विश्व
नेपाल जलप्रलय के बाद चीन पर सवाल एकतरफा रिश्ते को लेकर गुस्सा
Ratna Netam
26 Aug 2026 6:54 PM IST

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नेपाल : आई भीषण बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता और पड़ोसी देशों के बीच आपदा प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेपाल-चीन सीमा से लगे इलाकों में अचानक आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा के बाद नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार **परशुराम काफले** ने चीन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि समय रहते चेतावनी नहीं मिलने के कारण नेपाल को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
पत्रकार काफले ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नेपाल लगातार अपने पड़ोसियों की सुरक्षा चिंताओं का ध्यान रखता रहा है, लेकिन ऐसी आपदा के समय अगर समय पर सूचना नहीं मिलती तो इसकी कीमत नेपाल को क्यों चुकानी पड़े। उनके बयान के बाद नेपाल में चीन की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है।
तिब्बत से आए सैलाब ने मचाई तबाही
नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत सीमा के पास अचानक पानी का तेज बहाव आया। भोटे कोशी नदी में आई इस बाढ़ ने कई इलाकों को प्रभावित किया। तिमुरे और स्याफ्रुबेसी जैसे क्षेत्रों में घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आईं।
पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ बेहद खतरनाक होती है, क्योंकि ऊंचाई वाले इलाकों से आने वाला पानी कम समय में निचले क्षेत्रों में भारी तबाही मचा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों में बदलाव, भूस्खलन, अचानक जल प्रवाह बढ़ना और मौसम में बदलाव जैसी कई वजहें फ्लैश फ्लड का कारण बन सकती हैं।
नेपाली पत्रकार ने चीन पर क्यों उठाए सवाल?
वरिष्ठ पत्रकार परशुराम काफले ने आरोप लगाया कि अगर तिब्बत क्षेत्र में ऐसी स्थिति बनने की जानकारी पहले मिल जाती तो नेपाल प्रशासन समय रहते तैयारी कर सकता था।
उन्होंने सवाल उठाया कि नेपाल अपने पड़ोसी देशों की चिंताओं का सम्मान करता है, लेकिन जब संकट आता है तो नुकसान का भार सिर्फ नेपाल को क्यों उठाना पड़े।
उनके इस बयान को नेपाल में चीन के साथ रिश्तों पर चल रही पुरानी बहस से जोड़कर देखा जा रहा है।
एकतरफा प्यार' वाली टिप्पणी क्यों चर्चा में?
काफले की सबसे ज्यादा चर्चा उनकी उस टिप्पणी को लेकर हुई जिसमें उन्होंने नेपाल-चीन संबंधों को लेकर "एकतरफा प्यार" जैसी बात कही।
उनका इशारा इस ओर था कि नेपाल ने हमेशा पड़ोसी देशों के साथ संतुलन बनाने की कोशिश की है, लेकिन बदले में उसे भी सहयोग और पारदर्शिता की उम्मीद रहती है।
हालांकि, इस मामले में चीन की ओर से अलग रुख सामने आया है। चीन की सरकारी मीडिया रिपोर्टों में बाढ़ के कारणों को लेकर अलग दावा किया गया है। चीन का कहना है कि आपदा के पीछे नेपाल क्षेत्र में हुए भूस्खलन जैसी प्राकृतिक वजहें हो सकती हैं।
चीन और नेपाल के रिश्तों पर असर?
नेपाल और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक संबंध बढ़े हैं। चीन नेपाल में सड़क, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स में शामिल रहा है।
लेकिन समय-समय पर नेपाल में चीन की परियोजनाओं, कर्ज और पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं।
ऐसे में प्राकृतिक आपदा के बाद उठे ये सवाल दोनों देशों के संबंधों में नई बहस को जन्म दे सकते हैं।
भारत भी रख रहा नजर
नेपाल में आई इस आपदा को लेकर भारत भी सक्रिय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के नेतृत्व से संपर्क कर हर संभव मदद का भरोसा दिया है।
नेपाल और भारत के बीच भौगोलिक और सांस्कृतिक संबंध होने के कारण ऐसी आपदाओं का असर दोनों देशों पर पड़ता है। नेपाल से निकलने वाली कई नदियां भारत के सीमावर्ती राज्यों तक पहुंचती हैं, इसलिए भारत भी स्थिति पर नजर रखता है।
आपदा प्रबंधन बना बड़ी चुनौती
हिमालयी देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से निपटना है। पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदलता है और छोटी घटनाएं भी बड़े संकट में बदल सकती हैं।
ऐसे में पड़ोसी देशों के बीच समय पर सूचना साझा करना और आपदा चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना बेहद जरूरी माना जाता है।
आगे क्या होगा?
नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे हैं।
इस बाढ़ ने सिर्फ नेपाल में तबाही नहीं मचाई, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल नेपाली पत्रकार के बयान के बाद चीन-नेपाल संबंधों को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश इस आपदा से जुड़े मुद्दों पर किस तरह आगे बढ़ते हैं।
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