विश्व
भुखमरी से जूझ रहा पाकिस्तान वैश्विक रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
Ratna Netam
15 Oct 2026 6:19 PM IST

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में आर्थिक अस्थिरता, बढ़ती खाद्य कीमतों और जलवायु संबंधी आपदाओं के बीच भुखमरी और खाद्य असुरक्षा की स्थिति गंभीर बनी हुई है। बुधवार, 14 अक्टूबर को जारी वैश्विक भूख सूचकांक (Global Hunger Index) 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने दक्षिण एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में महंगाई, बाढ़, कृषि उत्पादन को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के कारण लोगों के लिए पर्याप्त तथा पौष्टिक भोजन जुटाना मुश्किल होता जा रहा है।पाकिस्तान का ग्लोबल हंगर इंडेक्स स्कोर 25.5 दर्ज किया गया है, जिसे गंभीर श्रेणी में रखा गया है। दक्षिण एशिया का क्षेत्रीय स्कोर 23.5 है, जबकि वैश्विक स्कोर 18.1 दर्ज किया गया है। सूचकांक में अधिक स्कोर भूख की अधिक गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
दक्षिण एशिया में पाकिस्तान की स्थिति सबसे खराब
वेल्थहंगरहिल्फे, रूर विश्वविद्यालय बोखुम के अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सशस्त्र संघर्ष कानून संस्थान और स्विस संगठन हेलवेटस ने संयुक्त रूप से यह रिपोर्ट तैयार की है।इस वर्ष रिपोर्ट का विषय 'खाद्य सुरक्षा के बिना कोई सुरक्षा नहीं' रखा गया है।रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया में भूख को कम करने की दिशा में हुई प्रगति पिछले कुछ वर्षों से लगभग ठहर गई है। विशेष रूप से पाकिस्तान और अफगानिस्तान में वर्ष 2018 के बाद खाद्य सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ी हैं।हालांकि, वर्ष 2000 के मुकाबले दक्षिण एशिया की स्थिति में सुधार हुआ है। उस समय क्षेत्रीय भूख सूचकांक 37.5 था, जो अब घटकर 23.5 रह गया है।
महंगाई ने गरीब परिवारों की बढ़ाई मुश्किलें
रिपोर्ट में पाकिस्तान की खाद्य असुरक्षा के पीछे आर्थिक अस्थिरता को प्रमुख कारण बताया गया है।लगातार बढ़ती खाद्य कीमतों ने आम परिवारों की क्रय शक्ति को प्रभावित किया है। इससे गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक भोजन खरीदना कठिन हो रहा है।रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में अल्पपोषण की स्थिति वर्ष 2018 की निम्न श्रेणी से बढ़कर मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।इसके साथ ही बच्चों में गंभीर कुपोषण से जुड़ा चाइल्ड वेस्टिंग संकेतक भी उच्च स्तर की ओर बढ़ रहा है।
बाढ़ और भारी बारिश से कृषि को नुकसान
पाकिस्तान में खाद्य संकट को बढ़ाने में जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश तथा बाढ़ के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा है।कृषि उत्पादन प्रभावित होने से खाद्यान्न की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।वहीं, अफगानिस्तान में सामान्य से कम वर्षा और अधिक तापमान के कारण 2026 के अनाज उत्पादन का मौसम प्रभावित हुआ।इन परिस्थितियों ने दक्षिण एशिया में खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को और गंभीर बना दिया है।
बच्चों में कुपोषण बना गंभीर मुद्दा
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में चार प्रमुख संकेतकों के आधार पर भूख की स्थिति का आकलन किया जाता है। इनमें अल्पपोषण, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में ठिगनापन, लंबाई के अनुपात में कम वजन और बाल मृत्यु दर शामिल हैं।रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में बच्चों के ठिगनेपन की दर में लंबे समय से गिरावट का रुझान रहा है, लेकिन समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है।अफगानिस्तान में यह दर वर्ष 2018 के बाद कुछ बढ़ी है।दोनों देशों में वर्ष 2000 की तुलना में बाल मृत्यु दर में सुधार हुआ है, हालांकि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां अभी समाप्त नहीं हुई हैं।
दक्षिण एशिया में करोड़ों लोग पर्याप्त भोजन से वंचित
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच ईरान सहित दक्षिण एशियाई क्षेत्र में लगभग 21.8 करोड़ लोग अल्पपोषण से प्रभावित थे।यह संख्या दुनिया में अल्पपोषण से प्रभावित कुल आबादी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है।रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दक्षिण एशिया में गंभीर खाद्य असुरक्षा की स्थिति आने वाले समय में भी बनी रह सकती है।
दुनिया के 32 देशों में बढ़ी भूख
वैश्विक भूख सूचकांक 2026 के अनुसार, लगभग दो दशकों तक सुधार के बाद दुनिया में भूख की स्थिति दोबारा बिगड़ रही है।वर्ष 2018 में वैश्विक स्कोर 17.6 था, जो 2026 में बढ़कर 18.1 हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 32 देशों में वर्ष 2018 के बाद भूख की गंभीरता बढ़ी है।वहीं, 57 देशों के वर्ष 2030 तक भूख को निम्न स्तर पर लाने के लक्ष्य से पीछे रहने की आशंका जताई गई है।रिपोर्ट में सशस्त्र संघर्षों, चरम मौसमी घटनाओं और आर्थिक संकट को खाद्य असुरक्षा के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।
खाद्य सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत
रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सरकारों से खाद्य सुरक्षा को नीतिगत प्राथमिकता देने की अपील की गई है।विशेषज्ञों के अनुसार, कृषि उत्पादन में सुधार, महंगाई पर नियंत्रण, गरीब परिवारों तक भोजन की उपलब्धता और बच्चों के पोषण कार्यक्रमों को मजबूत करना आवश्यक है।रिपोर्ट ने मानवीय सहायता और खाद्य सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग में आई कमी पर भी चिंता जताई है।पाकिस्तान की स्थिति दर्शाती है कि आर्थिक अस्थिरता और जलवायु आपदाओं के बीच खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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