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पाकिस्तान में आग के खतरे के बीच सैकड़ों इमारतों की सुरक्षा पर सवाल
Ratna Netam
9 Oct 2026 8:28 PM IST

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कराची। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। इमारतों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने और सुरक्षा जांच की धीमी रफ्तार के कारण बड़ी संख्या में लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पाकिस्तानी समाचार पत्र 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, सिंध में सैकड़ों इमारतें अग्नि सुरक्षा के निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रही हैं। वहीं, हजारों इमारतों की जांच प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।रिपोर्ट के मुताबिक, सिंध प्रांत का सबसे बड़ा शहर कराची अग्नि सुरक्षा के मामले में सबसे अधिक चिंता वाला क्षेत्र बनकर सामने आया है। यहां 162 इमारतें आवश्यक फायर सेफ्टी मानकों को पूरा करने में विफल रही हैं। प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (PDMA) के आंकड़ों से पता चलता है कि कराची में चिह्नित 907 इमारतों में से केवल 292 की दूसरे चरण की जांच की गई है, जबकि 615 इमारतों की दोबारा जांच अभी बाकी है।इन आंकड़ों ने इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की निगरानी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कराची की 162 इमारतें सुरक्षा मानकों में विफल
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, कराची में कुल 162 इमारतें ऐसी पाई गई हैं, जो अग्नि सुरक्षा के आवश्यक मानकों का पालन नहीं कर रही हैं।इन इमारतों में आग लगने की स्थिति में बचाव और आपातकालीन प्रतिक्रिया से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर चिंताएं जताई गई हैं।हालांकि, रिपोर्ट में उपलब्ध आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं होता कि प्रत्येक इमारत में किस प्रकार की सुरक्षा कमी पाई गई है।अग्नि सुरक्षा नियमों का उद्देश्य आग लगने की घटनाओं को रोकने के साथ किसी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और नुकसान को कम करने में सहायता करना होता है।ऐसे में बड़ी संख्या में इमारतों का सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरना प्रशासनिक निगरानी के लिए महत्वपूर्ण चुनौती माना जा रहा है।
907 में से सिर्फ 292 इमारतों की दोबारा जांच
प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, कराची में 907 इमारतों को जांच के लिए चिह्नित किया गया था।इनमें से केवल 292 इमारतों की दूसरे चरण की जांच पूरी हुई है। बाकी 615 इमारतें अभी भी दोबारा निरीक्षण की प्रतीक्षा कर रही हैं।इसका मतलब है कि कराची की लगभग 68 प्रतिशत चिह्नित इमारतों का दूसरे चरण का निरीक्षण अब तक नहीं हुआ है।दोबारा जांच की प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह पता लगाया जा सकता है कि पहले निरीक्षण में सामने आई कमियों को दूर किया गया है या नहीं।हालांकि, जिन 615 इमारतों की जांच लंबित है, उन सभी को असुरक्षित घोषित करना उचित नहीं होगा। उनकी वास्तविक स्थिति निरीक्षण पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
कराची के साउथ जिले में सबसे ज्यादा मामले
रिपोर्ट के मुताबिक, कराची के अलग-अलग जिलों में अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने वाली इमारतों की संख्या सामने आई है।सबसे अधिक 57 इमारतें साउथ जिले में पाई गई हैं। इसके बाद सेंट्रल जिले में 45 इमारतें आवश्यक सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर सकीं।कोरंगी जिले में 23, ईस्ट में 15 और वेस्ट जिले में 11 इमारतें अग्नि सुरक्षा नियमों के अनुरूप नहीं पाई गईं।इसके अलावा मालिर जिले में सात और कियामारी में चार इमारतों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने की जानकारी सामने आई है।इन सभी जिलों की संख्या को जोड़ने पर कराची में कुल 162 इमारतें अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करती पाई गई हैं।
पूरे सिंध में 2,216 इमारतों की जांच बाकी
अग्नि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्या केवल कराची तक सीमित नहीं है।पीडीएमए के आंकड़ों के अनुसार, पूरे सिंध प्रांत में कुल 3,486 इमारतों को जांच के लिए चिह्नित किया गया है।इनमें से 2,216 इमारतों का दूसरे चरण का निरीक्षण अभी लंबित है।इस प्रकार पूरे प्रांत में लगभग 64 प्रतिशत चिह्नित इमारतों की दोबारा जांच नहीं हो सकी है।इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि निरीक्षण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अभी व्यापक स्तर पर काम किया जाना बाकी है।दूसरे चरण की जांच में देरी से इमारतों की वर्तमान सुरक्षा स्थिति के बारे में अद्यतन जानकारी उपलब्ध होने में भी समय लग सकता है।
अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन पर उठे सवाल
सिंध में सामने आए आंकड़ों ने इमारतों में अग्नि सुरक्षा नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चिंता बढ़ाई है।किसी भी बहुमंजिला, व्यावसायिक या आवासीय इमारत में आग से बचाव की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।सामान्य तौर पर अग्नि सुरक्षा उपायों में आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण, चेतावनी देने वाले अलार्म और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था शामिल हो सकती है।हालांकि, कराची की चिह्नित इमारतों में इनमें से कौन-कौन सी व्यवस्थाएं अनुपस्थित थीं, इसका इमारतवार विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।ऐसे में सभी इमारतों में एक जैसी कमियां होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
जांच में देरी से बढ़ रही चिंता
डॉन की रिपोर्ट में जांच प्रक्रिया में देरी को एक महत्वपूर्ण समस्या के रूप में सामने रखा गया है।कराची में 615 और पूरे सिंध में 2,216 इमारतों का दोबारा निरीक्षण लंबित होना दर्शाता है कि सुरक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।निरीक्षण में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों के लिए यह निर्धारित करना कठिन हो सकता है कि किन इमारतों में सुरक्षा संबंधी सुधार किए गए हैं और किनमें अतिरिक्त कार्रवाई की आवश्यकता है।हालांकि, रिपोर्ट में उपलब्ध विवरण के आधार पर जांच में देरी के लिए किसी विशेष अधिकारी या विभाग को जिम्मेदार ठहराना संभव नहीं है।इस संबंध में संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों की विस्तृत प्रतिक्रिया और जांच प्रक्रिया की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
आपात स्थिति में सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी
अग्नि सुरक्षा का संबंध सीधे तौर पर इमारतों में रहने और काम करने वाले लोगों की सुरक्षा से होता है।आग लगने की स्थिति में समय पर चेतावनी मिलना, सुरक्षित रास्तों से बाहर निकलना और बचाव उपकरणों की उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैविशेषज्ञ सुरक्षा सिद्धांतों के अनुसार, नियमित निरीक्षण और उपकरणों का रखरखाव आग से होने वाले नुकसान के जोखिम को कम करने में सहायक होते हैं।इसलिए इमारतों की सुरक्षा जांच केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संभावित दुर्घटनाओं से बचाव की महत्वपूर्ण व्यवस्था है।
सुरक्षा जांच पूरी करना प्रशासन के सामने चुनौती
सिंध में सामने आए आंकड़ों के बाद लंबित निरीक्षणों को पूरा करना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण विषय बन गया है।कराची में 162 इमारतों का अग्नि सुरक्षा मानकों पर विफल होना और बड़ी संख्या में इमारतों का पुनर्निरीक्षण लंबित रहना प्रशासनिक व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौती को दर्शाता है।डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे सिंध में 3,486 चिह्नित इमारतों में से 2,216 का दूसरे चरण का निरीक्षण अभी बाकी है।** वहीं, कराची में 907 में से केवल 292 इमारतों की दोबारा जांच पूरी हुई है। ये आंकड़े अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन, नियमित निरीक्षण और प्रभावी निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
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