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ब्रिटेन में घटाई गई आइसोलेशन अवधि, पांच दिन करने पर सहमति, क्यों है खतरनाक?

Neha
15 Jan 2022 8:13 AM GMT
ब्रिटेन में घटाई गई आइसोलेशन अवधि, पांच दिन करने पर सहमति, क्यों है खतरनाक?
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वैज्ञानिक डेटा को देखने और एक समझदार, सूचित, सही निष्कर्ष निकालने का आग्रह करते हैं.

ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) का मामला सामने आने से पहले ब्रिटेन (UK Covid Situation) में कोविड-19 के लक्षण वाले या संक्रमित लोग 10 दिनों के लिए क्वारंटीन में रहते थे लेकिन नए वेरिएंट के सामने आने के बाद सरकार ने होम आइसोलेशन की अवधि को सात दिन कर दिया है. अटलांटिक महासागर के दूसरी ओर 'यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' ने कहा कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के बारे में जितनी जानकारी उपलब्ध है, उसे देखते हुए वे आइसोलेशन (Isolation Period) की अवधि को बदलकर पांच दिन करने वाले हैं.

ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री साजिद जाविद ने कहा है कि कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए लोगों के लिए अब इंग्लैंड में आइसोलेशन की अवधि पांच दिनों की होगी, जबकि ब्रिटेन के अन्य क्षेत्रों के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है (Isolation Period in UK). इंग्लैंड में 17 जनवरी से संक्रमित लोग पांच दिनों के बाद दो बार जांच कराने और निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद आइसोलेशन की अवधि से बाहर निकल सकेंगे. टीकाकरण की स्थिति की परवाह किए बिना नियम समान हैं.
बेहद कम वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद
इस मामले में यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन में मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी की प्रोफेसर सैली कटलर ने कहा, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट के तौर पर हमें इस बात की चिंता है कि आइसोलेशन की अवधि घटाने संबंधी इन कदमों को सही ठहराने के लिए बहुत कम वैज्ञानिक प्रमाण हैं (Study on Covid Isolation Period). कुछ लोगों का तर्क है कि ओमिक्रॉन से बीमारी की गंभीरता 'कम' है और इसके परिणामस्वरूप अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में वृद्धि नहीं होती है, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि यह लहर स्वाभाविक संक्रमण और टीकाकरण-प्रेरित प्रतिरक्षा के संयोजन से प्राप्त सुरक्षा के बीच बड़े स्तर पर आबादी में फैल रही है.
79 वैज्ञानिक अध्ययनों की समीक्षा हुई
ब्रिटेन में कई आवश्यक सेवाएं संघर्ष कर रही हैं. तो क्या हम आर्थिक हितों को कोविड प्रबंधन योजनाओं के वैज्ञानिक औचित्य से आगे निकलते देख रहे हैं? आइसोलेशन की अवधियों के वैज्ञानिक औचित्य की बात करें तो, संक्रमित लोगों के मामले में दुनियाभर के 79 वैज्ञानिक अध्ययनों की समीक्षा की गई. इसने ना केवल पीसीआर जांच द्वारा निर्धारित वायरल लोड का मूल्यांकन किया गया. बल्कि इससे यह भी पता चला कि क्लिनिकल स्तर पर रिकवरी के बाद भी कुछ समय के लिए व्यक्ति पॉजिटव रह सकता है, साथ ही इन लोगों से वायरस फैलने की आशंका भी है.
दस दिन की होनी चाहिए अवधि
समीक्षा ने शुरुआती कुछ दिनों में कम वायरल लोड दिखाया, लेकिन फिर तीन से छह दिनों के आसपास सबसे ज्यादा, सात से नौ दिनों में वायरस खत्म हो गया और दसवें दिन वायरस की मौजूदगी नहीं मिली. दूसरे शब्दों में, आंकड़ों ने दस दिन के आइसोलेशन अवधि का समर्थन किया है. कुछ अध्ययनों ने बिना किसी लक्षण वाले लोगों में वायरल शेडिंग की थोड़ी कम अवधि का सुझाव दिया है, लेकिन राष्ट्रीय नीति पर निर्णय संक्रमण की सभी तरह की स्थिति पर आधारित होना चाहिए ना कि केवल कुछ आंकड़ों के आधार पर.
जापान में क्या पता चला?
जापान के एक अध्ययन में यह सामने आया कि ओमिक्रॉन के कारण वायरस की मौजूदगी नहीं भी दिख सकती है. यह अध्ययन अभी किसी वैज्ञानिक शोध पत्रिका में प्रकाशित नहीं हुआ है (Omicron Variant Study). अध्ययन ने व्यवस्थित समीक्षा के निष्कर्षों को प्रतिबिंबित किया है, जो यह दर्शाता है कि लक्षणों की शुरुआत के तीन से छह दिनों के बाद वायरल शेडिंग उच्चतम है. ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री की घोषणा के दिन ही एक्सेटर विश्वविद्यालय का एक अध्ययन प्रकाशित हुआ, जिसमें पाया गया कि तीन में से एक व्यक्ति पांच दिनों के बाद भी संभावित रूप से संक्रमण का प्रसार कर सकता है.
वायरस के फैलने का डर
प्रमाण बताते हैं कि पांच दिन के आइसोलेशन के कारण कई लोग अब भी वायरस का प्रसार कर रहे होंगे, जिसके परिणामस्वरूप संभावित रूप से कोरोना वायरस फैलता जाएगा. तब सरकार किस प्रमाण का उपयोग कर रही है, जिस पर हाल में आइसोलेशन की अवधि में कटौती आधारित है? सामाजिक और आर्थिक दबाव के कारण ऐसा हो रहा है. आइसोलेशन की अवधि को घटाकर पांच दिन करने से संक्रमित व्यक्तियों का समुदाय में वापस जाकर संक्रामक वायरस को फैलाने का जोखिम होता है. ब्रिटिश प्रोफेसर ने कहा कि हम अपने नीति निर्माताओं से वैज्ञानिक डेटा को देखने और एक समझदार, सूचित, सही निष्कर्ष निकालने का आग्रह करते हैं.


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