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कभी ट्रम्प से थी दुश्मनी, अब AI के फैसलों में साथ दिख रहे जुकरबर्ग

jantaserishta.com
9 Oct 2026 3:15 PM IST
कभी ट्रम्प से थी दुश्मनी, अब AI के फैसलों में साथ दिख रहे जुकरबर्ग
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नई दिल्ली: मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के रिश्तों में बीते कुछ वर्षों के दौरान बड़ा बदलाव आया है। 2021 में ट्रम्प के फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट बंद किए जाने के बाद दोनों के बीच तनाव बढ़ गया था, लेकिन 2024 में ट्रम्प पर हुए हमले के बाद रिश्ते सुधरने लगे। ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद जुकरबर्ग ने उनसे नजदीकी बढ़ाई और अब AI सुरक्षा से जुड़े समझौते का मसौदा तैयार करने में भी भूमिका निभाई है। हालांकि, इस करीबी के चलते मेटा को भविष्य में राजनीतिक सवालों तथा आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है।
2021 में बिगड़े रिश्ते, फिर कैसे बदला माहौल?
मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग एक समय अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के करीबी माने जाते थे। वर्ष 2021 में अमेरिकी संसद पर हमले के बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम ने डोनाल्ड ट्रम्प के अकाउंट पर रोक लगा दी थी। कंपनी को आशंका थी कि उनकी पोस्ट से हिंसा को बढ़ावा मिल सकता है।
इस कार्रवाई से ट्रम्प नाराज हो गए थे। उन्होंने जुकरबर्ग पर उनके खिलाफ साजिश करने का आरोप लगाया और उन्हें जेल भेजने से लेकर उम्रकैद तक की धमकियां दी थीं।
दोनों के रिश्तों में बदलाव जुलाई 2024 में नजर आया। पेंसिल्वेनिया में चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प पर जानलेवा हमला हुआ था। इस घटना के बाद जुकरबर्ग ने उनकी तारीफ की। उन्होंने कहा कि गोली लगने के बाद ट्रम्प का उठकर हाथ हिलाना उनके जीवन में देखे गए सबसे प्रभावशाली दृश्यों में से एक था।
इसके कुछ सप्ताह बाद ट्रम्प ने भी जुकरबर्ग के प्रति अपना रुख नरम किया। उन्होंने कहा कि अब वह जुकरबर्ग को पहले के मुकाबले ज्यादा पसंद करते हैं।
ट्रम्प के करीब आने के लिए उठाए कई कदम
ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद जुकरबर्ग ने उनके साथ संबंध बेहतर बनाने की दिशा में कई कदम उठाए। मेटा ने ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह के लिए 10 लाख डॉलर का योगदान दिया। इस कार्यक्रम में जुकरबर्ग को अन्य प्रमुख उद्योगपतियों के साथ आगे की जगह मिली।
इसके अलावा, ट्रम्प के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े मुकदमे को निपटाने के लिए मेटा ने करीब 2.5 करोड़ डॉलर देने पर सहमति जताई। कंपनी में नियुक्तियों के स्तर पर भी बदलाव हुए। जुकरबर्ग ने रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े जोएल कपलान को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी। बाद में ट्रम्प प्रशासन में काम कर चुकीं डीना पॉवेल मैककॉर्मिक को मेटा का अध्यक्ष बनाया गया।
मेटा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की निगरानी करने से संबंधित अपनी नीतियों में भी बदलाव किए। रिपब्लिकन नेताओं का आरोप रहा था कि कंपनी उनके विचारों को दबाती है।
AI सुरक्षा समझौते में जुकरबर्ग की अहम भूमिका
ट्रम्प और जुकरबर्ग के बीच बढ़ती नजदीकी का असर तकनीक से जुड़े फैसलों में भी दिखाई दे रहा है। जुकरबर्ग ने एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेंसन हुआंग के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की सुरक्षा से संबंधित समझौते का शुरुआती मसौदा तैयार किया।
इस समझौते को पिछले सप्ताह व्हाइट हाउस में ट्रम्प और तकनीकी कंपनियों के प्रमुखों की बैठक के दौरान अंतिम रूप दिया गया। इस पहल का उद्देश्य AI के लिए मानक तय करना, उन्हें लागू करना और उनकी जांच की व्यवस्था बनाना है। जुकरबर्ग का मानना है कि तकनीक में सुधार करके AI की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को भी कम किया जा सकता है।
हालांकि, इस समझौते की एक बड़ी सीमा यह है कि यह कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। इसमें नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का प्रावधान भी नहीं है।
राजनीतिक समीकरण बदलने पर बढ़ सकती हैं मुश्किलें
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प के साथ नजदीकी से जुकरबर्ग को कुछ फायदे मिल रहे हैं, लेकिन इसके भविष्य में नुकसान भी हो सकते हैं। अगर अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत मिलता है या 2028 में उसका उम्मीदवार राष्ट्रपति बनता है, तो मेटा को अपने फैसलों और गतिविधियों पर कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
पिछले महीने डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने मेटा को पत्र लिखकर पूछा कि कंपनी ने रिपब्लिकन संगठनों और ट्रम्प की पसंदीदा परियोजनाओं पर कितनी रकम खर्च की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा ने ट्रम्प को खुश रखने के लिए बड़ी राशि खर्च की तथा अब उसे इसका लाभ मिल रहा है।
इस तरह जुकरबर्ग, जो कभी ट्रम्प के साथ टकराव में थे, अब उनके साथ मिलकर AI के भविष्य से जुड़े अहम फैसलों में भागीदारी कर रहे हैं। हालांकि, दोनों के बीच यह नजदीकी कितने समय तक बनी रहती है और बदलते राजनीतिक हालात का मेटा पर क्या असर पड़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
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