
कीव/मॉस्को: रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए पश्चिमी देशों ने नया कदम उठाया है। ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों ने यूक्रेन में शांति सेना तैनात करने की योजना बनाई है। इसका मकसद संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में स्थिरता लाना और रूस के खिलाफ एक कड़ा संदेश देना है।
कैसी होगी शांति सेना?
इस योजना के तहत यूरोपीय देशों के विशेष बल और सैन्य पर्यवेक्षक तैनात किए जा सकते हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह सेना केवल मानवीय सहायता के लिए होगी या सैन्य कार्रवाई में भी शामिल होगी।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा, "हम यूक्रेन की संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।"
रूस ने दी कड़ी चेतावनी
रूस ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। क्रेमलिन ने इसे युद्ध को और भड़काने वाला फैसला बताया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि "अगर यूरोप ने सैनिक भेजे, तो यह रूस के खिलाफ सीधा युद्ध माना जाएगा।"
अमेरिका की भूमिका
हालांकि अमेरिका ने अभी तक इस पहल में खुलकर समर्थन नहीं दिया है, लेकिन उसने नाटो देशों की किसी भी रणनीति का सम्मान करने की बात कही है।
क्या होगा असर?
अगर शांति सेना यूक्रेन में तैनात होती है, तो यह युद्ध को रोकने या और बढ़ाने—दोनों का कारण बन सकती है। यूरोप के इस कदम पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।





