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अमेरिकी चुनाव में पोप लियो XIV ने रचा इतिहास, पहली बार किसी पोप ने डाला वोट

Ratna Netam
30 Oct 2026 8:39 PM IST
अमेरिकी चुनाव में पोप लियो XIV ने रचा इतिहास, पहली बार किसी पोप ने डाला वोट
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वेटिकन सिटी। कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप लियो XIV ने अमेरिकी लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है। उन्होंने 3 नवंबर 2026 को होने वाले अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के लिए डाक मतपत्र (मेल-इन बैलेट) के माध्यम से अपना वोट डाल दिया है। इसके साथ ही वह पोप के पद पर रहते हुए अमेरिकी आम चुनाव में मतदान करने वाले इतिहास के पहले ज्ञात धर्मगुरु बन गए हैं। वेटिकन ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को इसकी आधिकारिक पुष्टि की। पोप ने अपना मतपत्र अमेरिका के इलिनॉय राज्य के शिकागो क्षेत्र में भेजा है। इस ऐतिहासिक कदम को नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।
वेटिकन प्रेस कार्यालय ने शुक्रवार को जारी बयान में बताया कि पोप लियो XIV ने अमेरिकी नागरिक के रूप में अपने मतदान अधिकार का प्रयोग किया है। वह पहले भी पात्र होने पर विभिन्न चुनावों में मतदान करते रहे हैं। वेटिकन के अनुसार, पोप ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिक भागीदारी की अपनी पुरानी परंपरा को जारी रखते हुए शिकागो में डाक के माध्यम से अपना मतपत्र जमा किया है।वेटिकन ने यह भी स्पष्ट किया कि पोप लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी को नागरिकों का अधिकार ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी मानते हैं। उनकी इस पहल ने विशेष ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि पोप का पद सामान्य तौर पर किसी एक देश की राजनीतिक व्यवस्था से ऊपर माना जाता है।
अमेरिका में जन्मे पहले पोप हैं लियो XIV
पोप लियो XIV का जन्म अमेरिका के शिकागो शहर में हुआ था। पोप बनने से पहले उनका नाम रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट था। मई 2025 में कैथोलिक चर्च का सर्वोच्च धर्मगुरु चुने जाने के बाद उन्होंने लियो XIV नाम अपनाया।वह कैथोलिक चर्च के इतिहास में अमेरिका में जन्मे पहले पोप हैं। अमेरिकी नागरिकता होने के कारण उन्हें देश के चुनावों में मतदान करने का अधिकार प्राप्त है। पोप बनने के बाद भी उनकी अमेरिकी नागरिकता बनी हुई है।उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा अमेरिका से बाहर बिताया है। वह लंबे समय तक पेरू में मिशनरी और बिशप के रूप में कार्यरत रहे। वेटिकन के अनुसार, पेरू में रहने के दौरान भी उन्होंने पात्रता होने पर अपने मतदान अधिकार का इस्तेमाल किया था।
3 अक्टूबर को मांगा था डाक मतपत्र
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पोप लियो XIV ने 3 अक्टूबर 2026 को इलिनॉय के विल काउंटी क्लर्क कार्यालय से डाक मतपत्र का अनुरोध किया था। उनका नाम शिकागो के उपनगर न्यू लेनॉक्स में पंजीकृत मतदाताओं की सूची में शामिल है।विल काउंटी क्लर्क कार्यालय की अधिकारी किम फ्लैडहैमर ने पुष्टि की थी कि रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट का नाम आगामी चुनाव के लिए डाक मतपत्र मांगने वाले व्यक्तियों की सूची में दर्ज है।इसके बाद 30 अक्टूबर को वेटिकन ने घोषणा की कि पोप ने अपना मतपत्र जमा कर दिया है। हालांकि, मतपत्र वेटिकन से शिकागो तक किस माध्यम से पहुंचाया गया, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
चुनावी इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ
पोप लियो XIV का मतदान इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इससे पहले किसी पोप के अमेरिकी आम चुनाव में मतदान करने का प्रमाण उपलब्ध नहीं है।इतिहासकारों के अनुसार, यह संभवतः पहला ज्ञात अवसर है जब पद पर रहते हुए किसी पोप ने आधुनिक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक चुनाव में मतदान किया है। हालांकि, ऐतिहासिक रिकॉर्ड की सीमाओं को देखते हुए इसे सभी देशों और सभी कालखंडों के लिए निर्विवाद दावा नहीं माना जा सकता।पोप का यह निर्णय उस स्थापित धारणा से अलग दिखाई देता है, जिसके अनुसार धार्मिक नेतृत्व करने वाले व्यक्ति आम तौर पर प्रत्यक्ष चुनावी गतिविधियों से दूरी बनाए रखते हैं। हालांकि, मतदान करने का अर्थ किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के पक्ष में सार्वजनिक समर्थन देना नहीं है।
पहले भी कई अमेरिकी चुनावों में कर चुके हैं मतदान
अमेरिकी चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार, पोप लियो XIV अपने पुराने नाम रॉबर्ट प्रीवोस्ट के तहत पहले भी कई चुनावों में मतदान कर चुके हैं।इलिनॉय राज्य के रिकॉर्ड बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2008 और 2010 में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनावों के लिए मतपत्र प्राप्त किए थे। वहीं 2012, 2014 और 2016 में उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के प्राइमरी चुनावों में भाग लिया था।इसके अलावा वह 2012, 2014, 2018 और 2024 के आम चुनावों में भी मतदान कर चुके हैं। हालांकि, इन रिकॉर्डों से यह स्पष्ट नहीं होता कि उन्होंने किस उम्मीदवार को वोट दिया था। अमेरिका में प्राइमरी चुनाव के दौरान पार्टी का मतपत्र चुनना संबंधित पार्टी के प्रति स्थायी राजनीतिक समर्थन का प्रमाण नहीं होता।
3 नवंबर को अमेरिका में होंगे मध्यावधि चुनाव
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मध्यावधि चुनाव आयोजित किए जाएंगे। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के लिए मतदान होगा।इसके अतिरिक्त कई राज्यों में गवर्नर, स्थानीय प्रशासन और अन्य निर्वाचित पदों के लिए भी मतदान होना है।पोप लियो XIV जिस इलिनॉय राज्य में पंजीकृत हैं, वहां गवर्नर पद और अमेरिकी सीनेट की एक सीट के लिए भी चुनाव हो रहा है। गवर्नर जेबी प्रिट्जकर एक और कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि लंबे समय तक सीनेटर रहे डिक डर्बिन के सेवानिवृत्त होने के कारण उनकी सीट पर नया प्रतिनिधि चुना जाएगा।पोप ने किस उम्मीदवार को वोट दिया है, इसकी कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
डाक मतदान को लेकर अमेरिका में जारी है बहस
पोप का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका में मेल-इन वोटिंग की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डाक मतदान की व्यवस्था पर सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव प्रशासन और मतदान अधिकारों का समर्थन करने वाले समूह इसे पात्र नागरिकों, विशेषकर विदेशों में रहने वाले अमेरिकी नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा बताते हैं।अमेरिकी कानून के तहत विदेशों में रहने वाले पात्र नागरिक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करके डाक या अनुपस्थित मतदाता व्यवस्था के माध्यम से अपना वोट दे सकते हैं।पोप के मामले में भी इसी व्यवस्था का उपयोग किया गया है। हालांकि, वेटिकन ने उनके मतदान को किसी राजनीतिक विवाद से जोड़ने के बजाय नागरिक भागीदारी के संदर्भ में प्रस्तुत किया है।
लोकतंत्र में भागीदारी का दिया संदेश
पोप लियो XIV सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, शांति और मानवीय गरिमा से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करते रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी आव्रजन नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को लेकर भी सार्वजनिक टिप्पणियां की हैं।उनका हालिया मतदान नागरिक भागीदारी के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है। वेटिकन ने कहा कि पोप नागरिकों के लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लेने के अधिकार और कर्तव्य में विश्वास रखते हैं।इस घटनाक्रम ने धार्मिक नेतृत्व और नागरिक अधिकारों के संबंध को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। पोप लियो XIV ने अमेरिकी चुनाव में अपना मतपत्र जमा करके एक ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया है। अब 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों के परिणामों पर दुनियाभर की नजरें रहेंगी।
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