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PoJK में पाकिस्तान सरकार की बढ़ीं मुश्किलें, JKJAAC ने स्थानीय लोगों के हक में उठाई आवाज

Ratna Netam
29 Oct 2026 3:58 PM IST
PoJK में पाकिस्तान सरकार की बढ़ीं मुश्किलें, JKJAAC ने स्थानीय लोगों के हक में उठाई आवाज
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मुजफ्फराबाद : 29 अक्टूबर 2026। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में नागरिक अधिकारों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक स्वायत्तता को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने क्षेत्र के निवासियों को प्रशासनिक अधिकार, स्थानीय संसाधनों पर प्रभावी नियंत्रण और निर्णय लेने की शक्तियां सौंपने की मांग की है। संगठन का कहना है कि क्षेत्र के भविष्य और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके साथ ही संगठन ने पाकिस्तान सरकार पर पहले किए गए समझौतों को लागू नहीं करने का आरोप लगाया है।JKJAAC लंबे समय से बिजली की कीमतों, महंगे आटे, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहा है। हालांकि, अब संगठन की मांगें आर्थिक राहत से आगे बढ़कर राजनीतिक अधिकारों, प्रशासनिक सुधारों और स्थानीय स्वशासन तक पहुंच गई हैं।
स्थानीय लोगों को मिले प्रशासन चलाने का अधिकार
JKJAAC ने मांग की है कि PoJK में स्थानीय निकायों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को वास्तविक प्रशासनिक शक्तियां दी जाएं। संगठन का कहना है कि स्थानीय विकास योजनाओं, सार्वजनिक संसाधनों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों से जुड़े निर्णयों में जनता की भूमिका मजबूत होनी चाहिए।संगठन द्वारा पहले प्रस्तुत मांगपत्र में स्थानीय सरकारों को अधिकार और संसाधन हस्तांतरित करने की मांग प्रमुखता से शामिल रही हैसमिति का तर्क है कि जब तक स्थानीय संस्थाओं को पर्याप्त अधिकार नहीं मिलेंगे, तब तक आम नागरिकों की समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।इसके साथ ही संगठन ने स्थानीय संसाधनों पर लोगों के स्वामित्व और नियंत्रण के अधिकार का मुद्दा भी उठाया है। इस मांग का संबंध प्रशासनिक जवाबदेही, आर्थिक विकास और क्षेत्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने से है।
पाकिस्तान सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
JKJAAC ने पाकिस्तान सरकार और PoJK प्रशासन पर आंदोलनकारियों के साथ हुए समझौतों को पूरी तरह लागू नहीं करने का आरोप लगाया है।संगठन का कहना है कि सरकार ने बिजली दरों, सार्वजनिक सुविधाओं और प्रशासनिक सुधारों से संबंधित मांगों पर पहले सहमति जताई थी, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दे अब भी लंबित हैं।सितंबर 2026 में रावलकोट में जारी घोषणा में समिति ने पूर्व समझौतों को लागू करने, नागरिक अधिकारों की रक्षा करने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई रोकने की मांग दोहराई थी।संगठन ने स्पष्ट किया था कि वह अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखने के पक्ष में है।
12 आरक्षित विधानसभा सीटों को खत्म करने की मांग
JKJAAC की सबसे चर्चित राजनीतिक मांगों में PoJK विधानसभा की उन 12 सीटों को समाप्त करना शामिल है, जो पाकिस्तान में रहने वाले जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के प्रतिनिधित्व के लिए आरक्षित हैं।संगठन का तर्क है कि क्षेत्र में रहने वाले लोगों के राजनीतिक फैसलों पर बाहरी प्रतिनिधित्व का असंगत प्रभाव नहीं होना चाहिए।समिति का कहना है कि विधानसभा में स्थानीय निवासियों के प्रतिनिधित्व को अधिक प्रभावी बनाने के लिए चुनावी व्यवस्था में सुधार आवश्यक है।हालांकि, आरक्षित सीटों का प्रश्न राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। मौजूदा व्यवस्था के समर्थक इन सीटों को विस्थापित समुदायों के प्रतिनिधित्व से जोड़ते हैं, जबकि JKJAAC इसमें बदलाव चाहता है।अप्रैल 2026 में संगठन ने पाकिस्तान और PoJK प्रशासन के सामने चुनावी तथा संवैधानिक सुधारों का प्रस्ताव भी रखा था।
बिजली और आटे की कीमतों पर भी नाराजगी
PoJK में आंदोलन की शुरुआत मुख्य रूप से महंगाई और आवश्यक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर हुई थी।JKJAAC का आरोप है कि क्षेत्र में जलविद्युत उत्पादन होने के बावजूद स्थानीय निवासियों को बिजली की कीमतों और आपूर्ति संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।संगठन ने बिजली दरें कम करने, अनियमित बिलिंग रोकने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।इसके अलावा गेहूं के आटे की कीमतों में राहत, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और शिक्षा व्यवस्था में सुधार भी उसकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं।समिति का कहना है कि जनकल्याण के लिए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों पर प्राथमिकता से किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर विवाद
JKJAAC और स्थानीय प्रशासन के बीच तनाव बढ़ने का एक प्रमुख कारण विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई भी है।समिति ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग, गिरफ्तारियों और नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगाने के आरोप लगाए हैं।संगठन ने हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को रिहा करने, कथित हिंसा की स्वतंत्र जांच कराने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।सितंबर में समिति ने बातचीत शुरू करने के लिए 13 शर्तें रखी थीं। इनमें सुरक्षा बलों की वापसी, इंटरनेट सेवाओं की बहाली, हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और कथित हिंसा के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल था।हालांकि, JKJAAC द्वारा लगाए गए सभी आरोपों और हताहतों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अक्टूबर में फिर तेज हुआ आंदोलन
लंबे समय से लंबित मांगों के बीच अक्टूबर 2026 में संगठन ने आंदोलन को फिर तेज करने की घोषणा की थी।रिपोर्टों के अनुसार, JKJAAC ने 24 अक्टूबर से विरोध गतिविधियां दोबारा शुरू करने की योजना बनाई थी। आंदोलन की प्रमुख मांगों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, नागरिक स्वतंत्रता, बिजली की कीमतें और पूर्व समझौतों का क्रियान्वयन शामिल रहा।संगठन के नेताओं का कहना है कि केवल आश्वासनों से जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होगा और सरकार को व्यावहारिक कदम उठाने होंगे।दूसरी ओर, प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। पिछले आंदोलनों के दौरान हुई हिंसक घटनाओं और गिरफ्तारियों के कारण दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाल करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया मुद्दा
PoJK में नागरिक अधिकारों का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाया जा रहा है।सितंबर 2026 में कश्मीरी प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया थाप्रदर्शनकारियों ने कथित मानवाधिकार उल्लंघनों, गिरफ्तारियों और नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंधों की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।JKJAAC ने इन मुद्दों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग का समर्थन किया। संगठन का कहना है कि स्थानीय लोगों की शिकायतों का समाधान शांतिपूर्ण बातचीत और जवाबदेह प्रशासन के माध्यम से होना चाहिए।
प्रशासनिक अधिकारों की मांग से बढ़ी राजनीतिक हलचल
JKJAAC की मांगों ने PoJK में शासन व्यवस्था, राजनीतिक भागीदारी और स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर बहस तेज कर दी है।संगठन का कहना है कि जनता को केवल चुनाव में मतदान करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि विकास और प्रशासन से जुड़े फैसलों में भी उसकी प्रभावी भूमिका होनी चाहिए।फिलहाल पाकिस्तान सरकार और JKJAAC के बीच मुख्य विवाद पहले हुए समझौतों के क्रियान्वयन तथा प्रशासनिक सुधारों को लेकर बना हुआ है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान सरकार और PoJK प्रशासन स्थानीय स्वशासन, नागरिक अधिकारों तथा संसाधनों पर नियंत्रण से जुड़ी मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।
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