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पुतिन ने पश्चिम को चेताया, यूक्रेन संकट पर पीएम मोदी के प्रयासों की तारीफ

nidhi
2 Oct 2026 8:16 AM IST
पुतिन ने पश्चिम को चेताया, यूक्रेन संकट पर पीएम मोदी के प्रयासों की तारीफ
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यूक्रेन तनाव पर पुतिन ने पश्चिम को चेताया

मॉस्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वैश्विक हालात को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि दुनिया इस समय एक खतरनाक दौर से गुजर रही है। उन्होंने पश्चिमी देशों और नाटो को चेतावनी दी कि रूस के खिलाफ सैन्य तनाव बढ़ाने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। साथ ही पुतिन ने रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों और उनके सुझावों की सराहना की। पुतिन ने ये बातें 1 अक्टूबर को मॉस्को में वाल्दाई डिस्कशन क्लब के कार्यक्रम में कहीं।

पुतिन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में लगातार बढ़ती जवाबी कार्रवाई दुनिया को ऐसी स्थिति की ओर ले जा सकती है, जहां से वापस लौटना मुश्किल हो जाएगा। उनका कहना था कि प्रमुख शक्तियों के पास ऐसे हथियार मौजूद हैं, जिनके इस्तेमाल से पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। उन्होंने सभी पक्षों से तनाव को और आगे नहीं बढ़ाने की बात कही।
रूसी राष्ट्रपति ने विशेष रूप से कालिनिनग्राद का जिक्र किया। कालिनिनग्राद रूस का एक क्षेत्र है, जो पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित है। पुतिन ने कहा कि अगर रूसी क्षेत्र पर सीधा हमला होता है या कालिनिनग्राद को निशाना बनाया जाता है तो रूस अपने पास उपलब्ध सभी हथियारों के इस्तेमाल पर विचार करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें परमाणु हथियार भी शामिल हो सकते हैं।
नाटो ने रूस की इस चेतावनी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह एक रक्षात्मक गठबंधन है और रूस के लिए खतरा पैदा करने का उसका कोई उद्देश्य नहीं है। नाटो नेतृत्व ने परमाणु हथियारों से जुड़ी धमकियों को गैर-जिम्मेदाराना बताया है। पश्चिमी देशों का कहना है कि उनकी सैन्य गतिविधियां सदस्य देशों की सुरक्षा और रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में सुरक्षा तैयारियों का हिस्सा हैं।
पुतिन ने अपने संबोधन में इस दावे को भी दोहराया कि रूस किसी यूरोपीय देश पर हमला करने की योजना नहीं बना रहा है। उन्होंने कहा कि रूस यूरोप के साथ शांतिपूर्ण तरीके से रहना चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं करेगा। यह रूस का आधिकारिक पक्ष है, जबकि यूरोपीय देशों और नाटो ने रूस की गतिविधियों को लेकर अलग-अलग सुरक्षा चिंताएं जताई हैं।
रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद से लगातार बढ़ा है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई दौर के आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं और यूक्रेन को सैन्य तथा आर्थिक सहायता दी है। रूस पश्चिमी देशों पर संघर्ष को लंबा खींचने का आरोप लगाता है, जबकि यूक्रेन और उसके सहयोगी रूस से अपनी सेना वापस बुलाने की मांग करते रहे हैं। वाल्दाई मंच पर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच अच्छे तथा मैत्रीपूर्ण संबंध होने के बावजूद मोदी लगातार यूक्रेन संघर्ष खत्म करने का मुद्दा उठाते रहे हैं। पुतिन के अनुसार, मोदी ऐसे समाधान की तलाश को लेकर सक्रिय हैं जो सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य हो सके।
पुतिन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के पास संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान से जुड़े अच्छे विचार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी इस मुद्दे पर तटस्थ स्थिति रखते हुए संघर्ष खत्म करने में रुचि दिखाते हैं। रूसी राष्ट्रपति ने इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया। भारत का आधिकारिक रुख लंबे समय से रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर देने का रहा है। प्रधानमंत्री मोदी रूस और यूक्रेन दोनों के नेताओं से बातचीत करते रहे हैं और सार्वजनिक रूप से यह कहते रहे हैं कि विवादों का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए।
सितंबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की थी।
पुतिन ने अपने ताजा संबोधन में कहा कि दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हैं। उनके मुताबिक पुरानी वैश्विक संरचनाओं में बदलाव के कारण नए संघर्ष और प्रतिस्पर्धा की स्थितियां पैदा हो सकती हैं। उन्होंने भविष्य में अंतरराष्ट्रीय संघर्ष जारी रहने की आशंका भी जताई, हालांकि साथ ही उम्मीद जताई कि वैश्विक व्यवस्था समय के साथ अधिक संतुलित हो सकती है। रूस और नाटो के बीच कालिनिनग्राद को लेकर बढ़ते तनाव ने यूरोप में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है। पश्चिमी देशों ने हाल के महीनों में रूस पर साइबर हमलों, तोड़फोड़ और दूसरे कथित ‘हाइब्रिड’ अभियानों के आरोप लगाए हैं। रूस इन आरोपों से इनकार करता है।
पुतिन के ताजा बयान से यह स्पष्ट है कि रूस एक तरफ पश्चिम को सैन्य तनाव बढ़ाने के खिलाफ चेतावनी दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन संघर्ष के कूटनीतिक समाधान को लेकर कुछ देशों की मध्यस्थता और बातचीत के प्रयासों को सकारात्मक बता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका को लेकर पुतिन की टिप्पणी भी इसी संदर्भ में सामने आई है। फिलहाल रूस-यूक्रेन युद्ध का कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। रूस, यूक्रेन, अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच कई प्रमुख मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले समय में कूटनीतिक बातचीत और सैन्य तनाव दोनों पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।
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