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एडमिनिस्ट्रेटिव क्लोजर’ की बहाली से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
वॉशिंगटन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ निर्वासन मामलों की कार्यवाही अस्थायी रूप से रोकने का अधिकार देने वाला बाइडनकालीन आव्रजन नियम फिलहाल बहाल करने से इनकार कर दिया है। मंगलवार, 27 अक्टूबर को अदालत ने तीन शहरों और एक कानूनी सहायता संगठन की आपात अर्जी खारिज कर दी। इसके बाद नियम को निष्प्रभावी करने वाला निचली अदालत का आदेश लागू रहेगा। मामला ‘एडमिनिस्ट्रेटिव क्लोजर’ व्यवस्था से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल इमिग्रेशन जज कुछ मामलों को सक्रिय सुनवाई की सूची से अस्थायी रूप से हटाने के लिए करते थे। सुप्रीम कोर्ट ने एक वाक्य के आदेश में आपात राहत की मांग अस्वीकार की। आदेश में विस्तृत कारण नहीं दिए गए और किसी न्यायाधीश की सार्वजनिक असहमति दर्ज नहीं हुई। अदालत के इस कदम से संबंधित व्यवस्था की तत्काल बहाली का रास्ता बंद हुआ है। हालांकि, इसे इमिग्रेशन जजों के सभी अधिकार समाप्त होने या प्रत्येक लंबित मामले में तत्काल निर्वासन की मंजूरी मिलने के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। विवाद एक विशेष प्रक्रिया और उससे संबंधित नियम पर केंद्रित है।
क्या थी कार्यवाही अस्थायी रूप से रोकने की व्यवस्था?
एडमिनिस्ट्रेटिव क्लोजर के तहत किसी मामले का अंतिम निपटारा किए बिना उसे सक्रिय सुनवाई की सूची से अलग रखा जा सकता था। इसका इस्तेमाल ऐसी परिस्थितियों में होता रहा है, जब किसी व्यक्ति का दूसरा आवेदन या संबंधित कानूनी मामला लंबित हो। उस प्रक्रिया के परिणाम से यह तय करने में मदद मिल सकती थी कि निर्वासन कार्यवाही आगे बढ़ाने की जरूरत है या नहीं। किसी व्यक्ति की वीजा याचिका पर निर्णय बाकी हो सकता है। ऐसी स्थिति में दूसरी प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वासन मामले को अस्थायी रूप से रोकना उपयोगी माना जाता था। हालांकि, प्रशासनिक रूप से मामला बंद रखने से अपने आप नागरिकता, स्थायी निवास या रहने का नया कानूनी दर्जा नहीं मिलता। यह सुनवाई के प्रबंधन का तरीका था, किसी आव्रजन आवेदन की स्वतः स्वीकृति नहीं।
2024 में नियम को दिया गया था औपचारिक आधार
पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने वर्ष 2024 में मामलों और सुनवाई की सूची के बेहतर प्रबंधन के लिए नियम बनाया था। न्याय विभाग का यह अंतिम नियम मई में प्रकाशित हुआ और 29 जुलाई 2024 से प्रभावी हुआ। इसमें इमिग्रेशन जजों तथा बोर्ड ऑफ इमिग्रेशन अपील्स की प्रशासनिक रूप से मामले बंद रखने की शक्ति को औपचारिक आधार दिया गया था। तत्कालीन न्याय विभाग का तर्क था कि इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा और संबंधित पक्षों के प्रक्रिया संबंधी अधिकार सुरक्षित रहेंगे। विभाग के अनुसार, किसी दूसरी एजेंसी के सामने लंबित आवेदन का परिणाम यदि निर्वासन मामले को समाप्त या सीमित कर सकता है, तो उसी दौरान बार-बार सुनवाई निर्धारित करना जरूरी नहीं होता। इससे उन मामलों पर अधिक समय दिया जा सकता है, जो निर्णय के लिए तैयार हैं।
टेक्सास की चुनौती और संघीय सरकार का बदला रुख
डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद संघीय प्रशासन ने नियम का समर्थन छोड़ दिया। अप्रैल 2025 में इमिग्रेशन अदालतों की निगरानी करने वाले विभाग ने कहा कि वह कानूनी चुनौती के खिलाफ इस नियम का बचाव नहीं करेगा। टेक्सास ने 22 जून 2026 को नियम के विरुद्ध मुकदमा दायर किया। राज्य ने तर्क दिया कि इससे निर्वासन मामले अनिश्चित समय तक टल सकते हैं। मुकदमा दायर होने के दिन ही टेक्सास और संघीय सरकार ने संयुक्त रूप से सहमति आधारित फैसला जारी करने का अनुरोध किया। संघीय जिला न्यायाधीश रीड ओ’कॉनर ने उसे स्वीकार कर लिया। अदालत ने 2024 के नियम को कानून के विपरीत घोषित करते हुए निरस्त किया और उसके क्रियान्वयन पर स्थायी रोक लगाई। इसके बाद नियम का बचाव करने वाले पक्षों ने मामले में हस्तक्षेप की अनुमति मांगी।
तीन शहरों और कानूनी संगठन ने उठाए सवाल
बाल्टीमोर, कोलंबस और न्यू हेवन शहरों के साथ सेंट्रो लीगल डे ला रासा नामक संगठन ने सहमति आधारित फैसले को चुनौती देने की कोशिश की। उनका आरोप था कि टेक्सास और ट्रंप प्रशासन ने अदालत के माध्यम से नियम समाप्त करवाकर सामान्य सार्वजनिक प्रक्रिया को दरकिनार किया। उन्होंने मामले में अपने हितों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होने का तर्क भी रखा। शहरों ने कहा कि निर्वासन का खतरा बढ़ने से कुछ अपराध पीड़ित पुलिस के साथ सहयोग करने में हिचक सकते हैं। उन्होंने संभावित कर राजस्व नुकसान का भी उल्लेख किया। कानूनी सहायता संगठन ने कहा कि पहले से प्रशासनिक रूप से बंद मामलों के दोबारा सक्रिय होने से उसके कर्मचारियों और संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा। ये दलीलें चुनौती देने वाले पक्षों की थीं, अदालत के अंतिम निष्कर्ष नहीं।
आपात राहत नहीं मिलने के बाद क्या होगा?
संघीय सरकार ने इन पक्षों के मामले में हस्तक्षेप करने के कानूनी अधिकार और तत्काल नुकसान संबंधी दावों पर सवाल उठाए। निचली अदालत तथा अपीलीय स्तर पर राहत नहीं मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट से आदेश रोकने का अनुरोध किया गया था। अब आपात अर्जी खारिज होने से संबंधित नियम पर रोक बरकरार रहेगी। इस आदेश का प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति के मामले की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है। अमेरिकी न्याय विभाग की मार्गदर्शिका में निर्धारित परिस्थितियों में निर्वासन पर स्थगन मांगने की दूसरी प्रक्रियाएं भी मौजूद हैं। इसलिए एडमिनिस्ट्रेटिव क्लोजर की बहाली से इनकार को सभी कानूनी राहतों की समाप्ति नहीं माना जा सकता। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल राहत नहीं दी है; विवादित व्यवस्था बहाल नहीं हुई है।
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