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ईरान पर नए हमले का विकल्प खुला, मध्य पूर्व में सैन्य ताकत बढ़ा रहा अमेरिका

nidhi
24 Oct 2026 7:13 AM IST
ईरान पर नए हमले का विकल्प खुला, मध्य पूर्व में सैन्य ताकत बढ़ा रहा अमेरिका
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अमेरिकी सैन्य तैनाती से बढ़ा तनाव
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने और ईरान के खिलाफ नए हमलों के विकल्प तैयार किए जाने की रिपोर्टों ने चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना का संकेत दिया है। हालांकि, संभावित हमले की तारीख, उसके दायरे और अंतिम मंजूरी को लेकर सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में सैन्य तैयारियों को हमले का निश्चित आदेश मानना जल्दबाजी होगी।
ट्रंप ने 23 अक्टूबर को फ्लोरिडा में आयोजित एक रैली के दौरान ईरान के खिलाफ एक और अभियान की संभावना जताई। उन्होंने अमेरिकी सैन्य अभियान ‘एपिक फ्यूरी’ का उल्लेख किया, लेकिन संभावित कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया। इससे पहले उन्होंने कहा था कि अमेरिका तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। उनके ताजा बयान से सैन्य विकल्प खुले रहने का संकेत मिलता है, लेकिन यह किसी नए अभियान की औपचारिक घोषणा नहीं है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान ने ईरान के खिलाफ कम अवधि में तीव्र हमले करने के विकल्प तैयार किए हैं। इनमें लगभग तीन दिन तक चलने वाले सैन्य अभियान की योजना भी शामिल बताई गई है। संभावित निशानों में ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडार, ऊर्जा प्रतिष्ठान तथा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांड केंद्र शामिल हो सकते हैं। इन योजनाओं का उल्लेख अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आया है; सभी संभावित लक्ष्यों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य योजनाकारों की चिंता ईरान की उन क्षमताओं को लेकर भी है, जिन्हें उसने संघर्ष के शुरुआती दौर के बाद दोबारा विकसित किया है। विशेष रूप से मिसाइल और ड्रोन क्षमता संभावित अभियान की योजना में प्रमुख स्थान रखती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड को बड़े अभियान की संभावित बहाली के लिए तैयारी पूरी करने का निर्देश दिए जाने की भी खबर है। हालांकि, संबंधित रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि तैयारी के निर्देश में हमले की तारीख तय नहीं थी और अंतिम निर्णय बाकी था।
इसी बीच क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक ताकत बढ़ाई जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में दो अमेरिकी विमानवाहक पोत समूह मौजूद हैं और तीसरा समूह प्रशांत क्षेत्र से भेजा जा रहा है। अतिरिक्त मरीन सैनिकों वाला एक उभयचर युद्धपोत भी तैनाती का हिस्सा है। हालांकि, तीनों विमानवाहक पोत समूह कितने समय तक एक साथ क्षेत्र में रहेंगे, यह स्पष्ट नहीं है। इससे सैन्य तैयारियों का पैमाना बढ़ने के संकेत मिलते हैं।
एक अक्टूबर की रिपोर्ट में लगभग नौ हजार अतिरिक्त सैनिकों को नवंबर के अंत तक क्षेत्र में भेजने की तैयारी का उल्लेख किया गया था। इसके अनुसार, यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट और यूएसएस माकिन आइलैंड से जुड़े नौसैनिक समूहों की आवाजाही भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है। रिपोर्ट में पहले से तैनात अमेरिकी सैनिकों के साथ अतिरिक्त बल जोड़ने की बात कही गई थी। इसलिए प्रस्तावित तैनाती और पूरी हो चुकी तैनाती के आंकड़ों में अंतर रखना जरूरी है। पूरे अतिरिक्त बल के पहुंच जाने की पुष्टि इन शुरुआती रिपोर्टों से नहीं होती।
दूसरी ओर, ईरान ने चेतावनी दी है कि नए अमेरिकी या इजराइली हमलों का जवाब व्यापक कार्रवाई से दिया जाएगा। ईरानी पक्ष के बयानों में अमेरिकी हितों और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की चेतावनी सामने आई है। इससे खाड़ी देशों की चिंता बढ़ी है, क्योंकि संघर्ष का विस्तार उनकी सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, ऐसी चेतावनियों को वास्तविक हमले की पुष्टि से अलग समझना आवश्यक है। फिलहाल ये संभावित जवाबी कार्रवाई से जुड़े ईरानी दावे हैं।
सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब में गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को निकलने का आदेश दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया कि यह आदेश सऊदी अरब के लिए था। अन्य कई देशों में भी ऐसा ही आदेश जारी होने संबंधी खबरों को विभाग के प्रवक्ता ने गलत बताया। यह कदम बढ़ते हूती हमलों की पृष्ठभूमि में उठाया गया था। इसे अपने आप में ईरान पर तत्काल अमेरिकी हमले की घोषणा नहीं माना जा सकता।
तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं। कतर और पाकिस्तान के नेतृत्व में मध्यस्थ बातचीत का रास्ता तलाश रहे हैं। फ्रांस ने भी क्षेत्र की अनिश्चित स्थिति को देखते हुए अत्यधिक सावधानी बरतने पर जोर दिया है। संभावित व्यापक संघर्ष से नागरिकों की सुरक्षा के साथ तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य जरूरी उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। फिलहाल तस्वीर सैन्य दबाव, जवाबी चेतावनियों और कूटनीतिक प्रयासों की है। अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम अमेरिका के अंतिम निर्णय और मध्यस्थता की प्रगति से जुड़ा होगा।
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