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पाकिस्तान में कॉकरोच प्रदर्शन पर सियासी सवाल, जेन-जी की बढ़ी चुनौती

Saba Naaz
2 Aug 2026 8:29 PM IST
पाकिस्तान में कॉकरोच प्रदर्शन पर सियासी सवाल, जेन-जी की बढ़ी चुनौती
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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में आर्थिक संकट, बेरोजगारी, महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता के बीच युवा आबादी की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। देश की करीब 60 प्रतिशत आबादी 30 वर्ष से कम उम्र की है और इसमें करोड़ों युवा जेन-जी (Generation Z) वर्ग से आते हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान में ऐसा कोई बड़ा देशव्यापी युवा आंदोलन नहीं दिख रहा, जैसा दुनिया के कई अन्य देशों में देखने को मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा से जुड़े कारण जिम्मेदार हैं।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में हाल के दिनों में हुए विरोध प्रदर्शनों ने देश की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ाई है। स्थानीय मुद्दों, महंगाई, रोजगार और राजनीतिक अधिकारों को लेकर लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और मौतों की खबरों ने पाकिस्तान की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। इसके बावजूद देशभर के युवा एकजुट होकर किसी बड़े आंदोलन का हिस्सा नहीं बन पाए हैं।

पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी के एक बयान ने भी इस बहस को हवा दी। उन्होंने जेन-जी युवाओं का जिक्र करते हुए कहा था कि अगर ये युवा एकजुट हो गए तो व्यवस्था को चुनौती दे सकते हैं। इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर इतनी बड़ी युवा आबादी होने के बावजूद पाकिस्तान में युवा आंदोलन क्यों नहीं खड़ा हो पा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा व्यवस्था में सेना की भूमिका सबसे अहम है। देश में लंबे समय से सेना राजनीतिक मामलों में प्रभावशाली भूमिका निभाती रही है। आलोचकों के अनुसार वहां की सरकारें अक्सर सेना के प्रभाव में काम करती दिखाई देती हैं। यही वजह है कि आम लोगों और युवाओं के सामने विरोध का स्पष्ट केंद्र तय करना मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा पाकिस्तान में विपक्षी राजनीति भी लगातार कमजोर हुई है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ हुई कार्रवाई और उनके समर्थकों पर कार्रवाई के बाद युवाओं में राजनीतिक असंतोष तो है, लेकिन उसे संगठित आंदोलन में बदलने की क्षमता कमजोर नजर आती है। युवाओं को यह डर रहता है कि सत्ता और सुरक्षा संस्थानों के खिलाफ आवाज उठाने का परिणाम गंभीर हो सकता है।

पाकिस्तान में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के आंदोलन चल रहे हैं। बलूचिस्तान में अलगाववादी मुद्दे हैं, खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां हैं, जबकि बड़े शहरों में युवा बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इन सभी समस्याओं के अलग-अलग होने के कारण कोई एक साझा आंदोलन का रूप नहीं बन पा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वहां असंतोष तो मौजूद है, लेकिन वह बिखरा हुआ है। अलग-अलग वर्गों की समस्याएं अलग हैं और उनके लक्ष्य भी अलग-अलग हैं। ऐसे में सरकार के लिए किसी एक बड़े आंदोलन को नियंत्रित करना आसान हो जाता है।

वहीं, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बावजूद पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आजादी और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण युवा खुलकर सामने आने से बचते हैं। कई कार्यकर्ताओं और राजनीतिक समूहों का आरोप है कि विरोध की आवाजों को दबाने की कोशिश की जाती है।

फिलहाल पाकिस्तान की जेन-जी पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह आर्थिक परेशानियों और राजनीतिक असंतोष के बावजूद संगठित नहीं हो पा रही है। आने वाले समय में यदि युवा वर्ग रोजगार, शिक्षा और बेहतर शासन जैसे मुद्दों पर एकजुट होता है तो देश की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव हो सकता है। लेकिन मौजूदा हालात में पाकिस्तान में किसी बड़े युवा आंदोलन की राह कई बाधाओं से घिरी हुई नजर आती है।

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