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KP की खनिज संपदा पर पाक सेना और प्रॉक्सी का कब्ज़ा

Tara Tandi
17 Oct 2026 6:52 PM IST
KP की खनिज संपदा पर पाक सेना और प्रॉक्सी का कब्ज़ा
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नई दिल्ली: पाकिस्तानी सेना ने खैबर पख्तूनख्वा (KP) को हमेशा एक ऐसी प्रयोगशाला के रूप में देखा है, जहाँ आतंकवाद से जुड़े प्रयोग किए जाते हैं। सेना ने KP में 'जिहाद की फैक्ट्रियों' में कई समूहों को पाला-पोसा और खड़ा किया है, लेकिन साथ ही उसे यहाँ के स्थानीय लोगों के कड़े विरोध का भी सामना करना पड़ा है।
KP और अन्य इलाकों में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू होने के बाद से ही विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। PTI, जिसकी इस क्षेत्र में सरकार थी, इस फैसले के खिलाफ पूरी तरह से लामबंद हो गई है। पाकिस्तान के भीतर भी इस फैसले की व्यापक निंदा की गई है।
एक अधिकारी ने बताया कि इस फैसले के पीछे एक कारण इमरान खान द्वारा बनाई गई पार्टी PTI को कमजोर करना और खत्म करना था, जबकि दूसरा कारण खदानों और खनिजों पर पूरा नियंत्रण हासिल करना था। अधिकारी के अनुसार, पाकिस्तान इन खदानों और खनिजों के काम में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को शामिल करना चाहता है, लेकिन इसके लिए वह पूरी तरह से सुरक्षित माहौल (फूलप्रूफ सिक्योरिटी) भी चाहता है।
'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) जैसे समूह, जिन्हें शुरू से ही KP की 'आतंकवादी फैक्ट्रियों' में पाला-पोसा गया था, अब पाकिस्तानी सत्ता (एस्टेब्लिशमेंट) के ही खिलाफ हो गए हैं। 'हक्कानी नेटवर्क'—जिसे भी पाकिस्तानी सत्ता ने KP में ही खड़ा किया था—के साथ भी रिश्ते काफी जटिल हैं। कभी हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों का एक रणनीतिक 'प्रॉक्सी' (मोहरा) माना जाता था, लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी ने इस समीकरण को पूरी तरह से बदल दिया है। अफगान तालिबान और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बहुत खराब हो गए हैं, और जानकारों का मानना ​​है कि निकट भविष्य में इनमें सुधार के कोई आसार नहीं हैं।
ऐसे में पाकिस्तानी सत्ता के पास अपने तीन सबसे वफादार 'प्रॉक्सी' समूहों—जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन—पर निर्भर रहने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है।
खुफिया ब्यूरो (Intelligence Bureau) के एक अधिकारी ने बताया कि इन 'आतंकवादी फैक्ट्रियों' में काफी हलचल देखी जा रही है, खासकर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ठिकानों पर। यह संगठन, अन्य समूहों के साथ मिलकर, कई सालों से KP क्षेत्र का इस्तेमाल खुद को फिर से संगठित करने (रीग्रुपिंग) के लिए करता रहा है। ISI और पाकिस्तानी सेना की कड़ी निगरानी में, इन तीनों आतंकवादी समूहों ने इस इलाके में बड़ी संख्या में अपने लड़ाकों को इकट्ठा कर लिया है। एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में इन्हें TTP से लड़ने के लिए लाया गया था, लेकिन आज इन आतंकी संगठनों को खदानों, खनिजों और उनके आसपास की परियोजनाओं की सुरक्षा करने की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है।
गवर्नर शासन लागू होने और कोई चुनी हुई सरकार न होने के कारण, पाकिस्तान सेना KP (खैबर पख्तूनख्वा) क्षेत्र में मनमानी कर रही है। अब खदानों और खनिजों तक सेना और सत्ता प्रतिष्ठान की पूरी पहुंच है, जो चुनी हुई सरकार के समय नहीं थी।
लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल को शामिल करने से खदानों और खनिजों के आसपास सुरक्षा की कई परतें और जुड़ गई हैं। पाकिस्तान सेना की बड़ी योजनाएं हैं और वह कई परियोजनाएं शुरू करना चाहती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके क्षेत्र से निकाले गए संसाधनों का इस्तेमाल कभी भी विकास कार्यों या बुनियादी सुविधाओं के लिए नहीं किया जाता है। इसके बजाय, इन संसाधनों से मिलने वाला पैसा इस्लामाबाद, रावलपिंडी, लाहौर और कराची भेज दिया जाता है, जहां अमीर और ताकतवर लोग इसका फायदा उठाते हैं।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि सेना ने इन तीनों आतंकी संगठनों के भीतर विशेष इकाइयां बनाई हैं, जिनका काम खदानों, खनिजों और उनसे जुड़ी आगामी परियोजनाओं की सुरक्षा करना है। इन परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए सेना और अन्य सुरक्षा बलों को भी बड़ी संख्या में तैनात किया जा रहा है। अधिकारी के अनुसार, अब KP क्षेत्र में कितने सैनिकों को तैनात किया जाएगा, इसका फैसला गवर्नर करेंगे।
ये आतंकी समूह, जो इस क्षेत्र में काफी सक्रिय हो गए हैं, सुरक्षा व्यवस्था की दूसरी और तीसरी परत का काम करेंगे। TTP अभी भी सत्ता प्रतिष्ठान के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। प्रतिष्ठान चाहता है कि सेना और सुरक्षा बलों तक पहुंचने से पहले, ये तीनों आतंकी समूह TTP से लड़ें।
सेना का मानना ​​है कि जब तक TTP उसके सैनिकों तक पहुंचेगा, तब तक वह पूरी तरह थक चुका होगा और उसे भारी नुकसान उठाना पड़ चुका होगा। पाकिस्तान सेना और सुरक्षा बल, जो अब तक सीधे TTP से लड़ रहे थे, कई मोर्चों पर हार चुके हैं, जिससे उनके सैनिकों का मनोबल गिर गया है। अधिकारी ने बताया कि सेना ऐसी स्थिति दोबारा नहीं चाहती, इसलिए उसने सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत बनाने के लिए अपने तीन 'प्रॉक्सी' (छद्म) समूहों को काम पर लगाने का फैसला किया है।
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