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सुरक्षा के बीच फिर शुरू हुआ धार्मिक अनुष्ठान

Saba Naaz
28 July 2026 7:04 PM IST
सुरक्षा के बीच फिर शुरू हुआ धार्मिक अनुष्ठान
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कोलंबो। श्रीलंका के एक प्राचीन और ऐतिहासिक हिंदू धार्मिक महोत्सव को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोबारा शुरू किया गया है। देविनुवारा स्थित प्रसिद्ध उथ्पलवन्ना विष्णु मंदिर में होने वाला सदियों पुराना वार्षिक उत्सव इस बार अंडरवर्ल्ड से जुड़े खतरे के कारण रोक दिया गया था। हालांकि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के बाद मंगलवार को यह धार्मिक अनुष्ठान फिर से आयोजित किया गया।

देविनुवारा एशाला महोत्सव श्रीलंका के सबसे पुराने धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। यह महोत्सव भगवान विष्णु को समर्पित है और सदियों से यहां धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। इस आयोजन में हिंदू समुदाय के साथ-साथ बौद्ध परंपरा से जुड़े लोग भी शामिल होते हैं। यह उत्सव श्रीलंका में हिंदू और बौद्ध संस्कृतियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी दर्शाता है।

इस बार महोत्सव के दौरान होने वाले पारंपरिक कवाड़ी अनुष्ठान को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को संभावित खतरे की सूचना मिली थी। खुफिया जानकारी में आशंका जताई गई थी कि कुछ आपराधिक समूह इस धार्मिक कार्यक्रम को निशाना बना सकते हैं। इसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से रविवार को होने वाले कवाड़ी अनुष्ठान को रद्द कर दिया था।

जानकारी के अनुसार, यह खतरा श्रीलंका के दो कुख्यात ड्रग तस्करों शहन सथ्सरा और कंजिपानी इमरान के गुटों के बीच चल रही आपसी दुश्मनी से जुड़ा हुआ था। दोनों गुटों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। पुलिस को आशंका थी कि इस विवाद का असर धार्मिक कार्यक्रम पर पड़ सकता है।

महोत्सव को सुरक्षित तरीके से आयोजित कराने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। कवाड़ी अनुष्ठान के दौरान विशेष कार्यबल (एसटीएफ) के जवानों समेत करीब 1,500 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में कड़ी निगरानी रखी गई। सुरक्षा एजेंसियों ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जमीन से लेकर हवाई निगरानी तक की व्यवस्था की।

पुलिस ने इससे पहले धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे कुछ लोगों की जांच के दौरान क्रिस्टल मेथामफेटामाइन और भांग जैसे नशीले पदार्थ भी बरामद किए थे। इसके बाद सुरक्षा और सख्त कर दी गई थी। प्रशासन ने साफ किया कि धार्मिक आयोजन को सुरक्षित माहौल में पूरा कराना उनकी प्राथमिकता है।

कवाड़ी अनुष्ठान हिंदू धार्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसमें श्रद्धालु अपने कंधों पर सजाए गए लकड़ी के ढांचे लेकर भक्ति संगीत के साथ नृत्य करते हैं। यह अनुष्ठान श्रद्धालुओं द्वारा भगवान के प्रति आभार व्यक्त करने और अपनी आस्था प्रकट करने के लिए किया जाता है।

देविनुवारा मंदिर का इतिहास 13वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। यह स्थान श्रीलंका के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और कई दिनों तक चलने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।

हालांकि इस बार सुरक्षा कारणों से आयोजन को लेकर चिंता बनी रही, लेकिन प्रशासन की तैयारियों के बाद धार्मिक कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि धार्मिक परंपराओं को जारी रखने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। श्रीलंका प्रशासन अब आगे भी ऐसे बड़े आयोजनों के लिए सुरक्षा एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल बनाने की तैयारी कर रहा है, ताकि श्रद्धालु बिना डर और परेशानी के धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकें।

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