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रूस के राष्ट्रपति पुतिन के भारत राज्य दौरे के अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक सम्मान

SHIDDHANT
4 Dec 2025 9:12 PM IST
रूस के राष्ट्रपति पुतिन के भारत राज्य दौरे के अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक सम्मान
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Russia रूस: राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत के राज्य दौरे के अवसर पर वाराणसी में डशाश्वमेध घाट पर एक विशेष गंगा आरती का आयोजन किया गया। यह धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम राष्ट्रपति पुतिन का औपचारिक स्वागत करने और उन्हें भारतीय परंपरा तथा सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का हिस्सा था। गंगा आरती के दौरान घाट पर हजारों श्रद्धालु और स्थानीय निवासी उपस्थित रहे। पुजारियों और आरती समूह ने मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के माध्यम से एक मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य पेश किया। आयोजकों ने बताया कि विशेष आरती का उद्देश्य न केवल विदेशी अतिथि का स्वागत करना था, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक सौहार्द को भी प्रदर्शित करना था।

मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहे। उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन के साथ घाट पर चल रहे आरती अनुष्ठान का अवलोकन किया और परंपरागत विधियों के अनुसार दीप प्रज्वलित किया। स्थानीय प्रशासन ने घाट और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। भारी पुलिस बल, स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों और स्वेच्छिक स्वयंसेवकों की सहायता से कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हुआ। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष मार्ग और व्यवस्थाएं भी बनाई।

वाराणसी के धार्मिक विद्वानों ने बताया कि गंगा आरती का आयोजन भारतीय संस्कृति में अतिथियों का सम्मान करने और उनके स्वागत का पारंपरिक माध्यम माना जाता है। विशेष गंगा आरती में शामिल पंडितों और कलाकारों ने पारंपरिक भजनों और मंत्रों के साथ एक भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। राष्ट्रपति पुतिन ने भी इस अवसर पर गंगा की पवित्रता और भारतीय धार्मिक परंपराओं की भव्यता की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके लिए अत्यंत स्मरणीय और अद्भुत है। इस आयोजन को भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सांस्कृतिक और मानवीय स्तर पर और मजबूत बनाने वाला बताया गया।

विशेष गंगा आरती के समापन के बाद राष्ट्रपति पुतिन और भारतीय अधिकारियों ने घाट परिसर का दौरा किया और वाराणसी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के बारे में जानकारी ली। इस कार्यक्रम ने राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को वैश्विक मंच पर उजागर किया। यह आयोजन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि भारत-रूस मित्रता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक प्रतीकात्मक संदेश भी माना गया।
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