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इजरायल चुनाव में धांधली के आरोपों से सियासी घमासान

Ratna Netam
29 Oct 2026 4:30 PM IST
इजरायल चुनाव में धांधली के आरोपों से सियासी घमासान
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यरुशलम : 29 अक्टूबर 2026। इजरायल में संसदीय चुनाव के बाद कथित धांधली के आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने अरब राजनीतिक दलों पर चुनाव में अनियमितताएं करने और मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया है। इसके बाद इजरायली पुलिस और केंद्रीय चुनाव समिति ने चुनाव की निष्पक्षता को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस ने कहा है कि अब तक उपलब्ध जांच और खुफिया जानकारी में व्यापक चुनावी धांधली के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, केंद्रीय चुनाव समिति ने भरोसा दिलाया है कि चुनाव की शुचिता से संबंधित शिकायतों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच की जाएगी।इजरायल में 27 अक्टूबर को 120 सदस्यीय संसद नेसेट के लिए मतदान हुआ था। मतगणना के बीच अरब राजनीतिक दलों के प्रदर्शन और सरकार बनाने के संभावित समीकरणों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी दौरान चुनाव में धांधली के आरोप सामने आने से विवाद बढ़ गया है।
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने लगाए गंभीर आरोप
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने बुधवार, 28 अक्टूबर को आरोप लगाया कि अरब राजनीतिक दलों ने मतदान को प्रभावित करने के लिए अवैध तरीकों का इस्तेमाल किया।पार्टी ने मतदाताओं को रिश्वत देने, धमकाने, हिंसा, जालसाजी और प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल जैसे आरोप लगाए हैं।लिकुड का दावा है कि उसके पास कथित अनियमितताओं से संबंधित गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं। पार्टी ने इन आरोपों की जांच के लिए पुलिस, घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट और केंद्रीय चुनाव समिति से कार्रवाई की मांग की है।हालांकि, इन आरोपों को अभी प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। पुलिस और निर्वाचन अधिकारियों ने कहा है कि उपलब्ध जानकारी व्यापक चुनावी धांधली के दावों का समर्थन नहीं करती।
पुलिस ने कहा- व्यापक धांधली का कोई ठोस सबूत नहीं
इजरायली पुलिस ने गुरुवार को लिकुड पार्टी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मतदान के दौरान चुनाव की निष्पक्षता से संबंधित असामान्य घटनाओं की संख्या सीमित रही।पुलिस के अनुसार, पिछले चुनावों की तुलना में भी इस बार ऐसी घटनाएं कम दर्ज हुई हैं।पुलिस ने स्पष्ट किया कि व्यापक चुनावी धांधली के आरोपों के समर्थन में फिलहाल कोई जांच संबंधी या खुफिया साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।इस बयान से लिकुड पार्टी के उन दावों को चुनौती मिली है, जिनमें चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए संगठित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।हालांकि, पुलिस की इस प्रतिक्रिया का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्तिगत शिकायतों की जांच बंद कर दी गई है। किसी विशिष्ट घटना में अपराध के प्रमाण मिलने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
केंद्रीय चुनाव समिति ने दिया सभी शिकायतों की जांच का भरोसा
इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति ने भी चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने को अपनी प्राथमिकता बताया है।समिति ने कहा कि चुनाव की निष्पक्षता और मतगणना में संभावित त्रुटियों से संबंधित राजनीतिक दलों की शिकायतों की समीक्षा की जा रही है।चुनाव समिति के अनुसार, प्रत्येक चुनाव में इस प्रकार की निगरानी व्यवस्था अपनाई जाती है, ताकि मतदान और मतगणना में सामने आने वाली शिकायतों का नियमानुसार निस्तारण किया जा सके।समिति ने लिकुड पार्टी की शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए बताया कि इसे भी निर्धारित समीक्षा प्रक्रिया में शामिल किया गया है।चुनाव अधिकारियों का कहना है कि आरोपों की जांच और वास्तविक अनियमितताओं की पहचान चुनावी प्रक्रिया में विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है।
विदेशी हस्तक्षेप की आशंका पर शिन बेट से जांच की मांग
इस विवाद के बीच केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति नोआम सोहलबर्ग ने इजरायल की घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट से संभावित विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच करने को कहा है।29 अक्टूबर को भेजे गए पत्र में उन्होंने चुनाव को प्रभावित करने के लिए संभावित विदेशी वित्तीय सहायता या रिश्वतखोरी से संबंधित सूचनाओं की जांच का अनुरोध किया।उन्होंने एजेंसी से एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध निष्कर्ष साझा करने को कहा है।हालांकि, न्यायमूर्ति सोहलबर्ग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आरोपों में कौन-सी विदेशी संस्थाएं या व्यक्ति शामिल हो सकते हैं।यह जांच अनुरोध लिकुड पार्टी द्वारा अरब राजनीतिक दलों पर लगाए गए आरोपों से अलग है। फिलहाल दोनों मामलों के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
अरब राजनीतिक दलों को मिल सकती हैं 19 सीटें
इजरायल के संसदीय चुनाव में इस बार अरब राजनीतिक दलों का प्रदर्शन महत्वपूर्ण रहा है।29 अक्टूबर को सामने आए प्रारंभिक चुनावी आंकड़ों के अनुसार, अरब नेतृत्व वाले राजनीतिक दलों को संयुक्त रूप से 19 सीटें मिलने का अनुमान है।वहीं, प्रधानमंत्री नेतन्याहू के नेतृत्व वाले राजनीतिक गठबंधन को लगभग 53 और विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के गठबंधन को 48 सीटें मिलने का अनुमान है।इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन आवश्यक है।इन आंकड़ों के अनुसार, किसी भी प्रमुख गठबंधन को अपने दम पर बहुमत नहीं मिलता दिखाई दे रहा है। हालांकि, अंतिम आधिकारिक परिणाम आने तक सीटों की संख्या में बदलाव संभव है।
अरब समुदाय में मतदान को लेकर राजनीतिक बहस
इस बार इजरायल के अरब मतदाताओं की भागीदारी राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।मतदान में बढ़ी भागीदारी और अरब राजनीतिक दलों को मिले समर्थन के बीच लिकुड ने कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।दूसरी ओर, अरब राजनीतिक दलों ने अपने खिलाफ लगाए गए व्यापक आरोपों को खारिज किया है।विपक्षी नेताओं ने भी चुनावी धांधली के अप्रमाणित आरोपों के आधार पर मतदाताओं के फैसले को संदेह के घेरे में लाने पर आपत्ति जताई है।चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शिकायत का निर्णय आरोपों के बजाय उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।
रिश्वतखोरी की आशंका में तीन लोग गिरफ्तार
चुनाव से पहले दक्षिणी इजरायल के नेगेव क्षेत्र में पुलिस ने तीन संदिग्ध व्यक्तियों को कथित चुनावी रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया था।पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर मतदाताओं को एक राजनीतिक दल के पक्ष में मतदान करने के लिए धन देने की कोशिश करने का संदेह था।तलाशी के दौरान नकदी से भरे लिफाफे और चुनाव संबंधी सामग्री बरामद की गई थी।हालांकि, संदिग्धों ने आरोपों से इनकार किया है। उनके वकीलों ने बरामद धन के संबंध में वैकल्पिक स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत किए हैं।यह मामला जांच के दायरे में है और इससे पूरे चुनाव में व्यापक धांधली साबित नहीं होती।
अंतिम नतीजों और सरकार गठन पर टिकी निगाहें
इजरायल में चुनाव परिणामों को लेकर अनिश्चितता अभी बनी हुई है। अंतिम मतगणना के साथ राजनीतिक दलों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत भी महत्वपूर्ण होगी।इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग को संसदीय दलों से परामर्श के बाद किसी नेता को सरकार बनाने का अवसर देना होगा।इस बीच पुलिस और केंद्रीय चुनाव समिति के सामने चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने, शिकायतों की जांच करने और प्रमाणित तथ्यों को सार्वजनिक करने की चुनौती है।फिलहाल इजरायली पुलिस ने व्यापक चुनावी धांधली के दावों को उपलब्ध साक्ष्यों से असमर्थित बताया है, जबकि चुनाव समिति ने शिकायतों की समीक्षा जारी रखी है।आने वाले दिनों में अंतिम परिणाम और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से चुनाव संबंधी विवाद की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
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