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Riyadh रियाद। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बुधवार को सऊदी अरब के सुरक्षा सलाहकार मुसैद बिन मोहम्मद अल-ऐबान से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग, आपसी हितों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अन्य मुद्दों पर चर्चा की। रियाद में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, "एनएसए अजीत डोभाल ने सऊदी के राज्य मंत्री, कैबिनेट के सदस्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, मुसैद बिन मोहम्मद अल-ऐबान के साथ एक मीटिंग की। चर्चा में द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ आपसी हित के क्षेत्रीय और दूसरे मुद्दों पर भी बात हुई।"
बता दें, एनएसए डोभाल आधिकारिक दौरे पर मंगलवार को रियाद पहुंचे। एयरपोर्ट पर सऊदी अरब में भारतीय राजदूत सुहेल एजाज खान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय में राजनीतिक मामलों के उपमंत्री सऊद अल-सती ने उनका स्वागत किया। दोनों देशों के बीच सुरक्षा में सहयोग को लेकर वार्ता जारी है। इस बीच दोनों देशों के एनएसए ने यह मुलाकात की है, जिसे अहम माना जा रहा है। इससे पहले भारत और सऊदी अरब ने रियाद में सामरिक साझेदारी परिषद की राजनीतिक, वाणिज्य और सुरक्षा सहयोग कमेटी के तहत सुरक्षा वर्किंग समूह की तीसरी मीटिंग की। इस मीटिंग में दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग की समीक्षा की गई।
दोनों देशों ने आतंकवाद से निपटने के लिए मौजूदा और नई चुनौतियों में सहयोग बढ़ाने पर अपने विचार शेयर किए। बैठक में चरमपंथ और कट्टरपंथ का मुकाबला करना, आतंकवाद की फंडिंग का मुकाबला करना, आतंकवादी मकसदों के लिए तकनीक का इस्तेमाल रोकना, और पार-देशीय संगठित अपराध (टीओसी) और आतंकवाद के बीच सांठगांठ के मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस बैठक के बाद विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और सऊदी अरब के अधिकारियों ने आपसी कानूनी और न्यायिक सहयोग और कानून लागू करने में सहयोग को और गहरा करने के उपायों पर बातचीत की और कहा, "दोनों पक्षों ने आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की, जिसमें सीमा पार से आतंकवाद और 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम, जम्मू और कश्मीर में बेगुनाह नागरिकों पर हुआ भयानक आतंकवादी हमला और 10 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली में लाल किले के पास हुई आतंकी घटना शामिल है।"
इस बैठक की सहअध्यक्षता संयुक्त सचिव (काउंटर टेररिज्म) विनोद बहाडे और सऊदी अरब के गृह मंत्रालय में कानूनी मामलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के डायरेक्टर जनरल अहमद अल-ईसा ने की। बता दें, भारत की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हाल ही में एक दशक के बाद भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक बुलाई गई। करीब 10 साल बाद दूसरा आईएएफएमएम का आयोजन किया गया, जिसमें अरब देशों के विदेश मंत्री शामिल हुए।
जितनी तेजी से वर्ल्ड डायनेमिक्स चेंज हो रहा है, उस हिसाब से भारत अरब देशों की तरफ भी अपना रुख कर रहा है। डायवर्सिफिकेशन भारत की पॉलिसी रही है। भारत कभी भी अपनी निर्भरता किसी एक देश पर नहीं रखता है। एक तरफ सऊदी अरब पाकिस्तान से नजदीकियां बढ़ा रहा है, तो वहीं सऊदी अरब अमीरात भारत के साथ मिलकर रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने की कवायद तेज कर रही है।
हाल ही में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान महज कुछ घंटे के लिए भारत पहुंचे थे। 19 जनवरी को चार घंटे के भारत दौरे के दौरान उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की थी।
भारत जिस तरह से अरब देशों के साथ अपनी गतिविधियों को बढ़ा रहा है, इससे एक बात बिल्कुल साफ हो चुकी है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत अरब देशों के साथ अपने संबंध को कूटनीतिक और रणनीतिक तौर पर मजबूत और गहरा करने की तैयारी में जुट चुका है।
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