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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत में राजनीतिक संकट गहराने की खबर सामने आई है। प्राप्त विवरण के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की संघीय कैबिनेट की सिफारिशों को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार पर आपातकाल और गवर्नर शासन लागू किए जाने का दावा किया गया है। इसके साथ ही प्रांत में प्रशासनिक नियंत्रण संघीय अधिकारियों के हाथों में जाने की बात कही गई है।इस घटनाक्रम के बीच खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को हिरासत में लिए जाने का दावा भी सामने आया है। प्रांत के सूचना मंत्री शफी जान के अनुसार, पीटीआई के प्रस्तावित लॉन्ग मार्च के दौरान मुख्यमंत्री को सुरक्षाकर्मियों ने हिरासत में लिया।हालांकि, गवर्नर शासन लागू होने और मुख्यमंत्री की हिरासत से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में घटनाक्रम को उपलब्ध विवरण और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद गवर्नर शासन का दावा
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की संघीय कैबिनेट ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने की सिफारिश की थी। इसके बाद राष्ट्रपति की ओर से मंजूरी दिए जाने की बात कही गई है।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह फैसला पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत लिया गया।अनुच्छेद 232 आपातकाल से संबंधित संवैधानिक प्रावधान है, जबकि अनुच्छेद 234 प्रांत में संवैधानिक व्यवस्था के विफल होने की स्थिति में राष्ट्रपति द्वारा विशेष कदम उठाए जाने से संबंधित है।उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस फैसले के बाद विपक्षी दल पीटीआई के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार की शक्तियां सीमित होने और प्रशासनिक नियंत्रण संघीय स्तर पर जाने की बात कही गई है।हालांकि, राष्ट्रपति के कथित आदेश का मूल पाठ उपलब्ध नहीं है। इसलिए लागू प्रावधानों, उनकी अवधि और प्रशासनिक शक्तियों में हुए बदलाव की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
आतंकवाद और सुरक्षा स्थिति का हवाला
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लगाने के पीछे आतंकवादी हमलों और बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था का हवाला दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रांतीय सरकार आतंकवाद से निपटने में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही थी। सरकार ने सुरक्षा संबंधी बातचीत विफल होने का भी उल्लेख किया।राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 11 अक्टूबर को संघीय कैबिनेट की सिफारिश को मंजूरी दी। इसके बाद प्रांत में आपातकाल लागू करने की अधिसूचना जारी की गई। रिपोर्टों के अनुसार, संघीय सरकार ने गवर्नर और सलाहकार परिषद के माध्यम से प्रशासनिक व्यवस्था संभालने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की गिरफ्तारी का दावा
आपातकाल की घोषणा के बाद खैबर पख्तूनख्वा के सूचना मंत्री शफी जान ने दावा किया कि मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को सुरक्षाकर्मियों ने हिरासत में ले लिया है।शफी जान ने लोगों से पेशावर पहुंचने की अपील भी की। अफरीदी पीटीआई के उस लॉन्ग मार्च का नेतृत्व कर रहे थे, जिसका उद्देश्य जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग उठाना था।कुछ रिपोर्टों में पीटीआई के प्रांतीय अध्यक्ष जुनैद अकबर खान की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी के सटीक स्थान, कानूनी आधार और आगे की कार्रवाई के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी स्पष्ट नहीं है।
पेशावर में भारी सुरक्षा, रास्तों पर बैरिकेडिंग
आपातकाल लागू होने के बाद खैबर पख्तूनख्वा के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। विशेष रूप से पेशावर और प्रमुख संपर्क मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई।प्रदर्शनकारियों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए कई रास्तों पर शिपिंग कंटेनर लगाकर बैरिकेडिंग की गई। कुछ शहरी क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट डेटा सेवाएं प्रभावित होने की भी जानकारी सामने आई।हालांकि, पूरे प्रांत में संचार सेवाएं पूरी तरह बंद होने की पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा प्रतिबंधों का दायरा अलग-अलग इलाकों में भिन्न बताया गया है।
PTI ने फैसले को बताया लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने आपातकाल और गवर्नर शासन का विरोध किया है। पार्टी नेतृत्व ने इसे प्रांत के लोकतांत्रिक जनादेश और स्वायत्तता के खिलाफ कदम बताया।पीटीआई अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान ने इस फैसले को गंभीर राजनीतिक गलती करार दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि संघीय सरकार ने निर्वाचित प्रांतीय सरकार की शक्तियां छीनकर राजनीतिक हस्तक्षेप किया है।दूसरी ओर, शहबाज शरीफ सरकार का तर्क है कि सुरक्षा संकट और आतंकवाद से निपटने में प्रांतीय प्रशासन की कथित विफलता के कारण संवैधानिक कदम उठाना आवश्यक हो गया था।
इमरान खान की रिहाई को लेकर जारी था लॉन्ग मार्च
खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू होने से पहले पीटीआई समर्थक इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर लॉन्ग मार्च निकाल रहे थे।यह मार्च 5 अक्टूबर को शुरू हुआ था और इसका नेतृत्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य इस्लामाबाद की ओर बढ़कर अपनी मांगों को सामने रखना था।संघीय सरकार और पीटीआई के बीच आतंकवाद विरोधी नीति तथा राजनीतिक मांगों को लेकर पहले से मतभेद चल रहे थे। बातचीत विफल होने के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ गया।
प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव
आपातकाल लागू होने के बाद संघीय प्रशासन ने प्रांत के वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों में भी बदलाव किए।रिपोर्टों के अनुसार, डॉ. मुहम्मद फखर आलम इरफान को खैबर पख्तूनख्वा का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया। इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारी मुहम्मद याह्या अखुंदजादा को भी प्रांत में स्थानांतरित किया गया।इन बदलावों को संघीय प्रशासन के नियंत्रण में नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।
पाकिस्तान में बढ़ा राजनीतिक टकराव
खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू होने से पाकिस्तान की संघीय सरकार और पीटीआई के बीच राजनीतिक टकराव और गहरा गया है।एक ओर शहबाज शरीफ सरकार आतंकवाद और कानून-व्यवस्था को अपने फैसले का आधार बता रही है, वहीं पीटीआई इसे निर्वाचित सरकार के अधिकारों में हस्तक्षेप करार दे रही है।मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की कथित गिरफ्तारी, सुरक्षा प्रतिबंधों और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों के कारण स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। आने वाले दिनों में आपातकाल की प्रशासनिक व्यवस्था, कानूनी चुनौतियों और पीटीआई की अगली रणनीति पर नजर रहेगी।
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