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बैंक घोटाले में फंसे पैराग्वे के राष्ट्रपति, महाभियोग के बाद नजरबंद

Ratna Netam
7 Nov 2026 5:23 PM IST
बैंक घोटाले में फंसे पैराग्वे के राष्ट्रपति, महाभियोग के बाद नजरबंद
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असुनसियोन। दक्षिण अमेरिकी देश पैराग्वे में बड़े बैंकिंग संकट ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है। देश के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को महाभियोग के जरिए पद से हटा दिया गया है। इसके कुछ ही समय बाद उन्हें नजरबंद करने का आदेश भी जारी कर दिया गया। यह कार्रवाई डिजिटल बैंक यूएनो (Ueno Bank) के वित्तीय संकट और उससे जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में हुई है। बैंक के खातों में जमा धनराशि तक लाखों लोगों की पहुंच रुकने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। बढ़ते जनाक्रोश और राजनीतिक दबाव के बीच संसद ने राष्ट्रपति को पद से हटाने का फैसला लिया।शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को पैराग्वे की सीनेट में महाभियोग की कार्यवाही पूरी हुई। मतदान में उपस्थित सभी 44 सीनेटरों ने पेना को पद से हटाने के पक्ष में वोट दिया। इसके बाद उपराष्ट्रपति पेड्रो अलियाना ने देश के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। उन्हें अगस्त 2028 तक शेष राष्ट्रपति कार्यकाल पूरा करना है।
महाभियोग के तुरंत बाद नजरबंदी
सैंटियागो पेना को राष्ट्रपति पद से हटाए जाने के कुछ ही समय बाद अभियोजन अधिकारियों ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। उन्हें राजधानी असुनसियोन स्थित अपने आवास पर नजरबंद रहने का आदेश दिया गया।पेना के खिलाफ विश्वासघात, प्रभाव का दुरुपयोग और सार्वजनिक पद का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, उन्हें आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार से संबंधित जांच प्रक्रिया में उपस्थित होना है।नजरबंदी के आदेश के बाद पुलिसकर्मियों को उनके आवास के बाहर तैनात किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारी भी वहां एकत्र हुए और बैंकिंग संकट के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे।हालांकि, पेना ने अपने खिलाफ लगाए गए गलत काम करने के आरोपों से इनकार किया है। उनके खिलाफ जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला नहीं आया है।
यूएनो बैंक के संकट से लाखों लोग प्रभावित
पैराग्वे में राजनीतिक संकट की शुरुआत यूएनो बैंक की गंभीर वित्तीय समस्याओं के सामने आने के बाद हुई। देश के केंद्रीय बैंक ने वित्तीय स्थिति कमजोर होने और आवश्यक पूंजी संबंधी मानकों का पालन नहीं होने के कारण इस डिजिटल बैंक में हस्तक्षेप किया।यूएनो बैंक के लगभग 29.4 लाख ग्राहक बताए गए हैं। बैंक की सेवाएं प्रभावित होने से बड़ी संख्या में लोग अपने खातों से पैसे नहीं निकाल पा रहे थे।इस संकट का असर सामान्य नागरिकों के साथ पेंशनभोगियों, कर्मचारियों और छोटे कारोबारियों पर भी पड़ा। लोगों के सामने रोजमर्रा के खर्च पूरे करने की समस्या खड़ी हो गई।बैंकिंग संकट के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी जमा पूंजी वापस दिलाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
सरकारी धन के इस्तेमाल पर उठे गंभीर सवाल
यूएनो बैंक के तेजी से विस्तार और उसमें सार्वजनिक धन जमा किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, बैंक में सरकारी संस्थानों और पेंशन कोष से जुड़ी लगभग 80 करोड़ डॉलर से अधिक की राशि जमा थी।जांच के केंद्र में यह आरोप भी है कि पेना के राजनीतिक प्रभाव के कारण बैंक को अनुचित लाभ मिला और वित्तीय जोखिमों की पर्याप्त निगरानी नहीं की गई।पेना का बैंक से जुड़े कारोबारी समूह में पहले निवेश रहा था। उन्होंने 2025 में अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी। हालांकि, जांच एजेंसियां उनके पुराने कारोबारी संबंधों और राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों की पड़ताल कर रही हैं।बैंक के पूर्व अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। केंद्रीय बैंक के पूर्व प्रमुख कार्लोस कार्वालो के खिलाफ भी गिरफ्तारी का आदेश जारी किया गया है।
इस्तीफे की पेशकश के बाद भी चला महाभियोग
बैंकिंग संकट गहराने के बाद सैंटियागो पेना ने गुरुवार को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। हालांकि, संसद में आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हो सका।इसके बाद सीनेट ने महाभियोग की कार्यवाही जारी रखी। शुक्रवार को मतदान के बाद उन्हें राष्ट्रपति पद से हटा दिया गया।पैराग्वे के संविधान के तहत पूर्व राष्ट्रपतियों को कुछ विशेष संसदीय अधिकार प्राप्त होते हैं, लेकिन महाभियोग के जरिए पद से हटाए गए राष्ट्रपति के मामले में अलग प्रावधान लागू होते हैं।इस घटनाक्रम ने पैराग्वे की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। पेना की अपनी राजनीतिक पार्टी के भीतर भी बैंकिंग संकट को लेकर मतभेद सामने आए थे।
नए राष्ट्रपति ने दिया जमा राशि लौटाने का भरोसा
पेना को हटाए जाने के बाद पेड्रो अलियाना ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली। अपने पहले संबोधन में उन्होंने बैंकिंग संकट से प्रभावित नागरिकों को उनकी जमा राशि वापस दिलाने का भरोसा दिया।अलियाना ने कहा कि वित्तीय संकट के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे लोगों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।केंद्रीय बैंक की ओर से छोटे जमाकर्ताओं को भुगतान की प्रक्रिया शुरू की गई है। शुरुआती चरण में सीमित राशि वाले पात्र खाताधारकों को प्राथमिकता दी जा रही है।हालांकि, सभी प्रभावित लोगों को उनकी पूरी रकम कब तक वापस मिलेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
बैंकिंग संकट से अर्थव्यवस्था पर भी असर
यूएनो बैंक का संकट केवल बैंक खाताधारकों तक सीमित नहीं रहा। इससे कारोबार, परिवहन सेवाओं और वित्तीय बाजारों पर भी असर पड़ा है।जिन कंपनियों और कर्मचारियों का लेनदेन बैंक के माध्यम से होता था, उन्हें भुगतान संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सरकारी संस्थानों की जमा राशि फंसने से सार्वजनिक धन की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हुए।वित्तीय संकट के कारण बैंकिंग नियामकों की निगरानी व्यवस्था और सार्वजनिक धन के निवेश संबंधी फैसलों की समीक्षा की मांग बढ़ी है।
पेना के खिलाफ जांच पर टिकी नजर
पैराग्वे में राष्ट्रपति को महाभियोग से हटाए जाने और नजरबंद किए जाने की घटना ने देश की राजनीति को नए मोड़ पर ला दिया है।अब जांच एजेंसियों के सामने बैंकिंग संकट से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच करने और जिम्मेदारी तय करने की चुनौती है। वहीं, नई सरकार के सामने जमाकर्ताओं का भरोसा बहाल करना और वित्तीय व्यवस्था को स्थिर बनाना प्राथमिक जिम्मेदारी होगीसैंटियागो पेना के खिलाफ आरोपों की कानूनी जांच अभी जारी है। ऐसे में उनके खिलाफ आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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