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कनिष्क बम धमाका जांच के सुराग खत्म परिवारों को RCMP का पत्र

Ratna Netam
24 Sept 2026 4:21 PM IST
कनिष्क बम धमाका जांच के सुराग खत्म परिवारों को RCMP का पत्र
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ओटावा। वर्ष 1985 में एयर इंडिया फ्लाइट 182 में हुए बम धमाके की जांच को लेकर कनाडा में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने पीड़ितों के परिवारों को बताया है कि दशकों से चली आ रही जांच में उपलब्ध सभी सक्रिय सुरागों पर काम पूरा हो चुका है। हालांकि मामला औपचारिक रूप से खुला रहेगा और भविष्य में कोई नई तथा विश्वसनीय जानकारी सामने आने पर उसकी जांच की जाएगी। इस घटनाक्रम ने पीड़ित परिवारों में निराशा और नाराजगी पैदा की है।एयर इंडिया फ्लाइट 182 को ‘कनिष्क’ के नाम से जाना जाता था। 23 जून 1985 को मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए दिल्ली और मुंबई जाने वाली यह बोइंग 747 उड़ान आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर बम विस्फोट के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में 268 कनाडाई नागरिक थे और बड़ी संख्या में पीड़ित भारतीय मूल के परिवारों से थे।
पीड़ित परिवारों को भेजे गए पत्र
CBC न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, RCMP ने फ्लाइट 182 के पीड़ितों के परिवारों को पत्र भेजकर जांच की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी। पुलिस ने परिवारों को बताया कि जांचकर्ताओं ने उनके पास मौजूद सभी उपलब्ध सुरागों पर काम कर लिया है और फिलहाल ऐसा कोई नया सक्रिय जांच बिंदु नहीं बचा है जिस पर आगे बढ़ा जा सके।इसका अर्थ यह नहीं है कि मामले को कानूनी रूप से पूरी तरह बंद कर दिया गया है। RCMP ने स्पष्ट किया कि फाइल खुली रहेगी। यदि भविष्य में कोई नई, विश्वसनीय और जांच योग्य जानकारी सामने आती है तो पुलिस उस पर कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल किसी अन्य व्यक्ति को सक्रिय संदिग्ध के तौर पर जांचे जाने की जानकारी नहीं है।पुलिस के इस संदेश से कई परिवारों को झटका लगा है। चार दशक से अधिक समय से पीड़ित परिवार इस हमले से जुड़े सभी जिम्मेदार लोगों की पहचान और जवाबदेही की उम्मीद लगाए हुए थे। ऐसे में सक्रिय जांच के लगभग समाप्त होने की सूचना ने एक बार फिर पुराने जख्मों को ताजा कर दिया है।
329 लोगों की हुई थी मौत
एयर इंडिया फ्लाइट 182 आधुनिक कनाडाई इतिहास की सबसे घातक आतंकवादी घटनाओं में से एक है। विमान में रखे विस्फोटक में धमाका उस समय हुआ जब फ्लाइट आयरलैंड के दक्षिण-पश्चिमी तट के पास उड़ रही थी। विमान हवा में टूटकर समुद्र में गिर गया और उसमें सवार कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं बचा।उसी दिन जापान के टोक्यो स्थित नारिता एयरपोर्ट पर भी एक विस्फोट हुआ था। वहां सामान स्थानांतरित करते समय एक सूटकेस में विस्फोट होने से दो बैगेज हैंडलरों की मौत हो गई थी। जांचकर्ताओं ने दोनों घटनाओं को आपस में जुड़ा पाया था।
दशकों तक चली जांच
कनिष्क बम धमाके की जांच कनाडा के इतिहास की सबसे लंबी और जटिल आपराधिक जांचों में गिनी जाती है। मामले में हजारों लोगों से पूछताछ की गई, कई देशों से जानकारी जुटाई गई और बड़ी मात्रा में दस्तावेज तथा साक्ष्य जांचे गए।जांच में कनाडा स्थित खालिस्तान समर्थक उग्रवादियों की भूमिका की जांच की गई थी। वर्ष 2005 में रिपुदमन सिंह मलिक और अजायब सिंह बागरी को लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने बरी कर दिया था। अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं माना।इंदरजीत सिंह रेयात इस मामले में दोषी ठहराया गया एकमात्र व्यक्ति था। उसने विमान में इस्तेमाल किए गए बम से संबंधित सामग्री के मामले में दोष स्वीकार किया था और अलग-अलग कानूनी कार्रवाइयों में उसे सजा मिली। बाद में गवाही से जुड़े मामले में भी उसे दोषी ठहराया गया था।
जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे थे सवाल
फ्लाइट 182 बम धमाके के बाद कनाडा की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठे थे। वर्षों बाद गठित सार्वजनिक जांच आयोग ने आतंकवादी खतरे से निपटने में संस्थागत कमियों और एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख किया था।जस्टिस जॉन मेजर की अध्यक्षता वाली जांच ने 2010 में अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी की थी। इसमें हमले को रोके जा सकने वाली त्रासदी बताया गया और राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़ी कई सिफारिशें की गई थीं।
परिवारों की न्याय की लंबी प्रतीक्षा
पीड़ित परिवारों के लिए यह मामला केवल एक पुरानी आपराधिक जांच नहीं है। दशकों से परिवार पूरी जवाबदेही और उन सभी लोगों की पहचान की मांग करते रहे हैं जिनकी हमले में भूमिका रही हो सकती है। इसलिए RCMP की ओर से यह जानकारी कि फिलहाल सभी उपलब्ध सुरागों पर काम पूरा हो चुका है, उनके लिए निराशाजनक रही है।हालांकि पुलिस ने भविष्य में जांच की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं की है। यदि कोई नया सबूत, गवाह या विश्वसनीय जानकारी सामने आती है तो मामले में दोबारा सक्रिय जांच शुरू की जा सकती है।
41 साल बाद भी न्याय का सवाल
23 जून 2026 को इस हमले के 41 वर्ष पूरे हुए। कनाडा में हर साल इस दिन पीड़ितों को याद किया जाता है। फ्लाइट 182 की त्रासदी ने कनाडा और भारत दोनों को प्रभावित किया और आतंकवाद, विमानन सुरक्षा तथा खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए।अब RCMP के पास फिलहाल कोई सक्रिय नया सुराग या अन्य संदिग्ध नहीं होने की जानकारी ने इस मामले को एक नए पड़ाव पर पहुंचा दिया है। तकनीकी रूप से जांच खुली है, लेकिन आगे की कार्रवाई अब किसी नई और विश्वसनीय सूचना के सामने आने पर निर्भर करेगी। पीड़ित परिवारों के लिए, हालांकि, 1985 की इस त्रासदी से जुड़े न्याय और जवाबदेही के सवाल अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
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