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जज वकील पर 5 लाख का जुर्माना
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर अदालतों में सावधानी बरतने की जरूरत को रेखांकित करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हत्या के एक मामले में कानूनी दलील तैयार करने के लिए ChatGPT का इस्तेमाल करना एक वकील को भारी पड़ गया। आरोप है कि अदालत के सामने पेश दस्तावेज में ऐसी गवाही और सामग्री का उल्लेख किया गया, जिसका वास्तविक रिकॉर्ड से मिलान नहीं हुआ। मामला सामने आने के बाद अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए वकील पर करीब पांच लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया।
मामला अमेरिका के कैलिफोर्निया की एक अदालत से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार बचाव पक्ष के वकील ने हत्या के मामले में अपने मुवक्किल की ओर से नई सुनवाई की मांग करते हुए एक याचिका दाखिल की थी। इस कानूनी दस्तावेज को तैयार करने के दौरान जनरेटिव AI टूल ChatGPT का इस्तेमाल किया गया। समस्या तब सामने आई जब अदालत ने याचिका में दिए गए तथ्यों और मुकदमे के वास्तविक रिकॉर्ड की जांच की।
रिकॉर्ड में नहीं मिली कथित गवाही
अदालत की जांच में पता चला कि याचिका में कुछ ऐसी गवाही का हवाला दिया गया था, जो मुकदमे के वास्तविक ट्रायल रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थी। यानी AI की ओर से तैयार की गई सामग्री को पर्याप्त सत्यापन के बिना अदालत में प्रस्तुत कर दिया गया था। यह मामला सामान्य तथ्यात्मक गलती से अधिक गंभीर इसलिए माना गया क्योंकि आपराधिक मुकदमे में गवाहों के बयान और ट्रायल रिकॉर्ड बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत किसी याचिका और कानूनी दलील पर विचार करती है। ऐसी स्थिति में गैर-मौजूद गवाही पेश करना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
जज ने जताई कड़ी नाराजगी
मामला पकड़ में आने के बाद जज ने वकील के रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी पेशेवर AI का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन किसी AI टूल से मिलने वाली जानकारी को बिना जांचे अदालत के सामने पेश नहीं किया जा सकता। वकील की जिम्मेदारी है कि वह अपने नाम से दाखिल किए जाने वाले प्रत्येक तथ्य, उद्धरण और कानूनी संदर्भ की सत्यता की पुष्टि करे। रिपोर्टों के मुताबिक अदालत ने वकील पर 5,000 डॉलर का आर्थिक दंड लगाया। भारतीय मुद्रा में यह राशि विनिमय दर के आधार पर करीब 4.5 से 5 लाख रुपये बैठती है। इसलिए इसे सीधे “5 लाख रुपये का जुर्माना” कहने के बजाय 5,000 डॉलर का जुर्माना लिखना अधिक सटीक है।
AI की ‘हैलुसिनेशन’ बनी बड़ी समस्या
जनरेटिव AI से जुड़ी ऐसी गलतियों को तकनीकी भाषा में ‘हैलुसिनेशन’ कहा जाता है। इसमें AI ऐसा जवाब तैयार कर सकता है जो पढ़ने में पूरी तरह विश्वसनीय और तथ्यात्मक लगे, लेकिन वास्तव में वह गलत या काल्पनिक हो। कानूनी मामलों में ऐसी गलती के परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। दुनियाभर की अदालतों में पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें वकीलों ने AI से तैयार किए गए काल्पनिक न्यायिक फैसले या गलत कानूनी संदर्भ पेश किए और बाद में उन पर कार्रवाई हुई।
अदालतों के लिए बड़ी चेतावनी
यह मामला वकीलों के साथ पत्रकारों, शोधकर्ताओं और दूसरे पेशेवरों के लिए भी महत्वपूर्ण सबक है। ChatGPT जैसे AI टूल जानकारी जुटाने, दस्तावेज का प्रारूप बनाने और विचार व्यवस्थित करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण तथ्यों के लिए मूल दस्तावेज और विश्वसनीय स्रोत से सत्यापन जरूरी है। विशेष रूप से हत्या जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में AI से उत्पन्न किसी भी गवाही या तथ्य को वास्तविक अदालती रिकॉर्ड मान लेना गंभीर गलती हो सकती है। अदालत की कार्रवाई ने साफ संदेश दिया है कि तकनीक मददगार हो सकती है, लेकिन पेशेवर जिम्मेदारी AI को नहीं सौंपी जा सकती।
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