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उत्तर कोरिया ने बढ़ाई सैन्य तैयारी
सियोल: उत्तर कोरिया ने सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों पर लगाए जा सकने वाले क्लस्टर वॉरहेड का परीक्षण किया है। सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी यानी केसीएनए ने रविवार, 1 नवंबर को इसकी जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षण शनिवार, 31 अक्टूबर को किया गया। इसका उद्देश्य युद्ध परिस्थितियों में हथियार की उपयोगिता और मारक क्षमता का मूल्यांकन करना था। उत्तर कोरिया ने दावा किया कि परीक्षण में इस्तेमाल किया गया ‘स्टैंडर्ड टाइप-2’ क्लस्टर वॉरहेड लगभग 12 से 13 हेक्टेयर क्षेत्र में व्यापक विनाश कर सकता है। यह क्षमता उत्तर कोरिया का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं दी गई है।
योनहाप समाचार एजेंसी ने केसीएनए के हवाले से बताया कि परीक्षण की निगरानी जनरल किम जोंग-सिक ने की। वे सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य हैं। उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रशासन के अधीन अनुसंधान संस्थानों ने हथियार के प्रदर्शन का आकलन किया। सरकारी रिपोर्ट में इसे सैन्य जरूरतों के अनुरूप हथियार प्रणाली विकसित करने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। हालांकि, सार्वजनिक जानकारी से इस परीक्षण के सभी तकनीकी पहलुओं और वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में इसकी विश्वसनीयता का आकलन नहीं किया जा सकता।
उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रशासन के प्रमुख के अनुसार, क्लस्टर वॉरहेड को उनके उपयोग के आधार पर चार श्रेणियों में रखा गया है। प्योंगयांग की योजना वर्ष 2026 के अंत तक सैन्य इकाइयों को इन विभिन्न प्रकारों का चयन और इस्तेमाल करने में सक्षम बनाने की है। सरकारी बयान के मुताबिक, चयन अभियान के उद्देश्य और लक्ष्य की विशेषताओं के अनुसार किया जाएगा। हालांकि, चारों श्रेणियों की विस्तृत क्षमताओं, उपलब्ध संख्या और तैनाती की स्थिति का खुलासा नहीं किया गया है। घोषणा को पूर्ण तैनाती की पुष्टि मानना अभी उचित नहीं होगा।
यह पहला अवसर नहीं है जब उत्तर कोरिया ने ऐसे हथियार के परीक्षण की जानकारी दी हो। योनहाप के अनुसार, अप्रैल में भी उसने ह्वासोंग-11 रा सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल पर लगे क्लस्टर वॉरहेड का परीक्षण करने का दावा किया था। उस कार्यक्रम में किम जोंग-उन और उनकी बेटी जू-ए मौजूद थे। हालिया परीक्षण इस प्रकार के हथियारों पर जारी काम का संकेत देता है, लेकिन दोनों परीक्षणों में इस्तेमाल प्रणालियों को बिना अतिरिक्त पुष्टि के पूरी तरह समान नहीं माना जा सकता।
क्लस्टर हथियार एक बड़े गोले, बम या वॉरहेड के भीतर अनेक छोटे विस्फोटक समेटे होते हैं। छोड़े जाने के बाद ये छोटे विस्फोटक बड़े क्षेत्र में फैल जाते हैं। इसी कारण इनका प्रभाव किसी एक सीमित बिंदु तक नहीं रहता। अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति के अनुसार, ऐसे हथियारों से नागरिकों को दोहरी चुनौती होती है। हमले के समय व्यापक क्षेत्र में विस्फोट होते हैं और उसके बाद बचे हुए बिना फटे छोटे बम लंबे समय तक खतरा बने रह सकते हैं।
इन हथियारों का मानवीय प्रभाव तत्काल विस्फोट से आगे जाता है। बिना फटे विस्फोटक लोगों की आवाजाही और सामान्य जीवन की बहाली में बाधा बन सकते हैं। बच्चों के लिए इनसे होने वाली चोटें विशेष रूप से गंभीर हो सकती हैं। रेड क्रॉस के अनुसार, बच्चों के छोटे आकार और विकसित हो रहे शरीर के कारण अंग-विच्छेदन, अत्यधिक रक्तस्राव और स्थायी दिव्यांगता का जोखिम अधिक होता है। इसलिए क्लस्टर हथियारों पर बहस केवल उनकी सैन्य क्षमता तक सीमित नहीं है; नागरिक सुरक्षा और युद्ध के बाद बची विस्फोटक सामग्री भी इसके केंद्र में है।
इन खतरों को देखते हुए वर्ष 2008 में क्लस्टर म्यूनिशंस कन्वेंशन स्वीकार किया गया था। यह संधि 1 अगस्त 2010 को प्रभावी हुई। इसकी आधिकारिक वेबसाइट और क्लस्टर म्यूनिशन मॉनिटर 2026 के अनुसार, 112 देश इसके पक्षकार हैं। संधि में शामिल देशों पर क्लस्टर हथियारों के इस्तेमाल, उत्पादन, भंडारण और हस्तांतरण पर प्रतिबंध लागू होता है। इसलिए यह कहना अधिक सटीक है कि 100 से अधिक देशों ने संधि के तहत इन्हें प्रतिबंधित किया है। इसे पूरी दुनिया में लागू सार्वभौमिक प्रतिबंध नहीं कहा जा सकता।
उत्तर कोरिया इस संधि का पक्षकार नहीं है। क्लस्टर म्यूनिशन मॉनिटर ने उसे उन देशों में शामिल किया है जो ऐसे हथियार बनाते हैं, उत्पादन क्षमता रखते हैं या उत्पादन हमेशा के लिए बंद करने की औपचारिक प्रतिबद्धता नहीं दे चुके हैं। मॉनिटर की 2026 की रिपोर्ट में उत्तर कोरिया में क्लस्टर हथियार उत्पादन के प्रमाण मिलने की बात भी कही गई है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रतिबंध संधि की व्यापक सदस्यता के बावजूद इन हथियारों का विकास और उत्पादन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
संधि का उद्देश्य केवल भविष्य के इस्तेमाल को रोकना नहीं है। इसके पक्षकार देशों को पुराने भंडार नष्ट करने, विस्फोटक अवशेषों से प्रभावित जमीन साफ करने और जोखिम संबंधी जागरूकता बढ़ाने के कदम भी उठाने होते हैं। पीड़ितों के इलाज, पुनर्वास और सामाजिक भागीदारी में सहायता का प्रावधान भी है। उत्तर कोरिया का ताजा परीक्षण ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय प्रयास इन हथियारों से होने वाले दीर्घकालिक नुकसान को कम करने पर केंद्रित हैं। फिलहाल परीक्षण की क्षमता और तैनाती संबंधी जानकारी मुख्यतः उत्तर कोरिया के सरकारी दावों पर आधारित है।
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