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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड में भारतीय संस्कृति, आस्था और कला की वैश्विक पहचान पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस तरह भारत की सांस्कृतिक परंपराएं दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को जोड़ रही हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री ने थाईलैंड के भगवान गणेश के बड़े भक्त श्रीमान पंथौन थिरखानोन की भक्ति का विशेष रूप से उल्लेख किया।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का प्रभाव पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है। उन्होंने भगवान गणेश की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि गणेश उत्सव के दौरान पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा। लोगों ने अपने घरों और सार्वजनिक स्थानों पर गणपति बप्पा का स्वागत किया और पूजा-अर्चना की।‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। वे ज्ञान, बुद्धि और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि गणेश उत्सव पूरे देश में खुशी और उत्साह का वातावरण लेकर आता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने थाईलैंड के श्रीमान पंथौन थिरखानोन का उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान गणेश के प्रति उनकी आस्था भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों में लोग गणेश जी की पूजा करते हैं। उन्होंने कहा कि थाईलैंड में भगवान गणेश को ‘फ्रा फिकानेट’ के रूप में पूजा जाता है।पीएम मोदी ने बताया कि श्रीमान पंथौन थिरखानोन पिछले चार दशकों से अधिक समय से भगवान गणेश की भक्ति और उनसे जुड़ी परंपराओं का अध्ययन कर रहे हैं। उनकी आस्था की शुरुआत उस समय हुई जब वे 19 साल के थे और उनके पिता ने उन्हें भगवान गणेश की एक तस्वीर उपहार में दी थी।प्रधानमंत्री ने कहा कि उस तस्वीर ने उनके मन में भगवान गणेश के प्रति गहरी श्रद्धा पैदा की। इसके बाद उन्होंने गणेश जी से जुड़ी परंपराओं, संस्कृति और आध्यात्मिक पहलुओं का लंबे समय तक अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण बताता है कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का प्रभाव दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। दुनिया के कई देशों में भारतीय त्योहारों, देवी-देवताओं और आध्यात्मिक विचारों के प्रति लोगों की रुचि और सम्मान देखने को मिलता है।गणेश उत्सव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक भावनाओं को मजबूत करने का अवसर भी देता है। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभ शुरुआत से जोड़ा जाता है।
श्रीमान पंथौन थिरखानोन की कहानी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी संस्कृति की ताकत उसकी परंपराओं और लोगों की आस्था में होती है। जब लोग किसी संस्कृति को समझते और अपनाते हैं तो वह संस्कृति वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाती है।पीएम मोदी ने भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं की चर्चा करते हुए कहा कि देश की कला, परंपराएं और आध्यात्मिक विरासत लगातार दुनिया में अपनी जगह बना रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं।
थाईलैंड में भगवान गणेश की पूजा को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि वहां गणेश जी को विशेष सम्मान दिया जाता है। ‘फ्रा फिकानेट’ के रूप में भगवान गणेश की पूजा की जाती है और बड़ी संख्या में लोग उनसे जुड़ी परंपराओं को मानते हैं।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की यही विशेषता है कि यह अलग-अलग देशों और समाजों के लोगों को जोड़ने का काम करती है। संस्कृति और आस्था के माध्यम से देशों के बीच आपसी समझ और संबंध भी मजबूत होते हैं।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि भारत के त्योहारों और परंपराओं में लोगों को जोड़ने की क्षमता है। गणेश उत्सव जैसे पर्व समाज में एकता, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देते हैं।
‘मन की बात’ के इस एपिसोड में प्रधानमंत्री ने भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रभाव को सामने रखते हुए थाईलैंड के एक भक्त की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि किस तरह एक व्यक्ति की आस्था चार दशक से अधिक समय तक भगवान गणेश की परंपराओं के अध्ययन और भक्ति से जुड़ी रही।प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे उदाहरण भारत की सांस्कृतिक विरासत की व्यापकता को दिखाते हैं। भारतीय परंपराओं और आध्यात्मिक विचारों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सम्मान मिलना देश के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति में समावेशिता और विविधता की विशेष भूमिका है। यही कारण है कि भारतीय परंपराएं अलग-अलग देशों के लोगों को आकर्षित करती हैं और उन्हें जोड़ने का काम करती हैं।कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में भगवान गणेश की भक्ति और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने थाईलैंड के श्रीमान पंथौन थिरखानोन की कहानी साझा करते हुए बताया कि कैसे गणेश भक्ति भारत से बाहर भी लोगों के जीवन का हिस्सा बनी हुई है। प्रधानमंत्री ने भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की वैश्विक पहचान और उनके महत्व को रेखांकित किया।
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