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Islamabad इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कैथोलिक बिशपों के एक प्रतिनिधिमंडल ने वेटिकन में पोप लियो XIV से मुलाकात कर देश में ईसाई समुदाय के सामने मौजूद चुनौतियों और भेदभाव के मुद्दों को उठाया। प्रतिनिधिमंडल में तीन आर्चबिशप, चार बिशप और एक कार्डिनल शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान काथलिक धर्माध्यक्ष सम्मेलन के अध्यक्ष और हैदराबाद के बिशप सैमसन शुकार्डिन ने पोप को पाकिस्तान में ईसाइयों की स्थिति से अवगत कराया।
उन्होंने कथित तौर पर ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग, संस्थागत भेदभाव तथा ईसाई समुदाय की युवा लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। शुकार्डिन ने कहा कि पाकिस्तान में ईसाइयों को समान अधिकार नहीं मिल रहे हैं और उन्हें सामाजिक व प्रशासनिक स्तर पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। बैठक के दौरान बिशपों ने पोप लियो चतुर्दश को पाकिस्तान आने का निमंत्रण भी दिया। हालांकि वेटिकन की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक यात्रा की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक पोप ने भविष्य में पाकिस्तान दौरे की इच्छा व्यक्त की और प्रतिनिधिमंडल को इस संबंध में सकारात्मक आश्वासन दिया।
इस बीच, पिछले सप्ताह कई अल्पसंख्यक अधिकार संगठनों ने पाकिस्तान की संघीय सरकार से प्रस्तावित 28वें संविधान संशोधन विधेयक के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए संवैधानिक सुधारों की मांग की थी। इस्लामाबाद में आयोजित एक प्रेस वार्ता में अल्पसंख्यक गठबंधन पाकिस्तान और अन्य संगठनों के नेताओं ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व, धार्मिक स्वतंत्रता और बाल संरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव रखा।
एमएपी के अध्यक्ष अकमल भट्टी ने कहा कि मौजूदा संवैधानिक प्रावधान गैर-मुस्लिम नागरिकों को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष पदों तक पहुंचने से रोकते हैं, जबकि अल्पसंख्यकों को प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व भी नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य कानून के समक्ष समानता और सभी नागरिकों के लिए बराबर अवसर सुनिश्चित करना है। साथ ही बच्चों को जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह जैसी प्रथाओं से बचाने के लिए संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता है।
प्रस्तावों में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने की मांग की गई है। इसके तहत किसी भी धर्म परिवर्तन को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष स्वतंत्र और सूचित सहमति दर्ज होने तक मान्यता न देने का सुझाव दिया गया है। अकमल भट्टी ने संविधान के अनुच्छेद 51 और 106 में संशोधन कर राष्ट्रीय विधानसभा और प्रांतीय विधानसभाओं में गैर-मुस्लिमों तथा महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव कराने की भी मांग की। उन्होंने संसदीय संवैधानिक सुधार समिति से अंतिम संशोधन पैकेज तैयार करने से पहले अल्पसंख्यक समुदायों, कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक समाज संगठनों के साथ व्यापक परामर्श करने का आग्रह किया।
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