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दक्षिण कोरिया-अमेरिका के सैन्य अभ्यास से भड़का प्योंगयांग, परमाणु ताकत बढ़ाने की दी चेतावनी
jantaserishta.com
2 Nov 2026 9:02 AM IST

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सोल: दक्षिण कोरिया और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यासों की उत्तर कोरिया ने कड़ी आलोचना की है। नाराज प्योंगयांग ने अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया है। प्योंगयांग ने आरोप लगाया है कि दोनों देशों के सैन्य अभ्यास उसके खिलाफ परमाणु युद्ध की तैयारी का हिस्सा हैं। उत्तर कोरिया ने साफ किया, "मौजूदा और भविष्य के खतरों से निपटने के लिए अपनी परमाणु ताकत बढ़ाना उसकी राष्ट्रीय रक्षा नीति का स्थायी हिस्सा है।"
योनहाप न्यूज एजेंसी ने उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) की ओर से सोमवार को प्रसारित एक बयान के हवाले से बताया कि सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की केंद्रीय समिति के प्रथम उप विभाग निदेशक किम जोंग-सिक ने दक्षिण कोरिया और अमेरिका के 'आयरन मेस' सैन्य अभ्यास पर निशाना साधा।
किम ने इस अभ्यास को उत्तर कोरिया के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की तैयारी वाला बेहद खतरनाक युद्धाभ्यास करार दिया। उन्होंने दावा किया कि यह अभ्यास दिखाता है कि अमेरिका की परमाणु क्षमताओं और दक्षिण कोरिया की पारंपरिक सैन्य ताकत को एक साथ इस्तेमाल करने की रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ रही है।
दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सोल स्थित ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ मुख्यालय में यह टेबलटॉप सैन्य अभ्यास किया था। इसका उद्देश्य उत्तर कोरिया से पैदा होने वाले संभावित खतरों के खिलाफ दोनों देशों की संयुक्त प्रतिक्रिया और परमाणु प्रतिरोधक रणनीति को मजबूत करना था।
उत्तर कोरिया ने केवल आयरन मेस ही नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका के हॉगुक तथा फ्रीडम फ्लैग अभ्यासों की भी आलोचना की। इसके अलावा अमेरिका और जापान के संयुक्त सैन्य अभ्यास 'कीन स्वॉर्ड' को लेकर भी आपत्ति जताई।
किम जोंग-सिक ने कहा कि विरोधी देश सार्वजनिक रूप से और पर्दे के पीछे अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर रहे हैं। ऐसे हालात में उत्तर कोरिया को अपनी विरोधी ताकतों पर नियंत्रण रखने के लिए और अधिक शक्तिशाली परमाणु क्षमता विकसित करनी होगी।
उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया का परमाणु प्रतिरोधक तंत्र देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा करने के साथ क्षेत्रीय शांति बनाए रखने में भी भूमिका निभाएगा। किम के मुताबिक, मौजूदा और संभावित खतरों का मुकाबला करने के लिए परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से मजबूत करना उत्तर कोरिया की रक्षा नीति का अटल हिस्सा है।
उत्तर कोरिया लंबे समय से दक्षिण कोरिया और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को अपने खिलाफ आक्रमण की तैयारी बताता रहा है। इसके उलट सियोल और वाशिंगटन का कहना है कि ये अभ्यास रक्षात्मक प्रकृति के हैं और इनका उद्देश्य उत्तर कोरिया की परमाणु तथा मिसाइल क्षमताओं से पैदा होने वाले खतरों का मुकाबला करना है।
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