
US-Iran : प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव को कम करने की दिशा में अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत किया है। उन्होंने इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे टकराव और तनाव ने न केवल पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित किया है, बल्कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। ऐसे में किसी भी तरह की कूटनीतिक पहल जो तनाव को कम करने की दिशा में हो, उसका स्वागत किया जाना चाहिए।
United States और Iran के बीच बनी हालिया सहमति को क्षेत्रीय शांति बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस समझौते से उम्मीद जताई जा रही है कि पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात बेहतर होंगे और लंबे समय से प्रभावित समुद्री एवं ऊर्जा व्यापार मार्गों को स्थिरता मिल सकेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते विवादों और संघर्षों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि सैन्य टकराव और तनावपूर्ण परिस्थितियाँ न केवल संबंधित देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आर्थिक और मानवीय चुनौतियाँ पैदा करती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्व समुदाय को ऐसे प्रयासों का समर्थन करना चाहिए, जो संवाद और सहयोग को बढ़ावा दें और तनाव को कम करने में मदद करें। मोदी ने आशा जताई कि इस पहल से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में आगे और सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत लगातार इस बात का पक्षधर रहा है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान शांतिपूर्ण वार्ता और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत का मानना है कि स्थिर और शांत वैश्विक वातावरण ही विकास और समृद्धि की नींव रख सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सहमति प्रभावी रूप से आगे बढ़ती है, तो इससे न केवल क्षेत्रीय तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार मार्गों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान भारत की उस विदेश नीति को दर्शाता है, जिसमें शांति, संवाद और वैश्विक सहयोग को प्राथमिकता दी जाती है।





