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UNHRC सत्र के दौरान PoJK के हालात पर उठे सवाल

Ratna Netam
1 Oct 2026 8:48 PM IST
UNHRC सत्र के दौरान PoJK के हालात पर उठे सवाल
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जिनेवा। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के जिनेवा में चल रहे 63वें सत्र के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में जारी विरोध प्रदर्शनों, नागरिकों की मौत, गिरफ्तारियों, कथित अत्यधिक बल प्रयोग और संचार प्रतिबंधों का मुद्दा एक बार फिर उठाया गया है। जम्मू-कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सचिव हबीब-उर-रहमान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्षेत्र की स्थिति पर ध्यान देने और नागरिक अधिकारों से जुड़े आरोपों की जांच की मांग की है। UNHRC का 63वां नियमित सत्र 7 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक जिनेवा के पैलेस ऑफ नेशंस में चल रहा है।
हबीब-उर-रहमान ने जिनेवा में कहा कि वह विभिन्न लोगों और प्रतिनिधियों से मुलाकात कर PoJK की मौजूदा स्थिति पर चर्चा कर रहे हैं। उनके मुताबिक क्षेत्र में लंबे समय से अशांति बनी हुई है और विरोध प्रदर्शनों के दौरान मौत, गिरफ्तारी और बल प्रयोग जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से नहीं, बल्कि नागरिक और मानवाधिकारों से जुड़े सवालों के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
रहमान ने दावा किया कि क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन 100 दिनों से अधिक समय से जारी हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन के पीछे बिजली और अन्य यूटिलिटी बिल, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, बुनियादी ढांचा, प्रशासन और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दे हैं। PoJK के एक स्वतंत्र मानवाधिकार संगठन ने भी सितंबर में कहा था कि रावलाकोट, पुंछ और सुधनौती समेत कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शन 100 दिन पूरे कर चुके हैं और लंबा गतिरोध लोगों में असंतोष बढ़ा रहा है।
रहमान ने आरोप लगाया कि युवा प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया, उन्हें हिरासत में लिया गया, जेल भेजा गया और कुछ लोगों पर यात्रा संबंधी प्रतिबंध लगाए गए। उन्होंने पहचान संबंधी दस्तावेजों को रद्द करने और संचार सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए जाने के आरोप भी लगाए। ये आरोप राजनीतिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं और इन सभी मामलों में स्वतंत्र न्यायिक निष्कर्ष उपलब्ध नहीं हैं।
PoJK में मौजूदा आंदोलन मुख्य रूप से जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़ा रहा है। यह संगठन बिजली की कीमतों, सब्सिडी वाले आटे, सामाजिक सेवाओं, बुनियादी ढांचे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन करता रहा है। जून 2026 में क्षेत्रीय प्रशासन ने JAAC को प्रतिबंधित कर दिया था, जिसके बाद उसके नेताओं और समर्थकों पर कार्रवाई तेज हुई।
जून में हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए जब रावलाकोट समेत कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। 9 जून की एक रिपोर्ट के मुताबिक रावलाकोट में हुई हिंसा में सात लोगों की मौत हुई थी। बाद के दिनों में पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया। AJK पुलिस ने 16 जून को कहा था कि 6 से 14 जून के बीच 425 लोगों को गिरफ्तार किया गया और विभिन्न पुलिस थानों में 81 मामले दर्ज किए गए। पुलिस के मुताबिक झड़पों में पुलिसकर्मियों समेत 89 लोग घायल भी हुए थे।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इन कार्रवाइयों में अत्यधिक और घातक बल के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। UNHRC के मौजूदा सत्र की एक आधिकारिक बैठक के ट्रांसक्रिप्ट में भी एक नागरिक संगठन के प्रतिनिधि ने 5 जून के बाद सुरक्षा बलों पर अत्यधिक बल, मनमानी हिरासत और अन्य कथित उल्लंघनों के आरोप लगाए। हालांकि वहां बताए गए हताहतों के बड़े आंकड़े संबंधित संगठन के दावे थे और स्वतंत्र रूप से सत्यापित संख्या के रूप में नहीं माने जा सकते।
सितंबर के अंतिम सप्ताह में जिनेवा प्रेस क्लब में आयोजित एक सम्मेलन में भी PoJK की स्थिति पर चर्चा हुई थी। यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने कथित गैर-न्यायिक हत्याओं, जबरन गुमशुदगी, मनमानी गिरफ्तारियों और संचार बंद किए जाने की जांच की मांग की थी। संगठन ने स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच और हिरासत में लिए गए लोगों के मामलों की समीक्षा की मांग की।
दूसरी ओर पाकिस्तान और PoJK प्रशासन का पक्ष इन आरोपों से अलग है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने JAAC को कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए उसकी गतिविधियों पर रोक को उचित ठहराया है। पाकिस्तान के संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने जून में दावा किया था कि JAAC की 38 मांगों में से 35 पर कार्रवाई हो चुकी है और सरकार बाकी मुद्दों पर भी बातचीत के लिए तैयार है। प्रशासन का कहना है कि कुछ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, हथियारों और सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने जैसी घटनाएं हुईं।
PoJK प्रशासन ने यह भी कहा है कि वह बातचीत के जरिए शिकायतों का समाधान चाहता है। जुलाई में क्षेत्रीय अधिकारियों ने दावा किया कि प्रदर्शन के कारण कुछ इलाकों में खाद्य सामग्री और दवाओं की आपूर्ति प्रभावित हुई और सड़कों को खुला रखना सरकार की जिम्मेदारी है। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण बातचीत में शामिल होने की अपील की थी।
इन परस्पर विरोधी दावों के बीच हबीब-उर-रहमान ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से स्थिति पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि नागरिकों की मौत, गिरफ्तारी, संचार प्रतिबंध और कथित बल प्रयोग के मामलों में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा प्रभावित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए।
जिनेवा में UNHRC के 63वें सत्र के दौरान PoJK का मुद्दा उठाए जाने से क्षेत्र में लंबे समय से जारी राजनीतिक और सामाजिक असंतोष एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आया है। एक ओर कार्यकर्ता कार्रवाई को मानवाधिकारों से जोड़कर स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं पाकिस्तान और क्षेत्रीय प्रशासन अपने कदमों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा रोकने के लिए जरूरी बता रहे हैं। ऐसे में स्वतंत्र जांच, पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया और बातचीत को ही इन विरोधी दावों की वास्तविकता स्पष्ट करने का प्रमुख रास्ता माना जा रहा है।
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