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Kathmandu काठमांडू। नेपाल सरकार द्वारा भारत के सीमावर्ती कस्बों से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। सीमा क्षेत्रों के लोगों और हितधारकों का कहना है कि यह कदम उनके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला है, क्योंकि वे लंबे समय से सस्ते सामान के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर रहे हैं।
सरकार ने पिछले कुछ दिनों से इस नियम को सख्ती से लागू करना शुरू किया है। हालांकि यह प्रावधान कई साल पहले बनाया गया था, लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों के कारण इसे लागू नहीं किया जा रहा था। नई सरकार के इस फैसले से अब स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ गई है।
नेपाल-भारत खुली सीमा संवाद समूह ने शनिवार को सरकार से कस्टम नीति में तुरंत संशोधन करने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि मौजूदा नियम सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर अनावश्यक बोझ डाल रहे हैं।
जारी बयान में संगठन ने नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों का हवाला देते हुए सरकार से व्यावहारिक और जनहितैषी कदम उठाने की अपील की, ताकि सीमा पार आवाजाही आसान हो सके और लोगों के बीच संबंध मजबूत हों।
संगठन की प्रमुख मांगों में 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को तत्काल खत्म करना शामिल है। उनका कहना है कि यह नियम खासकर कम आय वाले परिवारों को प्रभावित करता है और इसे लागू करना भी मुश्किल है। इसके बजाय घरेलू उपयोग के सामान पर शून्य शुल्क की मांग की गई है।
इसके अलावा, संगठन ने सीमा क्षेत्रों में सुव्यवस्थित और सस्ते बाजार विकसित करने की भी मांग की, ताकि लोगों को जरूरी वस्तुएं आसानी से मिल सकें। साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक यात्राओं के लिए विशेष कस्टम-फ्री सुविधा देने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके तहत श्रद्धालु 48 घंटे तक बिना शुल्क सामान ले जा सकें। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों के बीच लोगों के रिश्ते और मजबूत होंगे।
वहीं, सीमा शुल्क विभाग के निदेशक किशोर बरतौला ने इस नियम के सख्ती से पालन का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम तस्करी पर नियंत्रण के लिए उठाया गया है। उन्होंने बताया कि तस्कर आम लोगों के जरिए छोटे-छोटे सामान कई बार मंगवाकर बाद में उन्हें बड़ी मात्रा में इकट्ठा कर बेचते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि 100 रुपये से अधिक के सामान पर शुल्क लगाने से सरकार को ज्यादा राजस्व नहीं मिलता, लेकिन इससे तस्करी पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है। साथ ही, इस सख्ती से नेपाल के सीमावर्ती शहरों के व्यापारियों को भी फायदा होने की उम्मीद है।
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