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PoJK में आंदोलन तेज अनिश्चितकालीन बंद और चक्का जाम का ऐलान

Ratna Netam
6 Oct 2026 7:57 PM IST
PoJK में आंदोलन तेज  अनिश्चितकालीन बंद और चक्का जाम का ऐलान
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मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक असंतोष तेज हो गया है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पूरे क्षेत्र में अनिश्चितकालीन शटडाउन, बाजार बंद और चक्का-जाम हड़ताल का आह्वान किया है। कमेटी का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों और पहले किए गए समझौतों को लागू नहीं किए जाने के कारण उसने आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है।कमेटी ने व्यापारियों से दुकानें और बाजार बंद रखने तथा स्थानीय लोगों से सार्वजनिक और निजी परिवहन सेवाएं रोकने की अपील की है। JAAC का कहना है कि जब तक उसकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। यह फैसला अधिकारियों और एक्शन कमेटी के बीच महीनों से जारी गतिरोध के बाद लिया गया है।
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के कोर सदस्य उमर नजीर कश्मीरी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने कई बार आश्वासन दिए, लेकिन प्रदर्शनकारियों के साथ गंभीर और सार्थक बातचीत आगे नहीं बढ़ाई। उनके मुताबिक, पहले हुई बातचीत में जिन मुद्दों पर सहमति बनी थी, उनमें से कई को अब तक लागू नहीं किया गया है। कमेटी इसी को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा रही है।4 अक्टूबर को JAAC ने तीनों डिवीजनों में अनिश्चितकालीन शटर-डाउन और व्हील-जाम हड़ताल बढ़ाने की घोषणा की थी। कमेटी ने लोगों से सड़कों से दूर रहने और व्यावसायिक गतिविधियां बंद रखने की अपील की। इस बीच अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन, सड़क अवरोध और हिंसा की घटनाएं भी सामने आई हैं।
रिपोर्टों के अनुसार दादयाल में एक युवक की मौत और कोटली क्षेत्र में गोलीबारी की अलग-अलग घटनाओं ने तनाव और बढ़ा दिया। इसके बाद आंदोलन ने और आक्रामक रूप ले लिया। हालांकि इन घटनाओं की जिम्मेदारी और परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। JAAC की ओर से अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण अधिकार आंदोलन बताया गया है और समर्थकों से अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई है।मौजूदा हड़ताल का असर अलग-अलग इलाकों में एक समान नहीं रहा है। रावलाकोट और बाग जैसे क्षेत्रों में बाजार और परिवहन बड़े स्तर पर बंद रहने की खबरें हैं, जबकि मुजफ्फराबाद और मीरपुर के कुछ हिस्सों में बाद में दुकानें खुलने और गतिविधियां आंशिक रूप से सामान्य होने की रिपोर्ट भी सामने आई हैं। इससे साफ है कि आंदोलन का प्रभाव क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में अलग स्तर पर दिखाई दे रहा है।
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पिछले कुछ वर्षों से बिजली दरों, सब्सिडी वाले गेहूं, महंगाई, सामाजिक सेवाओं, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को उठाती रही है। बाद में संगठन ने अपनी मांगों को विस्तृत करते हुए 38 सूत्रीय चार्टर पेश किया। इनमें आर्थिक राहत, कथित भ्रष्टाचार की जांच, सामाजिक सेवाओं में सुधार, बुनियादी ढांचे के विकास और विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने जैसी मांगें शामिल हैं।JAAC और स्थानीय प्रशासन के बीच टकराव नया नहीं है। मई 2024 में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में कई लोगों की मौत हुई थी। बाद में सरकार ने कुछ आर्थिक रियायतों की घोषणा की थी। सितंबर-अक्टूबर 2025 में आंदोलन फिर तेज हुआ और 38 सूत्रीय मांगों को लेकर क्षेत्रव्यापी बंद आयोजित किया गया।
अक्टूबर 2025 में सरकार और JAAC के बीच समझौता हुआ था, लेकिन संगठन का आरोप है कि समझौते के कई हिस्से लागू नहीं किए गए। इसी मुद्दे पर 2026 में भी कई बार विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। जून में भी लंबी हड़ताल और बंद का आह्वान किया गया था।दूसरी ओर पाकिस्तान प्रशासित क्षेत्र की सरकार से जुड़े नेताओं का कहना है कि JAAC की अधिकांश मांगों पर कार्रवाई की जा चुकी है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने पहले दावा किया था कि 38 में से 35 मांगें लागू की जा चुकी हैं, जबकि बाकी मांगों में कानूनी या व्यावहारिक बाधाएं हैं। यह दावा JAAC के उस आरोप से अलग है जिसमें संगठन कहता है कि अहम प्रतिबद्धताएं अभी भी अधूरी हैं।
मौजूदा आंदोलन के कारण आम जनजीवन पर भी असर पड़ रहा है। बाजार बंद होने, परिवहन रुकने और सड़क अवरोध के कारण लोगों को दैनिक जरूरतों से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ क्षेत्रों में लंबे आंदोलन की आशंका को देखते हुए लोगों द्वारा जरूरी सामान जमा करने की खबरें भी सामने आई हैं।JAAC ने अपने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने की अपील की है। संगठन की सलाहकार परिषद ने भी हाल में एक बयान जारी कर अनुशासन, शांति और संवाद बहाल करने पर जोर दिया। उसने अधिकारियों से बातचीत शुरू करने, हिंसा रोकने और तनाव कम करने के लिए कदम उठाने की मांग की है।फिलहाल PoJK में राजनीतिक गतिरोध समाप्त होता दिखाई नहीं दे रहा है। एक ओर JAAC अपनी मांगों के समाधान तक अनिश्चितकालीन बंद जारी रखने पर अड़ी है, जबकि दूसरी ओर प्रशासन पर बातचीत के जरिए स्थिति सामान्य करने का दबाव बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों पक्ष फिर से बातचीत की मेज पर लौटते हैं या आंदोलन और अधिक लंबा खिंचता है।
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