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North Korea : उत्तर कोरिया की नई चाल, ऐसे बढ़ा रहा ताकत

Uma Verma
27 March 2025 8:09 AM IST
North Korea : उत्तर कोरिया की नई चाल, ऐसे बढ़ा रहा ताकत
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वर्ल्ड | उत्तर कोरिया लगातार अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने में जुटा हुआ है। इसी कड़ी में तानाशाह किम जोंग उन ने देश की नई हमलावर ड्रोन तकनीक का जायजा लिया। ये ड्रोन दुश्मन पर हमला करने और निगरानी रखने में सक्षम हैं। किम के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया अपनी सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा।

नई ड्रोन तकनीक से मजबूत होगी सेना

उत्तर कोरिया ने हाल ही में कई तरह के हमलावर ड्रोन विकसित किए हैं, जिनकी टेस्टिंग खुद किम जोंग उन की मौजूदगी में की गई। सरकारी मीडिया के मुताबिक, इन ड्रोनों की मारक क्षमता और उड़ान क्षमता काफी उन्नत है। इनका इस्तेमाल न सिर्फ जासूसी के लिए बल्कि सटीक हमलों के लिए भी किया जा सकता है। ये ड्रोन दुश्मन की रक्षा प्रणाली को भेदने में सक्षम हैं और जमीनी लक्ष्यों को आसानी से निशाना बना सकते हैं।

क्यों बढ़ रही है सैन्य ताकत?

उत्तर कोरिया के सैन्य विस्तार के पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं। एक ओर जहां अमेरिका और दक्षिण कोरिया लगातार अपने सैन्य अभ्यास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया इसे अपने लिए खतरा मानता है। किम जोंग उन बार-बार यह संकेत देते आए हैं कि उनका देश किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। हाल ही में उन्होंने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा था और अब हमलावर ड्रोनों की टेस्टिंग से ये साफ है कि उत्तर कोरिया अपनी सुरक्षा नीति को और मजबूत कर रहा है।

दुनिया के लिए खतरे की घंटी

उत्तर कोरिया के इस कदम से कई देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं। पहले से ही अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ उसका तनाव चरम पर है और अब नई सैन्य तकनीक विकसित कर वह अपने दुश्मनों को स्पष्ट संदेश दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया के पास पहले से ही परमाणु हथियार हैं और अगर वह आधुनिक हमलावर ड्रोनों को अपनी सेना में शामिल कर लेता है, तो यह वैश्विक शांति के लिए खतरा बन सकता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने पहले भी उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी है। ताजा घटनाक्रम के बाद अमेरिका ने कहा है कि वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य शक्ति को नियंत्रित करने की कोशिश करेगा। वहीं, चीन और रूस उत्तर कोरिया के समर्थन में खड़े नजर आ सकते हैं, क्योंकि वे पहले भी कई बार प्योंगयांग को मदद देते रहे हैं।

उत्तर कोरिया के इस कदम से एक बार फिर एशिया में सैन्य तनाव बढ़ सकता है। अगर किम जोंग उन अपने सैन्य विकास की यह गति बनाए रखते हैं, तो आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इससे निपटने के लिए नई रणनीति बनानी होगी।


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