
विदेशी पत्रकारों से मांगे गए ये दस्तावेज
विदेशी संवाददाताओं के लिए पहले जारी प्रक्रिया के तहत पासपोर्ट और वैध वीजा के अलावा मीडिया संस्थान का नियुक्ति पत्र या अनुबंध और संस्थान की ओर से जारी पहचान पत्र मांगा गया है।
इसके साथ मीडिया संस्थान का सिफारिश पत्र तथा पत्रकार के देश के विदेश मंत्रालय या नेपाल स्थित संबंधित दूतावास अथवा वाणिज्य दूतावास का सिफारिश पत्र भी आवश्यक दस्तावेजों में शामिल बताया गया है। वेतन और अन्य सुविधाओं का विवरण भी आवेदन प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया।
पत्रकारों के लिए सुरक्षा नियम भी लागू
नया प्रोटोकॉल केवल विदेशी पत्रकारों के एक्रेडिटेशन तक सीमित नहीं है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों के लिए सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश भी तय किए गए हैं।
पत्रकारों को वैध प्रेस पहचान पत्र अपने साथ रखना होगा। उन्हें सुरक्षा बलों और राहत-बचाव कर्मियों के निर्देशों का पालन करना होगा। इसके अलावा खतरनाक क्षेत्रों में निर्धारित मार्ग और आवाजाही संबंधी पाबंदियों का पालन जरूरी होगा। अगर किसी इलाके को खाली करने का आदेश दिया जाता है तो पत्रकारों को भी उस आदेश का पालन करना होगा।
राहत और बचाव अभियान के बीच आया फैसला
नेपाल में बाढ़ के बाद बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने 6 सितंबर को भी भोटेकोशी नदी की बाढ़ को लेकर आधिकारिक स्थिति अपडेट जारी किया।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बचावकर्मी, सुरक्षाकर्मी, स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां काम कर रही हैं। ऐसे में सरकार का कहना है कि मीडिया की आवाजाही व्यवस्थित करना सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है।
क्यों उठाए गए ये कदम?
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र सामान्य रिपोर्टिंग लोकेशन की तरह सुरक्षित नहीं हैं। कई जगह जमीन अस्थिर हो सकती है, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो सकते हैं तथा अचानक पानी बढ़ने या भूस्खलन का जोखिम बना रह सकता है।
ऐसे में अनियंत्रित आवाजाही पत्रकारों के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है। इसी वजह से रिपोर्टिंग टीमों को सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों के अनुसार काम करने को कहा गया है।
क्या यह पूरी तरह नई मीडिया नीति है?
इस मामले में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी सामने आया है। नेपाल के सूचना विभाग के प्रवक्ता गोविंदा प्रसाद पांडे के अनुसार, विदेशी पत्रकारों को प्रेस पास जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह नई नीति नहीं है। विदेशी पत्रकारों के लिए प्रेस पास की व्यवस्था पहले से लागू नियमों का हिस्सा रही है। मौजूदा आपदा के दौरान इसकी प्रक्रिया और अनुपालन पर विशेष जोर दिया गया है।
इसलिए इसे केवल मीडिया पर प्रतिबंध के रूप में देखने के बजाय सुरक्षा और एक्रेडिटेशन नियमों की सख्त अनुपालना के रूप में भी समझना जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नेपाल पर नजर
26 अगस्त की बाढ़ के बाद नेपाल और चीन की सीमा से लगे हिमालयी इलाके अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में हैं। बड़ी संख्या में विदेशी पत्रकार आपदा, राहत कार्यों और प्रभावित लोगों की स्थिति को कवर कर रहे हैं।
नेपाल में रिपोर्टिंग की स्थिति चीन नियंत्रित तिब्बत से अलग बताई गई है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में तिब्बत की तरफ पत्रकारों की पहुंच और सूचनाओं पर कहीं अधिक सख्त नियंत्रण की बात कही गई है।
पत्रकारों के लिए चुनौतीपूर्ण ग्राउंड रिपोर्टिंग
आपदा के दौरान पत्रकारों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उनकी रिपोर्टिंग के जरिए प्रभावित लोगों की स्थिति, राहत सामग्री की जरूरत और प्रशासनिक चुनौतियां दुनिया के सामने आती हैं।
लेकिन ऐसी जगहों पर पत्रकारों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती होती है। नेपाल के नए प्रोटोकॉल में इसी कारण सुरक्षा निर्देशों और नियंत्रित आवाजाही को प्रमुखता दी गई है।
विदेशी मीडिया पर बढ़ेगी प्रशासनिक निगरानी
नए नियमों के बाद विदेशी पत्रकारों को अब प्रभावित क्षेत्र में जाने से पहले अपनी पहचान और मीडिया संस्थान से जुड़ी जानकारी आधिकारिक रूप से सत्यापित करानी होगी।
इससे सरकार के पास यह रिकॉर्ड रहेगा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में कौन-कौन से विदेशी पत्रकार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। साथ ही किसी आपात स्थिति में उनके बारे में जानकारी हासिल करना आसान होगा।
बाढ़ के बीच मीडिया नियमों की भी चर्चा
नेपाल इस समय भीषण प्राकृतिक आपदा के असर से जूझ रहा है। ऐसे में राहत और बचाव अभियान के साथ मीडिया कवरेज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बनी हुई है।
विदेशी पत्रकारों के लिए प्रेस एक्रेडिटेशन अनिवार्य किए जाने और सभी पत्रकारों के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू होने के बाद अब बाढ़ की ग्राउंड रिपोर्टिंग अधिक नियंत्रित व्यवस्था के तहत होगी। सरकार इसे सुरक्षा से जोड़ रही है, जबकि मीडिया जगत में इसके व्यावहारिक असर पर भी नजर रहेगी।
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