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नई दिल्ली : 26 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वैश्विक शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है कि वे संवाद और कूटनीति के माध्यम से मतभेदों का समाधान खोजें। सम्मेलन के अवसर पर चीन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान सहित विभिन्न देशों के संसदीय प्रतिनिधियों के साथ संवाद को अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।नई दिल्ली के ऐतिहासिक संविधान सदन में 26 और 27 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य विषय 'जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना' रखा गया है।
वैश्विक शांति बनाए रखना सभी देशों की जिम्मेदारी: ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। क्षेत्रीय संघर्ष, युद्ध, आतंकवाद, आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक तनाव और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं का प्रभाव किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता।उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में देशों के बीच संवाद, सहयोग और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।बिरला ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि संसदें विभिन्न देशों के बीच विश्वास बढ़ाने, तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने सदस्य देशों से आपसी सम्मान और साझा जिम्मेदारी की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
ईरानी संसदीय प्रतिनिधिमंडल से हुई मुलाकात
12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग लेने पहुंचे ईरान के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार सुबह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की।ईरानी प्रतिनिधिमंडल में संसद के पीठासीन बोर्ड के सदस्य अहमद नादेरी, ईरान-भारत संसदीय मैत्री समूह के प्रमुख अब्बास मोक्तादेई और समूह के उपप्रमुख अली हद्दादी शामिल थे।ईरानी दूतावास ने भी इस मुलाकात की जानकारी साझा की। दोनों पक्षों के बीच संसदीय संपर्क और सहयोग से संबंधित बातचीत हुई। हालांकि, मुलाकात के सभी विषयों और किसी विशिष्ट समझौते का विस्तृत आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
चीन और UAE के साथ संवाद का महत्व
ब्रिक्स संसदीय मंच में चीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की भागीदारी ऐसे समय महत्वपूर्ण है, जब पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई हैसम्मेलन से पहले ओम बिरला ने कहा था कि भारत विभिन्न देशों के बीच संवाद और सहमति बनाने की दिशा में प्रयास कर रहा है।उन्होंने पश्चिम एशिया की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि शांति और स्थिरता के बिना समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित करना कठिन है।सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेदों के बावजूद सदस्य देशों ने संयुक्त घोषणा पर सहमति जताई थी। इसे बहुपक्षीय संवाद के महत्व के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
संसदीय कूटनीति से कम हो सकते हैं अंतरराष्ट्रीय तनाव
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसदें जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने में सक्षम हैं।उन्होंने सदस्य देशों से संसदीय अनुभवों, बेहतर कार्यप्रणालियों बिरला के अनुसार, संसदीय कूटनीति देशों के बीच मतभेद कम करने और साझा हितों की पहचान करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग राजनीतिक व्यवस्थाओं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के बावजूद देश शांति, सुरक्षा, सम्मान और नागरिकों के बेहतर जीवन जैसे साझा उद्देश्यों पर सहयोग कर सकते हैं।
चार प्रमुख विषयों पर सम्मेलन में चर्चा
12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में संस्थागत मजबूती, नवाचार, सहयोग और सतत विकास जैसे चार प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक के जिम्मेदार उपयोग, संसदीय जवाबदेही और वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने जैसे विषय भी शामिल हैं।ओम बिरला ने कहा कि ब्रिक्स देशों को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि साझा प्रतिबद्धताओं को ठोस नीतियों और व्यावहारिक सहयोग में बदलना चाहिए।उन्होंने विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंचों पर मजबूत बनाने की आवश्यकता भी रेखांकित की।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने की पहल
ब्रिक्स संसदीय मंच के माध्यम से भारत सदस्य और साझेदार देशों के बीच संसदीय संबंधों को विस्तार देने का प्रयास कर रहा है।ओम बिरला ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने विश्वास जताया कि संसदीय संवाद से सदस्य देशों के बीच आपसी समझ और सहयोग को मजबूती मिलेगी।दो दिवसीय सम्मेलन का समापन 27 अक्टूबर को निर्धारित है। इस दौरान होने वाली चर्चाओं और संभावित संयुक्त घोषणा से यह स्पष्ट होगा कि ब्रिक्स देश शांति, विकास और संसदीय सहयोग के क्षेत्र में किन साझा प्राथमिकताओं पर आगे बढ़ेंगे।
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