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भारत-इजरायल की दोस्ती से पाकिस्तान बेचैन! मुनीर पर बड़ा खुलासा

nidhi
4 Nov 2026 6:57 AM IST
भारत-इजरायल की दोस्ती से पाकिस्तान बेचैन! मुनीर पर बड़ा खुलासा
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आसिम मुनीर का कथित बयान चर्चा में

तेहरान/इस्लामाबाद: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को लेकर ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के दावे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने दावा किया है कि आसिम मुनीर ने हिंदुओं और यहूदियों के बीच बढ़ते संबंधों को पाकिस्तान और व्यापक मुस्लिम दुनिया के लिए खतरा बताया था। रेजाई के अनुसार, मुनीर ने यह बात 26 अक्टूबर को ईरान की राजधानी तेहरान में आयोजित चार देशों की एक महत्वपूर्ण सुरक्षा बैठक के दौरान कही थी। हालांकि, इस कथित बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसे फिलहाल ईरानी अधिकारी का दावा ही माना जा रहा है। ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने 31 अक्टूबर को ईरानी सरकारी प्रसारक को दिए एक साक्षात्कार में इस बैठक से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि बैठक में पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। इस दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, इजरायल की भूमिका और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। रेजाई ने दावा किया कि आसिम मुनीर ने भारत और इजरायल के बीच मजबूत होते संबंधों को लेकर चिंता जताई थी।

बताया जा रहा है कि 26 अक्टूबर को आयोजित इस बैठक में पाकिस्तान की ओर से आसिम मुनीर, तुर्की की ओर से खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन, सऊदी अरब की ओर से रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और ईरान की ओर से मोहसिन रेजाई शामिल हुए थे। यह बैठक ऐसे समय में हुई, जब पश्चिम एशिया में सैन्य और कूटनीतिक तनाव बना हुआ था। चारों देशों के प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और संभावित खतरों को लेकर अपने विचार रखे।
रेजाई के मुताबिक, बैठक में इजरायल की सैन्य गतिविधियों और भविष्य की रणनीति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। उनका दावा है कि सऊदी अरब और तुर्की के प्रतिनिधियों ने भी इजरायल से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा की। इसी दौरान आसिम मुनीर ने कथित तौर पर हिंदुओं और यहूदियों के बीच बढ़ते संबंधों का उल्लेख किया और उन्हें पाकिस्तान तथा मुस्लिम देशों के लिए चुनौती बताया।
इस बयान को लेकर पाकिस्तानी मीडिया में भी चर्चा शुरू हो गई है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी ने अपने एक कार्यक्रम में रेजाई के दावे का जिक्र किया। सेठी के अनुसार, मुनीर ने कथित तौर पर हिंदू-यहूदी गठजोड़ को पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा बताया था। उन्होंने इसे मुस्लिम देशों और पाकिस्तान के खिलाफ उभरती भू-राजनीतिक एकजुटता के संदर्भ में प्रस्तुत किया। हालांकि, ये बातें मुनीर के किसी सार्वजनिक भाषण या आधिकारिक बयान के बजाय अन्य लोगों द्वारा साझा किए गए विवरणों पर आधारित हैं। इस पूरे घटनाक्रम को भारत और इजरायल के बीच लगातार मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा, खुफिया सहयोग, आतंकवाद विरोधी प्रयासों, कृषि, व्यापार, जल प्रबंधन और आधुनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग विकसित हुआ है। हाल के वर्षों में यह साझेदारी केवल रक्षा खरीद तक सीमित नहीं रही, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में भी आगे बढ़ी है।
फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिए जाने की खबर सामने आई थी। इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा दी। भारत और इजरायल के बढ़ते संबंधों को दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की बदलती कूटनीतिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान भी इजरायल ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया था। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई को लेकर समर्थन जताया था। इसके बाद दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को लेकर पाकिस्तान में चर्चा बढ़ी थी।
आसिम मुनीर इससे पहले भी हिंदुओं और मुसलमानों के बीच धार्मिक तथा सांस्कृतिक अंतर को लेकर बयान दे चुके हैं। अप्रैल 2025 में उन्होंने पाकिस्तान की दो-राष्ट्र सिद्धांत वाली विचारधारा का उल्लेख करते हुए दोनों समुदायों के धर्म, परंपराओं और सामाजिक मान्यताओं में अंतर की बात कही थी। उनके इन बयानों पर भारत में भी प्रतिक्रिया सामने आई थी। विश्लेषकों के अनुसार, ईरानी अधिकारी का ताजा दावा यदि सही साबित होता है तो यह पाकिस्तान की सुरक्षा संबंधी सोच और भारत-इजरायल साझेदारी को लेकर उसकी चिंताओं को उजागर कर सकता है। हालांकि, भारत और इजरायल के बीच आधिकारिक द्विपक्षीय संबंधों को पूरे हिंदू और यहूदी समुदायों के बीच किसी धार्मिक गठबंधन के समान मानना उचित नहीं होगा। दोनों देशों की साझेदारी मुख्य रूप से राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर आधारित है।
इस बीच पाकिस्तान पश्चिम एशिया में कूटनीतिक मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास भी कर रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशों में आसिम मुनीर की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की 30 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की सेना ने ईरान-अमेरिका मध्यस्थता को लेकर सतर्क आशावाद व्यक्त किया था। पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों ने क्षेत्रीय तनाव कम करने के प्रयास जारी रहने की बात कही थी। आसिम मुनीर ने अक्टूबर में कई बार तेहरान का दौरा किया। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने ईरानी नेतृत्व और सुरक्षा अधिकारियों से बातचीत की। इन मुलाकातों का प्रमुख उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और संबंधित देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाना बताया गया।
ईरान के अधिकारी मोहसिन रेजाई के दावे के सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में भारत और इजरायल के बढ़ते रणनीतिक सहयोग को अपनी सुरक्षा के लिए चुनौती मानता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि रेजाई ने जिन बातों का उल्लेख किया है, वे कथित तौर पर बंद कमरे में हुई राजनयिक बातचीत से संबंधित हैं।
फिलहाल आसिम मुनीर के नाम से सामने आए हिंदू-यहूदी संबंधों वाले कथित बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे पाकिस्तान की आधिकारिक नीति या मुनीर के प्रमाणित बयान के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद ईरानी अधिकारी के दावे ने भारत, पाकिस्तान, इजरायल और पश्चिम एशिया की बदलती रणनीतिक परिस्थितियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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