
वर्ल्ड | पाकिस्तान में सियासी और सैन्य संकट गहराता जा रहा है। सेना के भीतर गुटबाजी और असंतोष की खबरों ने शहबाज शरीफ सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, कई सेना अधिकारियों ने मौजूदा सैन्य नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है और सेनाध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की जा रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब देश आर्थिक तंगी, राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते आतंकवाद से जूझ रहा है।
सेना में असंतोष क्यों?
पाकिस्तानी सेना को देश की सबसे प्रभावशाली संस्था माना जाता है, लेकिन हाल के महीनों में इसके अंदर दरारें गहरी होती दिख रही हैं। इसकी मुख्य वजहें ये हैं –
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राजनीतिक दखल: सेना पर आरोप है कि उसने राजनीतिक मामलों में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप किया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार गिराने और शहबाज शरीफ को सत्ता में लाने में सेना की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं।
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आर्थिक संकट: पाकिस्तान की बिगड़ती अर्थव्यवस्था ने आम जनता और सेना के निचले स्तर तक के अधिकारियों को परेशान कर रखा है। सैन्य अधिकारियों को मिल रही सुविधाओं और वेतन में कटौती के कारण भी असंतोष बढ़ा है।
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अफगान सीमा पर हालात: अफगानिस्तान से सटी सीमा पर लगातार हो रहे संघर्षों और बढ़ते आतंकवादी हमलों ने सेना की क्षमताओं और नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं।
शहबाज सरकार के लिए खतरा बढ़ा
सूत्रों के अनुसार, सेना में बढ़ती फूट का सीधा असर शहबाज शरीफ सरकार पर पड़ सकता है। पाकिस्तान में सरकारों का बनना और गिरना काफी हद तक सेना की मर्जी पर निर्भर करता है। इतिहास गवाह है कि जो भी सरकार सेना के समर्थन से बाहर होती है, वह ज्यादा समय तक टिक नहीं पाती।
शहबाज शरीफ सरकार पहले ही आर्थिक संकट, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय कर्ज के दबाव से जूझ रही है। अब सेना में उभरते विरोध ने उनके लिए और मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अगर यह असंतोष गहराता है, तो सरकार का राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
सेना और सरकार की प्रतिक्रिया
अब तक सेना की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक आंतरिक बैठकों का दौर जारी है।
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सरकार ने इन खबरों को अफवाह करार दिया है और दावा किया कि सेना और सरकार के बीच कोई मतभेद नहीं है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सेना में यह दरार और गहरी हुई, तो पाकिस्तान में सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।
आगे क्या?
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यदि सैन्य असंतोष बढ़ता है, तो यह शहबाज सरकार के लिए गंभीर संकट बन सकता है।
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यदि सेना में गुटबाजी खुलकर सामने आती है, तो पाकिस्तान में एक और राजनीतिक उथल-पुथल की शुरुआत हो सकती है।
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अगर सेनाध्यक्ष पर दबाव बढ़ता है, तो उनके इस्तीफे की संभावनाओं को भी नकारा नहीं जा सकता।
पाकिस्तान इस समय राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह लड़खड़ा रहा है। अगर सैन्य असंतोष बढ़ता है, तो इसका असर देश की आंतरिक सुरक्षा, विदेश नीति और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी पड़ेगा। आने वाले दिन पाकिस्तान के लिए कठिन साबित हो सकते हैं।





