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पाकिस्तान: ईश निंदा मामले में 1 व्यक्ति को फांसी की सजा

Gulabi
24 Dec 2021 4:29 PM GMT
पाकिस्तान: ईश निंदा मामले में 1 व्यक्ति को फांसी की सजा
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1 व्यक्ति को फांसी की सजा
पाकिस्तान की एक स्थानीय अदालत ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चारसद्दा जिले के एक निवासी को इंटरनेट मीडिया पर ईश निंदा वाला वीडियो अपलोड करने का दोषी पाया है। अदालत ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई।कोर्ट ने 42 वर्षीय बशीर मस्तान को पाकिस्तान दंड विधान की धारा 295-सी के तहत दोषी करार दिया।
मृत्युदंड के साथ जुर्माना भी
डान समाचारपत्र ने कहा कि मृत्युदंड के साथ ही दोषी व्यक्ति पर एक लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि पेशावर हाई कोर्ट से सजा की पुष्टि हुए बगैर दोषी को फांसी नहीं दी जा सकती है। वायरल हुए वीडियो में संदिग्ध को यह झूठा दावा करते देखा जा सकता है कि वह एक देवदूत है। डान अखबार ने कहा कि इस वीडियो से लोगों के बीच कोहराम मच गया। इस साल के शुरू में पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने सांप्रदायिक एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ ईश निंदा के दर्ज होने वाले मामलों में आई तेजी पर चिंता जताई थी।
क्या है ईश निंदा
ईशनिंदा का मतलब है ईश्वर की निंदा, अगर कोई व्यक्ति धार्मिक जगहों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाता है या धर्म के कामों में रुकावट पैदा करता है। तो यह ईश निंदा के दायरे में आता है, विश्व के कई देशों में ईश निंदा पर कानून भी बने हुए हैं। इन देशों में ईश निंदा करने पर सख्त सजा का प्रावधान भी है।
ईश ‍निंदा कानून के क्या मायने
ईश निंदा कानून के मुताबिक, इस्लाम या पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कुछ भी टिप्पणी करने पर मौत की सजा का प्रावधान है। यदी किसी परिस्थिति में मौत की सजा नहीं दी जाती, तो आजीवन कारावास के साथ जुर्माने की सजा तो निश्चित है। इस कानून को ब्रिटिश काल के दौरान वजूद में लाया गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व के कई मुस्लिम देशों में आर्थिक जुर्माने के साथ सजा का प्रावधान है। लेकिन ईरान, सऊदी अरब और पाकिस्तान में मौत की सजा दी जा सकती है।
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