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Washington वॉशिंगटन। पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में अपने कथित कठोर एजेंडे को छिपाने के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहा है। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। वॉशिंगटन स्थित ग्लोबल स्ट्रैट व्यू के लिए लिखते हुए सेंगे सेरिंग ने कहा कि पाकिस्तान धर्म को “धुएं के पर्दे” की तरह इस्तेमाल कर रहा है, ताकि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाने और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने की अपनी नीतियों को छिपा सके।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ईरान और अरब देशों के बीच पूर्ण युद्ध होता है, तो पाकिस्तान में शिया समुदाय की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों के लिए “टू-नेशन थ्योरी” की बेड़ियों से मुक्त होकर भारत के साथ जुड़ना एक सम्मानजनक विकल्प हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, कराकोरम हाईवे पर इस साल यातायात बाधाएं केवल बर्फबारी या भूस्खलन के कारण ही नहीं होंगी, बल्कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव का भी असर दिखेगा। हालात उस घटना के बाद और बिगड़े, जब अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद गिलगित और स्कर्दू में हिंसा भड़क गई।
बताया गया है कि 1 मार्च को पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें 18 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल थे। इसके बाद हालात काबू करने के लिए कर्फ्यू लगाया गया। अधिकारियों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने दो सैनिकों की हत्या की और सेना से जुड़े कई ढांचों को आग के हवाले कर दिया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की कानून-व्यवस्था एजेंसियां पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में दर्जनों लोगों की तलाश और गिरफ्तारी में जुटी हैं, जिन पर “ईरान समर्थित” धार्मिक नेटवर्क से जुड़े होने का शक है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस रात में लोगों के घरों पर छापेमारी कर रही है और रमजान के दौरान भी हिरासत में लिए गए लोगों को गुप्त हिरासत केंद्रों में रखा जा रहा है। जो भी व्यक्ति सरकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाता है या लोगों को संगठित करने की क्षमता रखता है, वह निशाने पर है।
गिरफ्तार किए गए लोगों में एडवोकेट एहसान अली, इंजीनियर महबूब, एडवोकेट नफीस, फिदा इसार, तारुफ अब्बास, शेख यूसुफ, नजर काज़मी और शब्बीर मयार जैसे राजनीतिक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के ये कदम बढ़ते आंतरिक असंतोष को नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे हैं, जबकि अमेरिका और सऊदी अरब को उम्मीद है कि पाकिस्तानी सेना ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य अभियानों में सहयोग करेगी।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तानी सेना अपने पश्चिमी और अरब सहयोगियों को खुफिया और विश्लेषणात्मक समर्थन दे रही है, साथ ही मीडिया के जरिए जनमत को प्रभावित कर ईरान के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।
मीडिया पर आरोप है कि वह भारत-ईरान संबंधों को लेकर ईरान को खलनायक के रूप में पेश कर रहा है और घरेलू स्तर पर हिंदू विरोधी भावनाओं का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि अपने रणनीतिक हितों को साधा जा सके।
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