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पाकिस्तान में गवर्नर शासन को लेकर सियासी विवाद

Ratna Netam
12 Oct 2026 5:14 PM IST
पाकिस्तान में गवर्नर शासन को लेकर सियासी विवाद
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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग और खैबर पख्तूनख्वा की राजनीतिक स्थिति को लेकर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। इमरान खान के बेटे कासिम खान ने सोमवार को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व वाले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू किए जाने के दावे को लेकर संघीय सरकार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए कठोर कदम उठा रही है और पश्तून बहुल क्षेत्रों में एक और सैन्य अभियान को उचित ठहराने के लिए आतंकवाद का मुद्दा उठाया जा रहा है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में कासिम खान ने कहा कि पाकिस्तान की असली ताकत वहां की जनता है, न कि सेना। उन्होंने संघीय सरकार के कथित कदमों को हताशा का संकेत बताते हुए सेना प्रमुख आसिम मुनीर की कार्यशैली पर सवाल उठाए। हालांकि, खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू होने की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है। इसलिए इसे फिलहाल कासिम खान के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर कासिम खान ने जताई नाराजगी
कासिम खान ने एक्स पर पोस्ट करते हुए खैबर पख्तूनख्वा में लागू आपातकाल और गवर्नर शासन की आलोचना की। उन्होंने इस फैसले को इमरान खान की रिहाई के लिए चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जोड़ा।कासिम ने लिखा, "अब, जब पाकिस्तानी मेरे पिता की रिहाई के लिए सड़कों पर उतर आए हैं, तो आसिम मुनीर की सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा (मेरे पिता का राजनीतिक गढ़) में आपातकाल लागू कर दिया है।"उन्होंने दावा किया कि संघीय सरकार ने राजनीतिक दबाव के बीच यह कदम उठाया है। हालांकि, पाकिस्तानी सरकार ने इस फैसले के पीछे सुरक्षा संबंधी कारण बताए हैं।
आसिम मुनीर पर लगाए गंभीर आरोप
कासिम खान ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर पश्तून बहुल इलाकों में सैन्य अभियान को उचित ठहराने के लिए आतंकवाद का सहारा लेने का आरोप लगाया।उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि बलूचिस्तान और आजाद कश्मीर में स्थिति संभालने में कथित विफलता के बाद सेना प्रमुख खैबर पख्तूनख्वा में भी इसी नीति को आगे बढ़ा रहे हैं।कासिम ने आरोप लगाया कि सत्ता पर पकड़ बनाए रखने के प्रयासों में आम लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही है।ये आरोप कासिम खान के व्यक्तिगत और राजनीतिक दावे हैं। उपलब्ध जानकारी में उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि करने वाले साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
पाकिस्तान जनता का है, सेना का नहीं
कासिम खान ने अपने बयान में पाकिस्तान की जनता के अधिकारों पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वहां रहने वाले लोगों का है, सेना का नहीं।उनकी यह टिप्पणी पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में सेना की भूमिका और नागरिक शासन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सामने आई है।कासिम ने अपने पिता इमरान खान की रिहाई की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों के समर्थन में भी आवाज उठाई।उन्होंने संघीय सरकार के फैसले को हताशा से प्रेरित बताया और इसे शासन की विफलताओं से जोड़ा।
खैबर पख्तूनख्वा में क्यों लगाया गया आपातकाल?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सलाह पर खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने की मंजूरी दी।यह फैसला पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत लिया गया।संघीय सरकार ने प्रांत में बढ़ती आतंकवादी घटनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति को फैसले का प्रमुख कारण बतायासरकार का आरोप है कि पीटीआई के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार आतंकवाद से निपटने में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही थी।वहीं, पीटीआई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए फैसले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
इमरान खान की पार्टी की सरकार निलंबित
खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का वह प्रांत है, जहां इमरान खान की पार्टी पीटीआई लंबे समय से सत्ता में रही है।आपातकाल और गवर्नर शासन लागू होने के बाद मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार की शक्तियां निलंबित कर दी गई हैं।प्रांत के प्रशासन की जिम्मेदारी राज्यपाल फैसल करीम कुंडी को सौंपी गई है।इसके साथ ही प्रशासनिक कामकाज के लिए 11 सदस्यीय सलाहकार परिषद का गठन किया गया है।संघीय सरकार के इस फैसले से प्रांत की राजनीतिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है।
इमरान खान की रिहाई की मांग पर बढ़ा तनाव
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान वर्ष 2023 से जेल में हैं। उनकी पार्टी और समर्थक लगातार उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं।खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लगाने का फैसला ऐसे समय आया, जब पीटीआई के समर्थक इस्लामाबाद की ओर विरोध मार्च की तैयारी कर रहे थे।सरकार और पीटीआई के बीच बातचीत विफल होने के बाद राजनीतिक तनाव और बढ़ गया।पीटीआई का आरोप है कि आपातकाल के जरिए उसके राजनीतिक आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि उसका निर्णय आतंकवाद से निपटने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी भी हिरासत में
खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू होने के बाद पीटीआई के कई नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।सोमवार को पाकिस्तानी अधिकारियों ने मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की।इस कार्रवाई के बाद पीटीआई ने संघीय सरकार की आलोचना की।पार्टी का कहना है कि प्रांतीय सरकार को निलंबित करना और उसके नेताओं को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक अधिकारों तथा प्रांतीय स्वायत्तता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
सरकार ने राजनीतिक आरोपों को किया खारिज
पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने सोमवार को खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के फैसले का बचाव किया।उन्होंने कहा कि यह फैसला राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि आतंकवाद की समस्या से निपटने के लिए लिया गया है।डार के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा लंबे समय से आतंकवादी हिंसा से प्रभावित रहा है।इस तरह सरकार और पीटीआई के बीच आपातकाल लागू करने के कारणों को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए हैं।
संवैधानिक प्रक्रिया पर भी रहेगी नजर
पाकिस्तान के संविधान के तहत आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है।राष्ट्रपति की घोषणा के बाद संसद की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन के दौरान प्रांतीय प्रशासन की शक्तियां राज्यपाल के माध्यम से संचालित की जा रही हैं।इस व्यवस्था की अवधि और आगे के विस्तार से जुड़े फैसले संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार लिए जाएंगे।पीटीआई ने सरकार के निर्णय को कानूनी और संसदीय स्तर पर चुनौती देने की बात कही है।
पाकिस्तान की राजनीति में बढ़ा टकराव
कासिम खान के बयान ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल को लेकर जारी विवाद में एक और राजनीतिक प्रतिक्रिया जोड़ दी है।उन्होंने सेना प्रमुख आसिम मुनीर और संघीय सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपने पिता की रिहाई की मांग करने वाले लोगों का समर्थन किया है।वहीं, पाकिस्तानी सरकार का कहना है कि आपातकाल का उद्देश्य आतंकवाद और बिगड़ती सुरक्षा स्थिति से निपटना है।अब इस मामले में संसद की कार्यवाही, पीटीआई की कानूनी चुनौती और प्रांत में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अगले कदम महत्वपूर्ण होंगे।
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