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Islamabad इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में दशकों से चली आ रही उपेक्षा अब गंभीर नागरिक संकट का रूप ले चुकी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र पिछले दो दशकों से बिना स्थानीय निकायों के संचालित हो रहा है, जिससे विकास की रफ्तार बेहद धीमी पड़ी है और आम लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की लंबे समय से अनदेखी के कारण पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में पर्याप्त अस्पताल, कामकाजी लैब, जीवनरक्षक उपकरण और डॉक्टरों की भारी कमी है। इलाज के लिए लोगों को अक्सर 'डाउन कंट्री' यानी दूर-दराज के शहरों में जाना पड़ता है, जिससे उनके आर्थिक हालात पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
कराची के आईबीए स्थित सेंटर फॉर बिजनेस एंड इकोनॉमिक रिसर्च के फेलो और असिस्टेंट प्रोफेसर साजिद अहमद ने पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन में लिखा कि कई इलाकों में आज भी बिजली, साफ पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं दुर्लभ हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सीमित बजट और तमाम चुनौतियों के बावजूद पाक-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में नए जिलों के गठन पर जोर देना समझ से परे है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ ऐसे क्षेत्रों में भी जिले बनाए गए हैं जहां आबादी 50 हजार से कम है। इससे पहले से ही सीमित बजट पर और दबाव बढ़ गया है। नतीजतन, क्षेत्र में विकास कार्यों की बजाय वेतन पर खर्च ज्यादा हो रहा है, जो संतुलन के उलट है।
इस साल घिजर, गांचे, स्कार्दू समेत कई इलाकों में अभूतपूर्व बाढ़ आई, जिससे बड़ी संख्या में लोग आजीविका से वंचित हो गए। बीते पांच वर्षों में पाक-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान शासन से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़े विरोध-प्रदर्शन और लंबे धरने भी देखे गए। ये प्रदर्शन मुख्य रूप से गेहूं सब्सिडी खत्म करने और कर लगाने के पाकिस्तान सरकार के प्रयासों के खिलाफ थे। नागरिक समाज, राजनीतिक और धार्मिक संगठनों ने 2025 के पाक-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान भूमि सुधार अधिनियम की तीखी आलोचना की और अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा की।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि संघीय करों के खिलाफ स्थानीय व्यापारियों और व्यवसायियों ने सोस्त ड्राई पोर्ट पर लगभग दो महीने का सबसे लंबा धरना दिया। इसके बाद सरकार ने स्थानीय खपत के लिए चार अरब रुपये तक के आयात को संघीय करों से छूट देने का फैसला किया। 2025 में बढ़ते असंतोष के बीच पुलिसकर्मी भी देरी से मिलने वाले भत्तों के विरोध में सड़कों पर उतरे। संवाद की बजाय प्रशासन की सख्त कार्रवाई ने तनाव और बढ़ा। अगस्त के मध्य में महिला कांस्टेबलों समेत सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने क्षेत्रीय प्राधिकरण के आवास के बाहर रातभर धरना दिया, जिससे हालात और बिगड़ गए।
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