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70 लाख का इनाम टाइमिंग पर उठे सवाल
इस्लामाबाद: फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की आगामी बैठक से पहले पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के संस्थापक मसूद अजहर के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने अजहर को अपनी 'रेड बुक' में मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की सूची में शामिल करते हुए उसकी गिरफ्तारी में मददगार सूचना देने वाले के लिए 70 लाख पाकिस्तानी रुपये के इनाम की घोषणा की है। रिपोर्टों के मुताबिक यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब FATF पाकिस्तान के आतंकवाद-रोधी और टेरर फाइनेंसिंग से जुड़े प्रयासों की समीक्षा करने वाला है।
मसूद अजहर संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध वैश्विक आतंकवादी है और जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक अजहर ने 1999 में भारतीय जेल से रिहा होने के बाद JeM की स्थापना की थी। संयुक्त राष्ट्र ने मई 2019 में उसे प्रतिबंधित आतंकवादी की सूची में शामिल किया था।
FIA की रेड बुक में मसूद अजहर
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की FIA ने अपनी अपडेटेड रेड बुक में मसूद अजहर का नाम शामिल किया है। उसके बारे में सूचना देने पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम रखा गया है। हालांकि भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत 70 लाख रुपये नहीं होती, इसलिए हिंदी हेडिंग में केवल '₹70 लाख' लिखना भ्रामक हो सकता है। इसे '70 लाख पाकिस्तानी रुपये' लिखना अधिक सटीक है।
पाकिस्तान का यह कदम अजहर के ठिकाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आया है। इस महीने पाकिस्तान की ओर से अजहर के अफगानिस्तान में होने के दावे सामने आए थे।
अफगानिस्तान ने खारिज किया पाकिस्तान का दावा
तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के इस दावे को खारिज किया है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में मौजूद है। अफगान विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अजहर अफगानिस्तान में नहीं है। इस बयान के बाद उसके वास्तविक ठिकाने को लेकर पाकिस्तान पर नए सवाल खड़े हुए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का समय भी महत्वपूर्ण है क्योंकि FATF की आगामी समीक्षा से पहले आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ पाकिस्तान के कदमों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।
भारत के लिए क्यों अहम है मसूद अजहर?
मसूद अजहर लंबे समय से भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण नाम रहा है। जैश-ए-मोहम्मद को भारत में हुए कई बड़े आतंकवादी हमलों से जोड़ा गया है। अजहर को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल कराने के लिए भारत ने लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किए थे।
संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल होने के कारण अजहर पर संपत्ति फ्रीज, यात्रा प्रतिबंध और हथियारों से संबंधित प्रतिबंध लागू होते हैं।
FATF बैठक से पहले कदम पर नजर
FATF दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ देशों की व्यवस्थाओं का आकलन करने वाला अंतर-सरकारी संगठन है। पाकिस्तान जून 2026 की FATF सार्वजनिक निगरानी सूचियों में शामिल नहीं था, लेकिन आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ उसके कदम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय निगरानी का विषय रहे हैं।
ऐसे में FATF की आगामी बैठक से ठीक पहले मसूद अजहर को मोस्ट वांटेड सूची में डालना और उस पर इनाम घोषित करना महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पाकिस्तान अजहर की गिरफ्तारी की दिशा में क्या ठोस कदम उठाता है।
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