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Pandora Paper leaks: दुनिया के अमीर और शक्तिशाली लोग छिपाते हैं अपनी अकूत दौलत

Nidhi Singh
5 Oct 2021 7:10 AM GMT
Pandora Paper leaks: दुनिया के अमीर और शक्तिशाली लोग छिपाते हैं अपनी अकूत दौलत
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ICIJ की रिपोर्ट रविवार को आई है और इसमें 177 देशों के 150 मीडिया आउटलेट्स के 600 जर्नलिस्‍ट्स को शामिल किया गया था.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। सोमवार को सामने आए पंडोरा पेपर लीक्‍स (Pandora Paper Leaks) ने दुनिया की एक ऐसी सच्‍चाई सामने लाकर रख दी है, जिस पर यकीन करना कई लोगों को मुश्किल हो रहा है. भारत और पाकिस्‍तान के अलावा रूस से लेकर अमेरिका तक के अमीरों की उस छिपी हुई दौलत के बारे में पता चला है, जिसके बारे में शायद ही किसी को अंदाजा रहा होगा.

पंडोरा पेपर लीक्‍स ने बताया है कि कैसे अमीर लोग टैक्‍स कलेक्‍टर्स से अपनी रकम को छिपाते हैं. अमेरिका में अब मांग उठने लगी है कि वित्‍त सचिव को उनके पद से हटाया जाए क्‍योंकि उन्‍होंने ही देश के सबसे अमीर और शक्तिशाली लोगों को पैसा छिपाने की मंजूरी दी. International Consortium of Investigative Journalists (ICIJ) की रिपोर्ट वर्ल्‍ड लीडर्स से लेकर दुनिया के अरबपतियों का काला सच सामने लाकर रखती है.
नकली कंपनियों से पहुंचाया जाता है फायदा
ICIJ की रिपोर्ट रविवार को आई है और इसमें 177 देशों के 150 मीडिया आउटलेट्स के 600 जर्नलिस्‍ट्स को शामिल किया गया था. साथ ही 14 कंपनियों के करीब 12 मिलियन फाइल्‍स को स्‍टडी किया गया था. वॉशिंगटन स्थित टैक्‍सेशन एंड इकोनॉमिक पॉलिसी से जुड़े इंस्‍टीट्यूट के डायरेक्‍टर स्‍टीव वैमहॉफ ने बताया कि पंडोरा पेपर्स दरअसल इस बारे में पूरी जानकारी विस्‍तार से देते हैं कि सीक्रेट देशों में लोग कैसे टैक्‍स चोरी के लक्ष्‍य के साथ अपनी दौलत को छिपाते हैं.
इन कंपनियों की टैक्‍स चोरी भी कानून के दायरे में आ जाती है. बार्केले स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में इकोनॉमिस्‍ट गैब्रियल जुकमैन ने बताया कि शेल कंपनियों यानी नकली कंपनियाकें को तैयार करके ऐसे कॉरपोरेट हाउस जिनका कोई आर्थिक वजूद नहीं है और जिनका एकमात्र लक्ष्‍य टैक्‍स से बचना है, उन्‍हें इसमें फायदा पहुंचाया जाता है.
ऐसे खरीदी जाती हैं प्रॉपर्टीज
इन डॉक्‍यूमेंट्स से पता लगता है कि ताकतवर लोग गुमनाम शेल कंपनियों, ट्रस्‍ट्स और दूसरी अथॉरिटीज की मदद से अपना पैसा दूसरे देशों में भेजते हैं. नकली या Shell कंपनियां टैक्‍स से बचने का सबसे बड़ा सहारा हैं. इन कंपनियों को जटिल नेटवर्क में छिपाया जाता है और साथ ही जिन मालिकों को संपत्ति से फायदा पहुंचाया जा रहा है, उनकी पहचान भी छिपाई जाती है. जबकि दूसरे लोगों के नाम रजिस्‍ट्रेशन डॉक्‍यूमेंट्स में दर्ज होते हैं.
रिपार्ट की मानें तो उदाहरण के लिए एक ऑफशोर कंपनी जिसकी मदद से मोनाको में एक महिला के लिए 4 मिलियन डॉलर का अपार्टमेंट लिया गया, उसका रिश्‍ता रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादीमिर पुतिन के साथ है. फायदा हासिल करने वाले मालिक को अपने देश में भले ही टैक्‍स अदा करना हो मगर अथॉरिटीज के लिए ऑफशोर अकाउंट का पता लगा पाना बहुत ही मुश्किल होता है.


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