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Delhi दिल्ली। बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं। सोमवार को चुनावी कैंपेन का आखिरी दिन रहा। चुनावी तैयारियां अपने आखिरी चरण में पहुंच चुकी हैं। इस बीच आयोग ने 12 फरवरी को होने वाले रेफरेंडम और नेशनल पार्लियामेंट्री इलेक्शन में पोलिंग स्टेशन के 400 यार्ड के दायरे में मोबाइल फोन ले जाने और इस्तेमाल करने पर बैन लगा दिया है। यह निर्देश इलेक्शन कमीशन सेक्रेटेरिएट के सीनियर असिस्टेंट सेक्रेटरी एमडी शाहिदुल इस्लाम के साइन किए हुए एक लेटर में जारी किया गया, जिसे रविवार को रिटर्निंग ऑफिसर्स को भेजा गया।
आयोग के फैसले के मुताबिक सिर्फ तीन कैटेगरी के लोगों को पोलिंग स्टेशन के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की इजाजत होगी। वे हैं संबंधित पीठासीन अधिकारी, संबंधित स्टेशन पर सुरक्षा के इंचार्ज पुलिस ऑफिसर और दो अंसार मेंबर (एम्बोडेड अंसार/जनरल अंसार/वीडीपी) जिन्हें ‘इलेक्शन सिक्योरिटी 2026’ एप्लीकेशन इस्तेमाल करने के लिए नियुक्त किया गया है। इस निर्देश के कारण, उम्मीदवारों या पत्रकारों को भी पोलिंग वाले दिन पोलिंग स्टेशन के 400 यार्ड के दायरे में मोबाइल फोन ले जाने या इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होगी।
चिट्ठी में ढाका और चटगांव के डिविजनल कमिश्नर, सभी 64 जिलों के डिप्टी कमिश्नर और ढाका, चटगांव और खुलना के क्षेत्रीय चुनाव अधिकारी समेत 69 रिटर्निंग ऑफिसर को निर्देश दिया गया कि वे फैसले को ठीक से लागू करें। चुनाव आयोग ने पिछले साल 11 दिसंबर को 13वें पार्लियामेंट्री इलेक्शन और जुलाई नेशनल चार्टर (संवैधानिक रिफॉर्म) पर रेफरेंडम को एक साथ 12 फरवरी, 2026 को कराने के लिए तारीख का ऐलान किया था।
बांग्लादेश में चुनाव के बीच महिलाओं की राजनीति में भागीदारी एक प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आई। आयोग ने जो चुनावी आंकड़े जारी किए उसके अनुसार बांग्लादेश में आगामी चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या बेहद कम है। इस बीच जो निर्दलीय महिला उम्मीदवार मैदान में उतरीं हैं, उनका आरोप है कि उन्हें धमकियों और साइबर अपराध का निशाना बनाया जा रहा है। मीडिया ने बताया कि कई चुनाव क्षेत्रों की महिला उम्मीदवारों ने ऑनलाइन और जमीनी स्तर पर साइबरबुलिंग, चरित्र हनन, यौन उत्पीड़न और धमकियों की रिपोर्ट की है। इन कृत्यों का मकसद महिला उम्मीदवारों को डराना और उनके चुनावी कैंपेन को रोकना है।
ढाका-19 से नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) उम्मीदवार दिलशाना पारुल ने कहा कि उन्हें लगातार ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा है, खासकर हेडस्कार्फ पहनने के उनके फैसले को लेकर। बांग्लादेशी अखबार 'द ढाका ट्रिब्यून' ने उनके हवाले से कहा, "न सिर्फ विरोधी पार्टियों के समर्थकों बल्कि जो लोग खुद को प्रोग्रेसिव कहते हैं, वे भी इसमें शामिल हैं। मेरा मानना है कि मुझे सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया है।" पारुल ने आरोप लगाया है कि उनके अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकियां भी मिली हैं।
लिंग आधारित टारगेटिंग पर जोर देते हुए, पारुल ने कहा कि पुरुष नेताओं की ज्यादातर आलोचना भ्रष्टाचार या नीतियों को लेकर होती है, जबकि महिलाओं पर चरित्र को लेकर हमला किया जाता है। इसके बावजूद, मैं फील्ड में काम करती रहूंगी और अपने चुनाव क्षेत्र के विकास पर ध्यान दूंगी।
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